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एयर इंडिया 171 क्रैश: एक साल बाद भी दर्द से जूझ रहा एकमात्र जीवित बचा शख्स, कहा- ‘मेरा एक हिस्सा उस दिन मर गया’

| Updated: June 11, 2026 11:59

हादसे का एक साल: एयर इंडिया 171 विमान क्रैश में इकलौते जिंदा बचे विश्वकुमार रमेश आज भी गहरे सदमे में हैं। भाई को खोने के गम, शारीरिक दर्द और न्याय की लड़ाई के बीच जानें उनका दिल झकझोर देने वाला संघर्ष।

एयर इंडिया ड्रीमलाइनर (AI 171) के भीषण हादसे को एक साल बीत चुका है। इस विमान के जलते हुए मलबे से सुरक्षित बाहर निकलने वाले एकमात्र जीवित शख्स 39 वर्षीय विश्वकुमार रमेश थे। हालांकि, आज भी वह शारीरिक दर्द, अपने प्रियजन को खोने के गहरे दुख, आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।

हादसे के बाद विश्वकुमार 15 सितंबर को वापस ब्रिटेन लौट गए थे। वहां उनका पांच साल का बेटा दिव्यांग पहली बार स्कूल जाने वाला था। वह अपनी पत्नी हीरल और बेटे के पास रहने के साथ-साथ अपना चिकित्सा उपचार कराने के लिए वहां गए थे।

उस समय मीडिया ने उन्हें दुनिया का सबसे भाग्यशाली इंसान बताया था, लेकिन विश्वकुमार को कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ। इस खौफनाक हादसे में उनके 35 वर्षीय छोटे भाई अजय सहित विमान के सभी यात्रियों और चालक दल की मौत हो गई थी। विश्वकुमार की जान केवल इसलिए बच गई क्योंकि उनकी सीट (11A) आपातकालीन निकास के ठीक बगल में थी।

ब्रिटेन के लीसेस्टर स्थित अपने दो बेडरूम वाले घर से अपनी भावनाएं साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनके लिए सबसे मुश्किल बात यह जानना है कि उनका भाई अब इस दुनिया में नहीं है। यह बरसी उन सभी के लिए उस भयानक नुकसान की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि वह जिंदा बचने के लिए आभारी जरूर हैं, लेकिन उनके अस्तित्व का एक हिस्सा उसी दिन हमेशा के लिए खो गया।

हादसे के छह महीने बाद तक विश्वकुमार की हालत ऐसी थी कि वह कभी अपने कमरे से बाहर नहीं निकलते थे। उनका अपने बेटे, परिवार या दोस्तों से कोई खास संपर्क नहीं था। एक साल बीत जाने के बाद भी, वह आज तक न तो दिव्यांग को स्कूल छोड़ने जा पाते हैं और न ही घर का सामान लाने बाजार जा सकते हैं।

हालांकि, अब उनके जीवन में उम्मीद की एक छोटी सी किरण दिखाई देने लगी है। भले ही उन्हें आज भी उस दर्दनाक हादसे के दृश्य याद आते हैं और वह अपने कमरे में खोए रहते हैं, लेकिन अब वह अपने परिवार के साथ थोड़ा अधिक समय बिताने लगे हैं।

इस मुश्किल घड़ी में लीसेस्टर के एक कार्यकारी कोच, व्यापार सलाहकार और हिंदू समुदाय के नेता संजीव पटेल उनके लिए एक बड़े मददगार बनकर सामने आए हैं। वह पहले दिन से ही बिना किसी फीस के विश्वकुमार के मार्गदर्शक बने हुए हैं। कागजी कार्रवाई, कानूनी लड़ाई और चिकित्सा सहायता प्राप्त करने से लेकर मीडिया की नजरों से उन्हें बचाने तक, पटेल ने हर कदम पर उनकी मदद की है। उन दोनों ने मिलकर अपने हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ‘हडजेल सॉलिसिटर्स’ (Hudgell Solicitors) नामक विशेषज्ञ लॉ फर्म को भी नियुक्त किया है।

संजीव पटेल के अनुसार, विश्वकुमार को अब तक एयर इंडिया से अंतरिम मुआवजे के तौर पर £21,500 प्राप्त हुए हैं। हाल ही में उन्होंने वित्तीय सहायता की कमी के मुद्दे पर एयर इंडिया और टाटा समूह के अधिकारियों के साथ एक बेहद सकारात्मक बैठक की थी। सहायता राशि को लेकर एयर इंडिया के साथ उनकी चर्चा जारी है और एयरलाइन ने विश्वकुमार के निजी चिकित्सा खर्चों को उठाने पर सहमति जता दी है। पटेल उम्मीद कर रहे थे कि परिवार को पूरी तरह से आर्थिक सुरक्षा मिले ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशान न होना पड़े।

इसी साल 29 मार्च को विश्वकुमार ने अहमदाबाद में वायु दुर्घटना जांच शाखा (AAIB) के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की थी। हडजेल सॉलिसिटर्स के पॉल मैकलोरी ने स्पष्ट किया है कि वे विमान दुर्घटना की जांच के हर छोटे-बड़े विवरण का बारीकी से अध्ययन करेंगे। उनका मानना है कि इस घटना में शामिल सभी पक्षों को किसी भी गलती, विफलता या लापरवाही की स्थिति में उचित जिम्मेदारी लेनी होगी।

वहीं, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि एयरलाइन एआई 171 त्रासदी से प्रभावित हर व्यक्ति को पूरी संवेदना और देखभाल के साथ समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसी भी व्यक्तिगत मामले की बारीकियों पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि एयर इंडिया और टाटा समूह के प्रतिनिधियों ने श्री रमेश से मुलाकात की है और उनके बीच एक बेहद सार्थक चर्चा हुई है।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि इस बातचीत से श्री रमेश की जरूरतों और चिंताओं को करीब से समझने में मदद मिली है। एयरलाइन उनके और उनके प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है और उन्हें हर संभव और उचित समर्थन प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

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