वॉशिंगटन: अमेरिका की नागरिकता हासिल करने का सपना देखने वाले लोगों की जेब पर अब बहुत भारी बोझ पड़ने वाला है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने नेचुरलाइजेशन (प्राकृतिकरण) आवेदन शुल्क में एक बड़े इजाफे का प्रस्ताव रखा है। इस नए कदम से वैध रूप से वहां रह रहे स्थायी प्रवासियों के लिए अमेरिकी नागरिक बनना काफी महंगा हो जाएगा। इस बदलाव का सीधा असर हर साल नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले हजारों भारतीय नागरिकों पर भी पड़ेगा।
प्रस्तावित नियमों के तहत न सिर्फ आवेदन फीस में करीब 80 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी की जा रही है, बल्कि कम आय वाले आवेदकों को मिलने वाली फीस माफी और रियायती दरों की सुविधा को भी पूरी तरह खत्म करने की तैयारी है।
कैसे मिलती है अमेरिकी नागरिकता?
सामान्य नियमों के मुताबिक अमेरिका की नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। इसके साथ ही उसके पास वैध स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड) का दर्जा होना अनिवार्य है। आवेदक का आवेदन करने से पहले कम से कम पांच साल तक अमेरिका में लगातार रहना जरूरी है।
इतना ही नहीं, इस पांच साल की अवधि के दौरान आवेदक कम से कम 30 महीने तक शारीरिक रूप से अमेरिका में मौजूद रहा हो। साथ ही, जिस राज्य या यूएससीआईएस (USCIS) जिले में आवेदन किया जा रहा है, वहां वह कम से कम तीन महीने से रह रहा हो। आवेदकों के लिए अच्छा नैतिक चरित्र बनाए रखना, अमेरिकी संविधान के सिद्धांतों के प्रति निष्ठा दिखाना और नागरिकता मिलने तक देश में लगातार निवास करना आवश्यक है। इसके अलावा, उन्हें अंग्रेजी भाषा की परीक्षा पास करनी होती है और अमेरिकी इतिहास व सरकार की बुनियादी समझ साबित करनी होती है।
फॉर्म N-400 की फीस में 80% तक की बढ़ोतरी
गृह सुरक्षा विभाग के इस नए प्रस्ताव में फॉर्म N-400 की फाइलिंग फीस को काफी ज्यादा बढ़ाने की बात कही गई है। यह वही मुख्य फॉर्म है जिसका इस्तेमाल ग्रीन कार्ड धारक अमेरिकी नागरिकता पाने के लिए करते हैं।
कागजी (पेपर) आवेदन करने वालों के लिए यह फीस 760 डॉलर से बढ़कर सीधे 1,330 डॉलर हो जाएगी, जो कि करीब 75 फीसदी का उछाल है। वहीं दूसरी तरफ, ऑनलाइन आवेदन करने वाले प्रवासियों को अब 710 डॉलर के बजाय 1,280 डॉलर चुकाने होंगे, यानी इसमें सीधे तौर पर लगभग 80 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जाएगी।
कम आय वालों को नहीं मिलेगी कोई रियायत
इस नए प्रस्ताव का एक सबसे बड़ा नुकसान उन लोगों को होगा जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। नया नियम लागू होने पर कम आय वाले आवेदकों को मिलने वाली रियायती फीस और ज्यादातर शुल्क माफी के विकल्प समाप्त कर दिए जाएंगे।
यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो छात्रों, सेवानिवृत्त बुजुर्गों और उन तमाम प्रवासियों के लिए नागरिकता की राह बेहद कठिन और खर्चीली हो जाएगी, जो वर्तमान में वित्तीय सहायता या फीस छूट के पात्र माने जाते हैं।
नागरिकता लेने वाले भारतीयों की संख्या में बड़ी गिरावट
अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के मामले में भारतीय हमेशा से ही सबसे आगे रहने वाले समूहों में शामिल रहे हैं। गृह सुरक्षा विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024 में 49,700 भारतीयों ने अमेरिका की नागरिकता हासिल की। इस संख्या के साथ नए अमेरिकी नागरिकों के रूप में भारत, मैक्सिको के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है।
हालांकि, पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिकी नागरिकता लेने वाले भारतीयों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। विभाग का डेटा बताता है कि वित्तीय वर्ष 2022 में 65,960 भारतीयों को नागरिकता मिली थी, जो वित्तीय वर्ष 2023 में घटकर 59,050 रह गई। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2024 में यह संख्या और कम होकर 49,700 पर आ गई। इस तरह पिछले महज दो सालों के भीतर ही अमेरिकी नागरिकता अपनाने वाले भारतीयों की तादाद में लगभग 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
आवेदन खारिज होने पर अपील करना भी हुआ महंगा
प्रस्ताव में केवल नागरिकता की शुरुआती फीस ही नहीं बढ़ाई गई है, बल्कि आवेदन खारिज होने के बाद उसके खिलाफ चुनौती देने वाले फॉर्म N-336 की फीस में भी बड़ा इजाफा किया गया है।
अब कागजी माध्यम से अपील दायर करने के लिए 830 डॉलर की जगह 1,475 डॉलर का भुगतान करना होगा। वहीं अगर कोई आवेदक ऑनलाइन तरीके से अपनी अपील दर्ज कराना चाहता है, तो उसे 780 डॉलर के मुकाबले अब 1,425 डॉलर खर्च करने पड़ेंगे।
जनता के पास सुझाव और आपत्ति दर्ज कराने के लिए 60 दिन का समय
राहत की बात यह है कि ये प्रस्तावित बदलाव अभी तुरंत प्रभावी नहीं हुए हैं। गृह सुरक्षा विभाग ने इस मामले में 60 दिनों की समय-सीमा तय करते हुए जनता से प्रतिक्रियाएं और सुझाव मांगे हैं। इस अवधि के दौरान कोई भी व्यक्ति या संगठन इस फैसले पर अपनी राय और आपत्ति दर्ज करा सकता है।
विभाग की तरफ से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि तय तारीख की आखिरी रात पूर्वी समयानुसार (ET) आधी रात से पहले तक इलेक्ट्रॉनिक फेडरल डॉकेट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए सुझाव स्वीकार किए जाएंगे। इन सभी कड़े फीडबैक की समीक्षा करने के बाद ही एजेंसी अंतिम नियम लागू करने पर कोई अंतिम फैसला लेगी। विभाग का तर्क है कि इस फीस बढ़ोतरी का मकसद आव्रजन सेवाओं के वास्तविक प्रशासनिक खर्चों को संतुलित करना और परिचालन लागत की भरपाई करना है।
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