comScore अमेरिकी केस वापसी के पीछे कोई 'डील' नहीं: गौतम अडानी ने शपथ पत्र में सभी अटकलों को किया सिरे से खारिज - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

अमेरिकी केस वापसी के पीछे कोई ‘डील’ नहीं: गौतम अडानी ने शपथ पत्र में सभी अटकलों को किया सिरे से खारिज

| Updated: July 15, 2026 18:41

अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा केस खारिज किए जाने के बाद गौतम अडानी ने अदालत में दाखिल किया हलफनामा, केस वापसी के एवज में किसी भी गुप्त डील या निवेश की सौदेबाजी की अटकलों को किया सिरे से खारिज।

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने अमेरिकी कोर्ट में एक शपथ पत्र दाखिल किया है। इसमें उन्होंने साफ तौर पर इस बात से इनकार किया है कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा उनके खिलाफ आपराधिक मामला खारिज करने के कदम के पीछे कोई वादा, समझौता या डील थी। अडानी ने शपथपूर्वक कहा कि उन्हें इस फैसले से जुड़े किसी भी प्रकार के लेनदेन या सौदेबाजी की कोई जानकारी नहीं है।

यह हलफनामा न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के अमेरिकी जिला न्यायालय के न्यायाधीश निकोलस गरोफिस के 8 जुलाई के आदेश के जवाब में दाखिल किया गया है। न्यायाधीश ने अडानी से 15 जुलाई तक शपथ के तहत यह बताने को कहा था कि क्या वह अभियोग खारिज करने से जुड़े किसी वादे, प्रस्ताव या समझौते के बारे में जानते हैं।

अडानी समूह के प्रस्तावित अमेरिकी निवेश से जुड़ी अटकलों पर जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने की समूह की योजना की सार्वजनिक घोषणा 13 नवंबर 2024 को ही कर दी गई थी। यह घोषणा उनके खिलाफ आरोप पत्र खुलने से पहले ही हो चुकी थी। अडानी ने केस वापस लेने के एवज में किसी भी तरह के लेनदेन या गुप्त समझौते की बात को पूरी तरह नकार दिया है।

हलफनामे के अनुसार, अडानी के कानूनी सलाहकार सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी ने न्याय विभाग और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं और एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) व अन्य दस्तावेज सौंपे थे। वकीलों ने संकेत दिया था कि यदि अमेरिकी अधिकारी चाहें तो प्रस्तावित निवेश किसी समाधान का हिस्सा बन सकता है।

हालांकि, न्याय विभाग ने बाद में वकीलों को स्पष्ट कर दिया था कि केस खारिज करने के निर्णय में इस निवेश प्रस्ताव पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। अडानी ने भी अपने हलफनामे में जोर देकर कहा कि निवेश योजना की विभाग के फैसले में कोई भूमिका नहीं थी।

यह हलफनामा न्याय विभाग की 4 जुलाई की उस फाइलिंग के बाद आया है, जिसमें अभियोजकों ने केस खारिज होने को अमेरिकी निवेश से जोड़ने वाली मीडिया रिपोर्ट्स को झूठा करार दिया था। न्याय विभाग के प्रमुख एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल आर ट्रेंट मैककोटर ने खुद को इस कदम के पीछे “अंतिम और एकमात्र निर्णयकर्ता” बताया था।

मैककोटर ने अदालत को बताया कि प्रतिभूति धोखाधड़ी का यह मामला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं था। उन्होंने तर्क दिया कि कथित आचरण मुख्य रूप से भारत में हुआ था, भारतीय अधिकारियों को कोई कार्रवाई योग्य कदाचार नहीं मिला, निवेशकों को कोई नुकसान नहीं हुआ और प्रमुख सबूत व गवाह अमेरिका से बाहर थे।

उन्होंने यह भी कहा कि जो बाइडेन प्रशासन के अंतिम दिनों में लाया गया यह आरोप पत्र महज एक “नेम-एंड-शेम” (बदनाम करने की) कार्रवाई प्रतीत होता है। यह ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं से भी मेल नहीं खाता है।

गौरतलब है कि 2024 में बाइडेन प्रशासन के तहत दर्ज किए गए मामले में अडानी और सात अन्य पर भारत में बिजली अनुबंध हासिल करने के लिए 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने और निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया गया था। अडानी ने इन सभी आरोपों का दृढ़ता से खंडन किया था।

नवंबर 2024 में इन आरोपों के सार्वजनिक होते ही शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी। महज चार कारोबारी सत्रों में अडानी समूह का लगभग 2.85 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप स्वाहा हो गया था, जिससे लाखों शेयरधारक प्रभावित हुए थे।

अब न्याय विभाग ने इस आपराधिक कार्यवाही को ‘विद प्रेजुडिस’ (स्थायी रूप से) खारिज करने की मांग की है, जिससे यह मामला हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।

हालांकि, रूल 48 (ए) के तहत सरकार के अनुरोध को मंजूरी देने से पहले, न्यायाधीश गरोफिस यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि न्याय विभाग का केस खारिज करने का कारण पूरी तरह से वास्तविक है। न्यायाधीश इसी बात की पुष्टि चाहते थे कि इस फैसले को प्रभावित करने वाला कोई अघोषित समझौता तो नहीं हुआ है।

यह भी पढ़ें-

भारत में 8% से भी कम लोगों के पास है पासपोर्ट, जानिए विदेश मंत्रालय ने क्यों बताई इस अहम दस्तावेज की असली परिभाषा

ग्राहम स्टेंस हत्याकांड: 26 साल से कैद दारा सिंह की रिहाई पर फैसला जल्द

Your email address will not be published. Required fields are marked *