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भारतीय रेलवे के एसी कोच में महालूट: 4 साल में यात्रियों ने चुराए 1.27 करोड़ तौलिये, चादरें और कंबल

| Updated: July 13, 2026 14:22

RTI का चौंकाने वाला खुलासा: 4 साल में रेलवे को 104 करोड़ का नुकसान, जानिए चोरी के मामले में किस शहर के यात्री हैं सबसे आगे।

हर रात भारतीय रेलवे के एसी (AC) कोच में सफर करने वाले लगभग आठ लाख यात्री टिकट के साथ मिलने वाले बेडरोल का इस्तेमाल करते हैं। इस सुविधा में आमतौर पर दो चादरें, एक कंबल, एक तकिया, एक तकिया कवर और एक फेस टॉवल शामिल होता है। लेकिन यात्रा खत्म होते ही हर एक हजार में से लगभग एक यात्री रेलवे का कोई न कोई सामान अपने साथ ले जाता है।

सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी 2022 (जब महामारी के बाद बेडरोल सेवा पूरी तरह से बहाल हुई थी) से मई 2026 के बीच यात्रियों ने कम से कम 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम चुराए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से 2025 के बीच इन चोरियों में 56 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रेलवे द्वारा हर दिन बांटे जाने वाले बेडरोल की विशाल संख्या के सामने यह आंकड़ा भले ही छोटा लगे, लेकिन यह यात्रियों के व्यवहार और रेलवे को होने वाले नुकसान की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।

आरटीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले चार सालों में इन चोरियों के कारण बेडरोल ठेकेदारों को 104.51 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। सबसे दुखद बात यह है कि इस चोरी की कीमत अक्सर उन गरीब कोच अटेंडेंट को चुकानी पड़ती है, जिन्हें ठेकेदार काम पर रखते हैं।

तौलियों की सबसे ज्यादा चोरी

अगर चोरी हुए सामानों की सूची पर नजर डालें, तो फेस टॉवल सबसे ऊपर है। आकार में छोटा होने के कारण इसे बैग में रखना सबसे आसान होता है। पिछले चार सालों में देश भर से कुल 46.54 लाख तौलिये चोरी हुए हैं। इसके बाद 41.13 लाख चादरें, 23.59 लाख तकिया कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिये रेलवे कोच से गायब हुए हैं।

देश भर के सात रेलवे जोनों के 10 मंडलों में कुल चोरियों का 67 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है। इनमें राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और जयपुर, बिहार के सोनपुर और दानापुर के साथ-साथ रांची, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और बिलासपुर शामिल हैं।

चोरी की कुल मात्रा के हिसाब से बीकानेर सबसे बुरी तरह प्रभावित मंडल है, जहां से 25.76 लाख आइटम गायब हुए। इसके बाद रांची से 9.31 लाख और दिल्ली से 8.21 लाख सामानों की चोरी हुई। मुंबई, जोधपुर, अहमदाबाद और दानापुर का नंबर इनके बाद आता है।

अलग-अलग मंडलों का हाल

अलग-अलग मंडलों में यात्रियों की पसंद भी अलग-अलग देखने को मिली है। बीकानेर में चादरों की सबसे ज्यादा चोरी हुई, जो इस मंडल की कुल चोरी का लगभग आधा हिस्सा (12.42 लाख) है। वहीं दिल्ली, रांची, मुंबई, दानापुर, अहमदाबाद और जयपुर जैसे अधिकांश बड़े मंडलों में तौलियों की सबसे ज्यादा चोरी दर्ज की गई है।

दिल्ली में कुल चोरी का 58 प्रतिशत और दानापुर में 59 प्रतिशत हिस्सा केवल तौलियों का रहा। सोनपुर और बिलासपुर में यात्रियों ने तकिये के कवर पर ज्यादा हाथ साफ किया। दूसरी ओर, जोधपुर में कंबल मुख्य लक्ष्य रहे, जहां यात्रियों ने 3.4 लाख से अधिक कंबल चुराए।

साल 2022 के बाद से बीकानेर मंडल में चोरी की घटनाओं में सबसे ज्यादा उछाल आया है। यहां चोरी का आंकड़ा 2.99 लाख से बढ़कर 12.34 लाख तक पहुंच गया। सोनपुर, दानापुर, धनबाद, रांची और जोधपुर में भी ऐसी घटनाओं में भारी वृद्धि देखी गई है।

हालांकि, राजधानी दिल्ली ने एक सकारात्मक रुझान दिखाया, जहां चोरियों में 79 प्रतिशत (3.27 लाख से घटकर 68,013) की भारी कमी आई। अहमदाबाद और समस्तीपुर में भी चोरी के मामलों में काफी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली और पलक्कड़ मंडलों में चोरी का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

अटेंडेंट की कटती है सैलरी

रेल मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस मुद्दे को गंभीर चिंता का विषय बताया है और कहा है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चोरी में रेलवे स्टाफ की मिलीभगत का कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन इन चोरियों के कारण अतिरिक्त बेडरोल सेट की व्यवस्था करनी पड़ती है जिससे रेलवे पर वित्तीय बोझ बढ़ता है।

मध्य रेलवे के सोलापुर मंडल में एक ठेकेदार को भुगतान में देरी और जुर्मानों के कारण अपना तीन साल का अनुबंध महज 14 महीने में ही खत्म करना पड़ा।

रेलवे के 2015 के नियमों के अनुसार तकिये के लिए 115 रुपये, चादर के लिए 198 रुपये, तकिया कवर के लिए 55 रुपये, तौलिये के लिए 48 रुपये और कंबल के लिए 343 रुपये की वसूली ठेकेदारों से की जाती है।

ठेकेदार यह भारी-भरकम रकम कोच अटेंडेंट के वेतन से काट लेते हैं। एक अटेंडेंट ने बताया कि उनकी दिहाड़ी महज 700 रुपये है, लेकिन महीने भर काम करने के बाद भी चोरी की भरपाई के कारण उनके वेतन से दो से तीन हजार रुपये काट लिए जाते हैं।

रेलवे के कड़े कदम

इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए भारतीय रेलवे कई सख्त कदम उठा रही है। कोच अटेंडेंट की काउंसलिंग करने के साथ-साथ स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। कोच मित्रा ऐप के जरिए बेडरोल के वितरण और ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों की निगरानी की जा रही है। ठेकेदारों के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य कर दिया गया है।

कुछ मंडलों, जैसे भोपाल, ने चोरी रोकने के लिए हर कोच में समर्पित अटेंडेंट तैनात किए हैं। ट्रेन से उतरने से 30 मिनट पहले बेडरोल वापस करने का नियम भी सख्ती से लागू किया जा रहा है और कई मंडलों ने इसे बेडरोल के पैकेट पर छापना शुरू कर दिया है।

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने चेतावनी दी है कि रेलवे संपत्ति अधिनियम के तहत यह एक गैर-जमानती अपराध है, जिसके तहत शक होने पर यात्रियों के सामान की तलाशी भी ली जा सकती है। 54 मंडलों से प्राप्त यह डेटा भले ही चौंकाने वाला हो, लेकिन पूरी तस्वीर और भी भयावह हो सकती है, क्योंकि कई मंडलों ने चोरी हुए सामानों की कीमत और पूरी श्रेणियों का डेटा उपलब्ध नहीं कराया है।

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