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भारत के युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, डॉक्टरों ने बताया बचाव का तरीका

| Updated: July 22, 2026 12:17

विश्व मस्तिष्क दिवस पर डॉक्टरों ने दी चेतावनी, खराब लाइफस्टाइल और हाई बीपी के कारण भारतीय युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले। जानें 'BE FAST' नियम और बचाव के जरूरी तरीके।

प्रतिवर्ष 21 जुलाई को विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘ब्रेन हेल्थ: एक्सेस टू ऑल’ (सभी के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य) रखी गई है, जिसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग के लिए बीमारियों की रोकथाम और समय रहते इलाज की आवश्यकता को दर्शाना है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शारीरिक व्यायाम की कमी, सुस्त जीवनशैली, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं सिर्फ दिल के लिए ही नहीं, बल्कि गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का भी बड़ा कारण बन रही हैं।

जायडस अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. कल्पेश शाह ने एक वैश्विक अध्ययन का हवाला देते हुए बेहद चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि 1990 से 2021 तक के डेटा विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि भारत में युवाओं के बीच स्ट्रोक के सबसे ज्यादा 1.31 लाख मामले सामने आए हैं।

डॉ. शाह के अनुसार, हालांकि हमारे पास अभी बहुत सूक्ष्म स्तर के डेटा मौजूद नहीं हैं, लेकिन पिछले एक दशक में यह वृद्धि साफ तौर पर देखी जा सकती है। वर्तमान स्थिति यह है कि स्ट्रोक के शिकार हर 10 में से लगभग तीन से चार मरीज 60 वर्ष से कम उम्र के होते हैं।

अपोलो अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. दीपक मल्होत्रा ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक और हृदय रोग के मरीजों में खतरे के कारक लगभग एक समान ही होते हैं। उन्होंने एक अन्य गंभीर पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्ट्रोक के अलावा युवाओं में ब्रेन हेमरेज के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आते हैं, जिसका मुख्य कारण सड़क दुर्घटनाएं (आरटीए) हैं।

डॉ. मल्होत्रा का मानना है कि सही जानकारी और जागरूकता के जरिए ही अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं और छोटी या लंबी अवधि की शारीरिक विकलांगता के जोखिम को कम किया जा सकता है।

शेल्बी अस्पताल की न्यूरोलॉजिस्ट और स्ट्रोक विशेषज्ञ डॉ. रिद्धि पटेल ने 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जानकारी रखने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि अक्सर लोगों को अपने ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों का पता तब चलता है, जब वे स्ट्रोक या किसी अन्य जटिलता का शिकार हो जाते हैं।

डॉ. पटेल ने स्पष्ट किया कि मस्तिष्क का स्वास्थ्य हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और शारीरिक सक्रियता आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमारी के लक्षणों को जल्द पहचाना जाए और तुरंत मेडिकल सहायता ली जाए।

विशेषज्ञ ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को याद रखने के लिए ‘BE FAST’ (बी फास्ट) फॉर्मूले का उपयोग करने की सलाह देते हैं। इस शब्द का अर्थ शरीर का संतुलन बिगड़ना (Balance loss), आंखों की रोशनी में बदलाव (Eyesight change), चेहरे का लटकना या टेढ़ा होना (Face droop), बांहों में कमजोरी (Arm weakness), बोलने में कठिनाई (Speech difficulty) और आपातकालीन सेवाओं को तुरंत बुलाने का समय (Time to call) है।

डॉक्टरों का कहना है कि बेहतर परिणामों के लिए स्ट्रोक आने के बाद के शुरुआती 60 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी कारण इस महत्वपूर्ण समय सीमा को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है।

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