गुजरात सरकार ने गांधीनगर स्थित देश के प्रमुख वित्तीय हब, गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में शराब के शौकीनों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने दो अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कर गिफ्ट सिटी में परोसी जाने वाली विदेशी शराब पर वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) को 65 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही 30 मिलीलीटर शराब पर लगने वाले लगभग 240 रुपये के विशेष शुल्क को भी पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
इस बड़े कदम के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य गिफ्ट सिटी में शराब की कीमतों को देश के अन्य प्रमुख महानगरों के बराबर लाना है। विकास से जुड़े सूत्रों का कहना है कि टैक्स और शुल्क में इस भारी कटौती से यहां एक बेहतरीन ‘ईवनिंग सोशल लाइफ’ विकसित होगी। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं को इस वित्तीय हब की ओर आकर्षित करने में काफी मदद मिलेगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस फैसले के साथ ही राज्य सरकार ने उस पुरानी विसंगति को दूर कर दिया है, जिसके कारण इस फिनटेक हब में शराब पीना भारत के अन्य महानगरों की तुलना में कई गुना अधिक महंगा था।
कीमतों में आई इस कमी को एक आसान गणित से समझा जा सकता है। पहले गिफ्ट सिटी के किसी रेस्टोरेंट या बार में अगर 30 मिलीलीटर विदेशी शराब के एक पेग की मेन्यू कीमत 100 रुपये होती थी, तो ग्राहकों को इसके लिए 561 रुपये चुकाने पड़ते थे। इसमें 240 रुपये का विशेष शुल्क और 65 प्रतिशत की दर से 221 रुपये का वैट शामिल होता था।
अब हालिया टैक्स कटौती और विशेष शुल्क हटने के बाद, उसी 100 रुपये वाली शराब के लिए ग्राहकों को केवल 125 रुपये ही देने होंगे। इसी तरह, अगर किसी उच्च श्रेणी की 30 मिलीलीटर शराब की मेन्यू कीमत 1,000 रुपये है, तो पहले यह टैक्स और शुल्क के साथ 2,046 रुपये में मिलती थी। अब यह घटकर मात्र 1,250 रुपये रह जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। पहले शराब की बेतहाशा कीमतें पेशेवरों, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और यहां तक कि सरकारी अधिकारियों के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई थीं।
इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने स्पष्ट किया कि पहले सभी श्रेणी की शराब पर 8,000 रुपये प्रति बल्क लीटर का विशेष शुल्क लगाया जाता था, जो 30 मिलीलीटर के लिए 240 रुपये बैठता था। मुंबई या दिल्ली जैसे किसी भी तुलनीय बाजार में ऐसा कोई भारी भरकम शुल्क मौजूद नहीं है।
सबसे बड़ी समस्या यह थी कि गिफ्ट सिटी में 65 प्रतिशत वैट की गणना मेन्यू प्राइस और विशेष शुल्क दोनों को मिलाकर की जाती थी, जबकि अन्य राज्यों में वैट केवल मेन्यू प्राइस पर लगता है। इस दोहरे टैक्स सिस्टम ने अंतिम खुदरा मूल्य को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था।
इस कारण एक ग्लोबल बिजनेस और लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन के रूप में गिफ्ट सिटी का आकर्षण कम हो रहा था। हॉस्पिटैलिटी ऑपरेटरों का मुनाफा भी घट रहा था, जिससे नए निवेश हतोत्साहित हो रहे थे और एक जीवंत फूड एंड बेवरेज (F&B) इकोसिस्टम का विकास बाधित हो रहा था।
अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सरकार ने यह अहम फैसला 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) की मेजबानी को ध्यान में रखते हुए भी लिया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित खेलों के कुछ आयोजन स्थल गिफ्ट सिटी के आसपास ही स्थित हैं। ऐसे में भविष्य में उन क्षेत्रों में भी शराब बिक्री के समान नियम लागू किए जा सकते हैं, जहां खेलों से जुड़े मेहमान ठहरेंगे।
गौरतलब है कि शराब की कीमतों में यह राहत राज्य सरकार के उन पूर्व फैसलों की ही एक कड़ी है, जिनकी शुरुआत दिसंबर 2023 में गिफ्ट सिटी में शराबबंदी के नियमों में ढील देने के साथ हुई थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में इन प्रतिबंधों को और भी आसान बनाया गया था।
यह गुजरात सरकार द्वारा शराबबंदी नियमों में ढील देने का पहला ऐसा मामला था, जिसने इस फिनटेक हब के लोगों को शराब पीने और मेहमानों का मनोरंजन करने की अनुमति दी। अधिकारियों के अनुसार, इन नवीनतम उपायों का अंतिम लक्ष्य इस शहर को बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और यहां शिफ्ट होने का विचार कर रहे उच्च-कुशल पेशेवरों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
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