सूरत की कपड़ा फैक्ट्रियों में चल रहे एक बड़े बाल श्रम रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। 13 मई को उदयपुर पुलिस, एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और बाल अधिकार संगठनों ने एक संयुक्त अभियान चलाकर 91 बाल मजदूरों को सकुशल रेस्क्यू किया है।
पुलिस के अनुसार, इन मासूम बच्चों की उम्र महज सात से 14 साल के बीच है। इन बच्चों की तस्करी करके इन्हें सूरत लाया गया था और बेहद कम मजदूरी पर कपड़ा इकाइयों में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
मुक्त कराए गए ज्यादातर बच्चे राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र के आदिवासी इलाकों से ताल्लुक रखते हैं, जबकि अन्य बच्चे उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के रहने वाले हैं।
इस पूरे बड़े ऑपरेशन की शुरुआत सामाजिक कार्यकर्ता और राजस्थान राज्य बाल आयोग के पूर्व सदस्य शैलेन्द्र पंड्या द्वारा जुटाई गई अहम जानकारी के आधार पर हुई। उन्हें सूरत के कपड़ा उद्योग में बड़े पैमाने पर चल रहे बाल श्रम की पुख्ता सूचना मिली थी।
इसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया और कार्रवाई के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
जांच अधिकारियों ने बताया कि इस बड़ी कार्रवाई से पहले करीब एक महीने तक गुप्त रूप से निगरानी रखी गई थी। इस दौरान यह पुष्टि हो गई थी कि नाबालिगों से अत्यधिक शोषणकारी परिस्थितियों में काम लिया जा रहा है।
हालांकि, छापेमारी के दौरान तस्कर और फैक्ट्री मालिक कथित तौर पर पहले ही भनक लग जाने के कारण मौके से फरार होने में कामयाब रहे।
शैलेन्द्र पंड्या ने दिल दहला देने वाली जानकारी साझा करते हुए बताया कि खुद बच्चों ने ही रेस्क्यू टीमों को बाहर से बंद पड़ी उन इमारतों तक पहुंचाया, जहां नाबालिगों से 12-12 घंटे की लंबी शिफ्ट में लगातार काम कराया जाता था। पुलिस को फैक्ट्री के पास स्थित छोटे और बेहद तंग कमरों में कई बच्चे रहते हुए मिले।
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को सुरक्षित निकालकर बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश कर दिया गया है। फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की आगे की जांच जारी है और फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
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