अरबपति गौतम अडानी के समूह की कंपनियों ने 2023 में एक शॉर्ट-सेलर रिपोर्ट के कारण हुए अपने सभी नुकसानों की भरपाई कर ली है, क्योंकि यह समूह अब नियामक चुनौतियों से पार पा रहा है। अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा कॉर्पोरेट कदाचार के आरोपों के बाद समूह की नौ सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार मूल्य में भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब इन फर्मों ने लगभग 150 अरब डॉलर की वापसी कर ली है।
बुधवार को अडानी की सभी नौ कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई, जिसका नेतृत्व अडानी टोटल गैस लिमिटेड ने 13% के उछाल के साथ किया। अडानी पावर लिमिटेड ने भी अपनी शानदार बढ़त जारी रखी, जिससे इस साल इसका लाभ लगभग 75% हो गया है। इसके साथ ही फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के शेयरों में भी वृद्धि दर्ज की गई।
बुधवार को इन नौ कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य 19 ट्रिलियन रुपये (199 अरब डॉलर) के पार पहुंच गया। हालांकि, डॉलर के संदर्भ में, यह अभी भी हिंडनबर्ग रिपोर्ट जारी होने से पहले के स्तर से 20 अरब डॉलर पीछे है।
यह रिकवरी समूह के लिए एक बड़े बदलाव का प्रतीक है । समूह ने आरोपों और उसके बाद हुई भारी बिकवाली के प्रभाव से निपटने में लगभग तीन साल बिताए हैं।
अडानी ने हिंडनबर्ग के आरोपों से लगातार इनकार किया है। वहीं, भारतीय नियामक जांचों में भी हिंडनबर्ग के दावों की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका में हुए कुछ अनुकूल घटनाक्रमों के बाद इस रिकवरी ने और अधिक जोर पकड़ा है। इनमें अमेरिकी न्याय विभाग (जस्टिस डिपार्टमेंट) द्वारा अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप वापस लेने का कदम शामिल है। इसके अलावा कैपिटल ग्रुप जैसे वैश्विक निवेशकों ने भी समूह में अपना निवेश (एक्सपोजर) बढ़ाया है।
50 अरब डॉलर से अधिक के बाजार पूंजीकरण के साथ अडानी पावर अब समूह की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। निवेशक तेजी से अडानी की कंपनियों को भारत के बुनियादी ढांचे के विस्तार, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा देने और ऊर्जा संक्रमण (एनर्जी ट्रांजिशन) पर एक बड़े दांव के रूप में देख रहे हैं।
यह भी पढ़ें-








