आर्मी से रिटायरमेंट लेने वाला एक पूर्व हवलदार, जो अब मछली का व्यापार करता है, करोड़ों की साइबर ठगी का मुख्य सूत्रधार निकला है। यह 45 वर्षीय व्यक्ति एक ऐसे बड़े डिजिटल घोटाले का अहम हिस्सा है, जिसमें महज कुछ ही मिनटों में 15 राज्यों के 23 बैंकों में 141 खातों के जरिए करोड़ों रुपये इधर-उधर कर दिए गए।
इस आरोपी का नाम स्वामी अयप्पा नारावुला है। करीब 10 साल पहले सेना से रिटायर होने के बाद उसने आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मछली का कारोबार शुरू किया था। दो बच्चों के पिता अयप्पा को गुरुग्राम पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) ने 25 मई को हैदराबाद से गिरफ्तार किया।
अयप्पा पर एक शीर्ष प्राइवेट सेक्टर एग्जीक्यूटिव के साथ हुए 5.85 करोड़ रुपये के ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले में मुख्य मध्यस्थ होने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि उसके फोन में करीब 40 लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी का ब्योरा मौजूद है।
गुरुग्राम पुलिस की जांच से यह साफ हो गया है कि साइबर ठग अब अपने डिजिटल फुटप्रिंट मिटाने के लिए चोरी की गई रकम को यूएस-आधारित टेदर (Tether) द्वारा जारी की जाने वाली स्टेबलकॉइन ‘USDT’ में बदल रहे हैं। अयप्पा को इससे पहले अक्टूबर 2025 में गुजरात पुलिस ने भी गिरफ्तार किया था और बाद में उसे जमानत मिल गई थी।
गुरुग्राम पुलिस की तीन सदस्यीय टीम ने तकनीकी जांच की मदद से अयप्पा को धर दबोचा। टीम ने दिलखुश नगर इलाके में उसके घर के पास तीन दिनों तक डेरा डाला था। घर में वह अपनी पत्नी, 19 वर्षीय बेटे और 15 वर्षीय बेटी के साथ रह रहा था। फिलहाल उसे हरियाणा की भोंडसी जेल में रखा गया है।
इस मामले की जांच कर रही SIT के प्रमुख और गुरुग्राम (दक्षिण) के पुलिस उपायुक्त डॉ. हितेश यादव ने बताया कि पुलिस काफी समय से अयप्पा की तलाश में थी। वह इस डिजिटल अरेस्ट केस में खच्चर (mule) खातों की दूसरी लेयर और मुख्य साजिशकर्ताओं के बीच की सबसे अहम कड़ी है। पुलिस अब गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अयप्पा के फोन में मिली क्रिप्टोकरेंसी (USDT) को भारतीय रुपये में बदलकर पीड़ित को पैसे वापस दिलाने की प्रक्रिया पूरी करेगी।
साल 2024 में ऐसे 1.23 लाख साइबर अपराध दर्ज किए गए थे, जिनमें कुल 1,935 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। इस खास मामले में ठगों ने पीड़ित के एचडीएफसी (HDFC) बैंक खातों से 5.85 करोड़ रुपये निकाले थे। इसके बाद यह रकम हरियाणा के झज्जर जिले के सुबाना गांव निवासी पीयूष के आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक खाते में गई। वहां से देश भर के 10 बैंकों के 25 अलग-अलग खातों में और फिर 141 अन्य खातों में यह पैसा ट्रांसफर किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि दूसरी लेयर के 25 खातों में से 11 खाते अकेले हैदराबाद के श्रीनिवास पद्मावती को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक में थे। इन खातों के मालिकों में एक दर्जी और एक बढ़ई शामिल थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि बैंक के एक निदेशक समुंद्रला वेंकटेश्वरलू ने नौकरी दिलाने के बहाने उनसे खाली चेक बुक और निकासी फॉर्म पर हस्ताक्षर करवा लिए थे।
इस मामले में पीयूष और उसके साथियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है जो अब जमानत पर हैं। वहीं, SIT ने 29 अप्रैल को बैंक निदेशक समुंद्रला को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में समुंद्रला ने खुलासा किया कि ‘हैदराबाद गैंग’ इन फर्जी खातों से पैसे निकालकर उसे USDT में बदलता था और फिर वह क्रिप्टोकरेंसी अयप्पा को भेज दी जाती थी।
पुलिस का मानना है कि अयप्पा से पूछताछ में इस केस के अलावा कई अन्य डिजिटल अरेस्ट मामलों को सुलझाने में भी मदद मिलेगी। गृह मंत्रालय की साइबर फ्रॉड यूनिट (I4C) ने पहले ही अलर्ट किया था कि हैदराबाद के वे 11 बैंक खाते 181 अन्य शिकायतों के केंद्र में भी हैं। एक शिकायत के मुताबिक, महज तीन महीने के भीतर इन खातों से 21 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था।
गुरुग्राम केस के जांच अधिकारी सुरेंद्र रोहिल्ला ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि इस डील में अयप्पा मुख्य बिचौलिया था। सभी को उनका हिस्सा बांटने के बाद, बाकी की क्रिप्टोकरेंसी कंबोडिया में बैठे साइबर गैंग को भेज दी जाती थी। अयप्पा ने कबूल किया है कि पिछले साल अक्टूबर से लेकर अब तक उसने साइबर अपराधों के जरिए कमीशन के तौर पर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गोदावरी के ताडेपल्लीगुडेम शहर के रहने वाले अयप्पा ने हाल ही में मछली का व्यापार शुरू किया था। उसके खिलाफ 2024 और 2025 के बीच कम से कम 16 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से ज्यादातर अहमदाबाद साइबर पुलिस ने दर्ज किए थे। कई मामले खारिज हो चुके हैं, लेकिन अहमदाबाद के शाहीबाग में उसके खिलाफ तीन केस अभी भी ‘सक्रिय’ हैं। जब गुरुग्राम पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, तब वह जमानत पर बाहर था।
सुरेंद्र रोहिल्ला के मुताबिक, अयप्पा ने बताया कि गुरुग्राम केस से जुड़ी टेलीग्राम चैट और क्रिप्टो का सारा हिसाब उसी फोन में मौजूद था जिसे गुजरात पुलिस ने जब्त किया था। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर उस फोन को केस के सबूत के तौर पर अपने कब्जे में ले लिया है। आरोपी ने चालाकी दिखाते हुए गुजरात पुलिस से अपने फोन में मौजूद क्रिप्टोकरेंसी और गुरुग्राम केस के लेन-देन की बात छिपाई थी।
इस बीच, ठगी का शिकार हुए एग्जीक्यूटिव के 1.05 करोड़ रुपये वापस रिकवर कर लिए गए हैं। इसमें से कुछ रकम उन बैंकों से मिली है जिनका इस्तेमाल घोटाले में हुआ था, जबकि कुछ नकद राशि बैंक निदेशक समुंद्रला की गिरफ्तारी के वक्त उससे बरामद की गई थी।
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