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फार्मा कंपनी के खर्चे पर पेरिस-मोनाको की ट्रिप पड़ी भारी, गुजरात के तीन मशहूर त्वचा रोग विशेषज्ञ 13 महीने के लिए सस्पेंड

| Updated: July 1, 2026 16:29

फार्मा कंपनी के खर्चे पर पेरिस और मोनाको की विदेश यात्रा करने वाले गुजरात के तीन मशहूर त्वचा रोग विशेषज्ञों पर मेडिकल काउंसिल (GMC) ने कड़ा एक्शन लिया है। कदाचार के आरोप में इन डॉक्टरों का मेडिकल रजिस्ट्रेशन 13 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है।

गुजरात मेडिकल काउंसिल (जीएमसी) ने कथित कदाचार के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के तीन जाने-माने त्वचा रोग विशेषज्ञों (डर्मेटोलॉजिस्ट) का मेडिकल रजिस्ट्रेशन 13 महीने के लिए निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक विदेशी यात्रा से जुड़े विवाद के बाद की गई है, जिसका खर्च कथित तौर पर एक बायोटेक कंपनी ने उठाया था।

यह पूरा मामला साल 2024 में पेरिस और मोनाको में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से जुड़ा है। इन तीन डॉक्टरों सहित देश के नौ राज्यों के कुल 30 स्वास्थ्य पेशेवर इस यात्रा पर गए थे। काउंसिल के सूत्रों का कहना है कि यह उन गिने-चुने मामलों में से एक है जहां किसी फार्मा कंपनी द्वारा प्रायोजित विदेश यात्रा के लिए डॉक्टरों के खिलाफ इतनी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई है।

जिन डॉक्टरों पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है, उनमें सूरत के डॉ. जगदीशकुमार सखिया और डॉ. अमी शाह के साथ-साथ अहमदाबाद की डॉ. गीता पटेल शामिल हैं। इनमें से डॉ. सखिया त्वचा रोग विशेषज्ञों के संगठन आईएडीवीएल (IADVL) की गुजरात शाखा के अध्यक्ष हैं और डर्माकॉन 2027 के आयोजन सचिव भी हैं। इसके अलावा वह त्वचा क्लीनिकों की एक बड़ी चेन के संस्थापक हैं।

इस पूरे विवाद को इससे पहले राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के समक्ष भी उठाया गया था। जांच में सामने आया कि महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, असम और केरल के डॉक्टरों ने एबवी हेल्थकेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से यात्रा और आतिथ्य लाभ प्राप्त किए थे। प्रति भागीदार इस प्रायोजन की कीमत एक लाख रुपये से अधिक आंकी गई थी। पिछली रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉक्टरों के इस समूह की विदेशी यात्रा का कुल खर्च करीब दो करोड़ रुपये था।

जीएमसी के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन चिकित्सा व्यवसायियों का यह आचरण 2002 के नियमों के क्लॉज 6.8 का सीधा उल्लंघन है। सूत्रों के अनुसार, इन डॉक्टरों को अपना पक्ष रखने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने 8 जनवरी और 29 जून को अपने दस्तावेज और जरूरी जानकारी जमा की थी। इसके बाद 30 जून को काउंसिल की आम सभा और कार्यकारी समिति ने यह कड़ा फैसला लिया।

इस निर्णय में फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज 2014 और 2024 के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा परिषद के 2002 के पेशेवर आचरण नियमों का हवाला दिया गया है। 30 जून के आदेश के अनुसार, निलंबन की इस 13 महीने की अवधि के दौरान ये चिकित्सक गुजरात राज्य के भीतर किसी भी रूप में मेडिकल प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। साथ ही वे मेडिकल एक्ट के तहत मिलने वाले किसी भी अधिकार या विशेषाधिकार का दावा भी नहीं कर पाएंगे।

आदेश में यह भी बताया गया है कि निलंबन अवधि पूरी होने के बाद नियमों के अनुपालन के अधीन ही रजिस्टर में इनका नाम दोबारा बहाल किया जाएगा। हालांकि, ये डॉक्टर एनएमसी के प्रावधानों के अनुसार इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं।

इस बीच, एनएमसी के नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड ने इसी साल मई में सभी राज्य परिषदों को एक रिमाइंडर भेजकर इस पूरे मामले की कार्यवाही को समयबद्ध तरीके से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया था। कुछ राज्यों ने दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन कई राज्य मेडिकल काउंसिल को अभी अपनी रिपोर्ट सौंपनी बाकी है।

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