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ट्रंप प्रशासन को बड़ा कानूनी झटका: प्रवासियों के वर्क परमिट रद्द करने पर कोर्ट की रोक

| Updated: July 22, 2026 18:09

अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के टीपीएस वर्क परमिट छीनने के फैसले पर लगाई रोक, उधर न्यू जर्सी में 6600 गैर-नागरिकों के वोटर लिस्ट में जुड़ने से खड़ा हुआ नया विवाद।

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को एक बड़ा झटका लगा है। एक संघीय न्यायाधीश ने मंगलवार को अस्थायी तौर पर उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ‘टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस’ (TPS) वाले हजारों शरणार्थियों और प्रवासियों के वर्क परमिट छीने जाने थे।

बोस्टन में अमेरिकी जिला न्यायाधीश नथानिएल गॉर्टन ने अप्रवासी अधिकार समूहों और मजदूर संघों के पक्ष में यह फैसला सुनाया। इन समूहों ने ‘यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज’ (USCIS) द्वारा लागू की जा रही नई नीतियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। ये नीतियां पिछले साल कांग्रेस द्वारा पारित आव्रजन प्रतिबंधों को लागू करने के लिए बनाई गई थीं।

न्यायाधीश गॉर्टन का यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि वह ट्रंप प्रशासन की नीति पर लंबी रोक लगाने का अंतिम निर्णय नहीं ले लेते। कोर्ट इस मामले में 5 अगस्त तक अपना फैसला सुनाएगा। इस पूरे मामले पर USCIS की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

गौरतलब है कि जुलाई 2025 में रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने ट्रंप के हस्ताक्षर वाले कर और खर्च कानून को पारित किया था। इस कानून में पहली बार शरण मांगने वालों के लिए शुल्क लगाया गया था और टीपीएस धारकों के रोजगार अधिकारों को सीमित कर दिया गया था।

टीपीएस एक विशेष दर्जा है जो युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं या अन्य संकटों से जूझ रहे देशों के नागरिकों को अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति देता है। यह सुविधा तब दी जाती है जब उनके लिए अपने स्वदेश लौटना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं होता।

अपने सख्त आव्रजन एजेंडे के तहत ट्रंप प्रशासन एक दर्जन से अधिक देशों के नागरिकों के लिए टीपीएस खत्म करने का प्रयास कर रहा है। पिछले महीने ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हैती और सीरिया के हजारों प्रवासियों के मामले में प्रशासन को ऐसा करने की अनुमति दी थी।

उदारवादी कानूनी समूह ‘डेमोक्रेसी फॉरवर्ड’ द्वारा दायर मुकदमे में वादियों ने तर्क दिया कि USCIS ने नए कानून के प्रावधानों को गैरकानूनी तरीके से लागू किया है। उनका कहना था कि इन नीतियों पर रोक लगनी चाहिए, विशेष रूप से उस नीति पर जिससे अल साल्वाडोर, सूडान और यूक्रेन के हजारों टीपीएस धारकों के बुधवार से काम करने की क्षमता खोने का खतरा था।

वादियों का आरोप है कि ये नीतियां अल साल्वाडोर, सूडान और यूक्रेन के लोगों पर पुरानी तारीख से नई पाबंदियां लगाकर उनके वर्क परमिट की अवधि को गलत तरीके से कम कर रही हैं।

‘डेमोक्रेसी फॉरवर्ड’ की अध्यक्ष और सीईओ स्काई पेरीमैन ने एक बयान में कहा कि न्यायाधीश गॉर्टन का यह फैसला सुनिश्चित करता है कि जब तक अदालतें इन नीतियों की वैधता पर विचार कर रही हैं, तब तक हजारों परिवारों की रोजी-रोटी नहीं छिनेगी।

एक तरफ जहां प्रशासन अन्य देशों के लिए टीपीएस समाप्त कर रहा है, वहीं उसने जनवरी में इन तीन देशों के लोगों के लिए इसे बढ़ा दिया था। फिलहाल अल साल्वाडोर के लिए टीपीएस 9 सितंबर तक और सूडान तथा यूक्रेन के लिए 19 अक्टूबर तक वैध है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम के अनुसार इन नई नीतियों को अपनाने से पहले जनता को नोटिस और टिप्पणी करने का मौका नहीं दिया गया। इसके अलावा 2025 के कानून के टीपीएस वर्क परमिट प्रावधानों को बिना किसी वैधानिक अधिकार के पिछली तारीख से लागू कर दिया गया।

मंगलवार को न्यायाधीश गॉर्टन ने फिलहाल USCIS को शुल्क वसूलने से रोकने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि एजेंसी शुल्क न चुकाने वालों के वर्क परमिट रद्द नहीं कर सकती या उन पर अन्य जुर्माना नहीं लगा सकती।

यह मामला बोस्टन में दायर किया गया था, जो ट्रंप के एजेंडे को चुनौती देने वालों के बीच एक लोकप्रिय स्थान है। सुनवाई करने वाले न्यायाधीश गॉर्टन उन गिने-चुने जजों में से हैं जिनकी नियुक्ति किसी डेमोक्रेट ने नहीं बल्कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश ने की थी।

न्यू जर्सी में तकनीकी खामी से 6,600 गैर-नागरिक जुड़े वोटर लिस्ट में

उधर, न्यू जर्सी में एक बड़ी तकनीकी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। राज्य के मोटर वाहन विभाग में सॉफ्टवेयर की त्रुटि के कारण लगभग 6,600 ऐसे लोगों को गलती से न्यू जर्सी की मतदाता सूची में जोड़ दिया गया, जो अमेरिकी नागरिक नहीं थे।

राज्य की गवर्नर मिकी शेरिल ने मंगलवार को बताया कि इस गड़बड़ी के बावजूद 2023 से अब तक 400 से भी कम गैर-नागरिकों ने वास्तव में चुनाव में मतदान किया है।

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नवंबर में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले गैर-नागरिकों द्वारा किए जाने वाले मतदान की पहचान करने और उसे रोकने के लिए आक्रामक अभियान चला रहे हैं। हालांकि, चुनाव विशेषज्ञों का लंबे समय से यह मानना रहा है कि अमेरिकी चुनावों में यह कभी कोई बड़ी समस्या नहीं रही है।

जनवरी में पदभार ग्रहण करने वाली डेमोक्रेट गवर्नर शेरिल ने बताया कि उन्हें न्यू जर्सी के मोटर वाहन सिस्टम में इस सॉफ्टवेयर की गलती के बारे में पिछले हफ्ते ही पता चला। इस तकनीकी खामी की वजह से जिन लोगों ने फॉर्म भरते समय स्पष्ट रूप से बताया था कि वे अमेरिकी नागरिक नहीं हैं, उन्हें भी सिस्टम ने मतदाता के रूप में पंजीकृत कर लिया।

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