comScore भारत की पहली बुलेट ट्रेन का एक और महा-पड़ाव: 5 महीने में तीसरी माउंटेन टनल आर-पार - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

भारत की पहली बुलेट ट्रेन का एक और महा-पड़ाव: 5 महीने में तीसरी माउंटेन टनल आर-पार

| Updated: June 3, 2026 13:27

महाराष्ट्र के पालघर में महज 5 महीने के भीतर तीसरी पहाड़ी सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का काम तेजी से जारी है, जिससे 2027 तक देश को पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन मिलने की उम्मीद है।

भारत के बहुप्रतीक्षित मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने निर्माण की दिशा में एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। महाराष्ट्र में पिछले महज पांच महीनों के भीतर यह तीसरी माउंटेन टनल (पहाड़ी सुरंग) है, जिसके आर-पार खुदाई का काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए इसे एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

सुरंग निर्माण से जुड़ा यह अहम पड़ाव महाराष्ट्र के पालघर जिले के डहाणू तालुका में पार किया गया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने खुशी जताते हुए लिखा कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने डहाणू तालुका में पांच महीने के भीतर तीसरी माउंटेन टनल का काम पूरा कर एक और मील का पत्थर छू लिया है।

इस नई उपलब्धि के साथ ही 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) कॉरिडोर का निर्माण कार्य अब दोगुनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि करीब नौ साल पहले सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अहमदाबाद में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी थी।

मौजूदा समय में गुजरात और महाराष्ट्र दोनों राज्यों में पटरियों के लिए पुल (वायाडक्ट) आकार ले रहे हैं। इसके अलावा मुंबई के पास समुद्र के नीचे सुरंग बनाने का काम भी शुरू हो चुका है और नए स्टेशन अपने असली स्वरूप में आने लगे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2027 तक भारत की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट भी पटरी पर उतरने के लिए तैयार हो जाएगी।

हाल ही में इस प्रोजेक्ट के तहत एक और बड़ा काम पूरा किया गया है। अहमदाबाद जिले में पश्चिम रेलवे की साबरमती-मुंबई मेन लाइन पर स्थित कालूपुर फ्लाईओवर के ऊपर से वायाडक्ट लॉन्च करने का जटिल काम सोमवार को सफलतापूर्वक निपटा लिया गया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह नया वायाडक्ट मौजूदा रेलवे लाइन के बिल्कुल समानांतर चलता है। कालूपुर फ्लाईओवर के ऊपर इस 45 मीटर लंबे पुल को ‘स्पैन-बाय-स्पैन’ (एसबीएस) तकनीक की मदद से स्थापित किया गया है। इसमें जमीन से रेल स्तर तक 19.5 मीटर की ऊंचाई वाला वायाडक्ट शामिल है। कुल 19 खंडों वाले इस स्पैन का वजन 1,200 मीट्रिक टन है।

आपको बता दें कि कालूपुर फ्लाईओवर अहमदाबाद के सबसे व्यस्त टू-लेन पुलों में से एक है। यह शाहीबाग, असारवा और कालूपुर जैसे अहम इलाकों को जोड़ता है, जहां से हर दिन हजारों की संख्या में लोग आवाजाही करते हैं।

अहमदाबाद जिले में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का कॉरिडोर कुल 31 अलग-अलग क्रॉसिंग से होकर गुजरता है। इनमें आठ भारतीय रेलवे की क्रॉसिंग, एक सड़क फ्लाईओवर, कई सड़कें और अंडरपास, 16 नहर क्रॉसिंग, साबरमती नदी पर एक पुल और छह स्टील ब्रिज शामिल हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से 23 क्रॉसिंग का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।

जापान की मशहूर ‘शिंकानसेन’ तकनीक और वित्तीय मदद से तैयार हो रहा यह नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यह 508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव से होकर गुजरेगा।

रेल मंत्रालय के मुताबिक, इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशन शामिल हैं।

इस हाई-स्पीड कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां ट्रेनें 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। रेलवे के अनुमान के मुताबिक, सूरत और वडोदरा में रुकने वाली सबसे तेज बुलेट ट्रेन यह सफर महज दो घंटे से कुछ ज्यादा समय में पूरा कर लेगी। तुलनात्मक रूप से देखें तो अभी इस रूट पर सामान्य ट्रेनों को करीब सात घंटे लगते हैं, जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस को भी लगभग साढ़े पांच घंटे का समय लगता है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मुंबई-अहमदाबाद रूट को इसलिए चुना गया क्योंकि यह देश के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है। मुंबई जहां देश की आर्थिक राजधानी है, वहीं अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा प्रमुख औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्र हैं। इस रूट के चयन के पीछे यात्रियों की भारी मांग, आर्थिक व्यवहार्यता, शहरी विकास और यात्रा घनत्व जैसे अहम कारण रहे हैं।

इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को सरकार के “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के तहत एक तकनीक-हस्तांतरण पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। इस पूरी परियोजना की लागत का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा जापान की ओर से दिए जा रहे ‘सॉफ्ट लोन’ के जरिए जुटाया गया है। इस कर्ज पर महज 0.1 प्रतिशत का मामूली ब्याज लगेगा, जिसे एक लंबी मोहलत अवधि (मोरेटोरियम) के साथ 50 सालों में चुकाना होगा।

यह भी पढ़ें-

अडानी पोर्टफोलियो: वित्त वर्ष 2026 में किसी भी भारतीय कॉरपोरेट द्वारा सबसे अधिक कैपेक्स का रिकॉर्ड, 94,834 करोड़ पहुंचा EBITDA

साइबर ठगों पर गुजरात पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 2289 करोड़ के खुलासे के बाद ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0

Your email address will not be published. Required fields are marked *