अहमदाबाद में मानसून से पहले नगर निगम ने दावा किया था कि जलभराव वाली 147 पुरानी जगहों में से 39 को पूरी तरह से ठीक कर लिया गया है। हालांकि, गुरुवार को हुई बारिश ने इन तमाम दावों की हकीकत सामने ला दी। महज 10 घंटे के भीतर करीब 4 इंच बारिश होने के बाद निगम द्वारा ठीक किए गए 90 प्रतिशत इलाकों में फिर से पानी भर गया।
थलतेज और बोडकदेव जैसे पॉश इलाकों के वे सभी हिस्से एक बार फिर जलमग्न नजर आए, जिन्हें सुधारने का दावा किया गया था। इसके साथ ही पश्चिमी अहमदाबाद की कई अन्य जगहों पर भी भारी जलभराव की स्थिति पैदा हो गई।
आंकड़ों की बात करें तो शहर में सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे के बीच औसतन 95.90 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस मूसलाधार बारिश के कारण सड़कों पर आवाजाही करने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों को जलभराव वाले इलाकों से गुजरने में भारी जद्दोजहद का सामना करना पड़ा।
अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने साल 2025 के मानसून के दौरान 147 ऐसी जगहों की पहचान की थी, जहां हमेशा पानी भरता था। इस साल की बारिश से पहले अधिकारियों ने यह कहकर राहत का भरोसा दिलाया था कि नई पाइपलाइन बिछाने, कैचपिट जोड़ने और ड्रेनेज नेटवर्क को साफ करके 39 जगहों को दुरुस्त कर दिया गया है। इन सुधारे गए स्थानों में से 34 सिर्फ पश्चिमी अहमदाबाद में स्थित थे।

इस सूची में से गोता इलाके से सबसे ज्यादा 11 जगहों को जलभराव मुक्त घोषित कर लिस्ट से हटाया गया था। इसके बाद थलतेज से नौ और चांदलोडिया तथा बोडकदेव से चार-चार जगहों को ठीक करने की बात कही गई थी।
लेकिन गुरुवार की बारिश ने थलतेज और बोडकदेव की उन सभी जगहों को डुबो दिया, जिन्हें ड्रेनेज कार्य के बाद पूरी तरह से सुरक्षित बताया गया था। पश्चिमी अहमदाबाद के जिन अन्य इलाकों में ड्रेनेज का काम हुआ था, वहां भी भारी पानी जमा हो गया।
जलभराव से प्रभावित होने वाले मुख्य इलाकों में बोडकदेव का लेडी लेक, थलतेज का न्यूयॉर्क टावर, केसर टी स्टॉल, कलश विहार-घुमा लेक रोड स्ट्रेच, शेनभाई नगर और एसजी हाईवे पर इंटास के पास का इलाका शामिल रहा। इसके अलावा हेलमेट सर्कल, बोडकदेव के सरकारी क्वार्टर, अतिथि होटल, सुरधारा सर्कल, जलसा पार्टी प्लॉट, सिल्वर कासा और बोपल लेक-कैनाल रोड स्ट्रेच पर भी जलभराव देखा गया।
तमाम ड्रेनेज कार्यों के बावजूद अहमदाबाद में जलभराव वाले स्थानों की सूची छोटी होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। साल 2024 के मानसून से पहले निगम ने 125 संवेदनशील जगहों की पहचान की थी, लेकिन 2025 के सीजन तक यह आंकड़ा बढ़कर 147 हो गया।
निगम ने यह जांचने के लिए इन 147 जगहों का सर्वेक्षण भी किया था कि पानी कितनी गहराई तक भरता है और उसे निकालने में कितना समय लगता है। साल 2025 के मानसून में 10 से ज्यादा ऐसी जगहें थीं, जहां पानी को कम होने में पांच घंटे से अधिक का समय लगा था। इनमें थलतेज वार्ड के बोपल-घुमा की दो जगहें, गोता की दो और बोडकदेव की एक जगह शामिल थी। पूर्वी अहमदाबाद की बात करें तो नरोडा में एक, सरसपुर-रखियाल में तीन और बापूनगर में एक स्थान पर पांच घंटे से ज्यादा समय तक पानी भरा रहा था।
गुरुवार को हुई 95.90 मिलीमीटर की औसत बारिश ने एक बार फिर इन सभी कागजी दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है, क्योंकि 90 फीसदी सुधारे गए इलाकों में हालात जस के तस बने रहे।
इस बीच पालड़ी के माणेकबाग और धरणीधर ब्रिज इलाकों में भी हर साल की तरह इस बार भी निगम की घोर लापरवाही देखने को मिली। बारिश का पानी मालव तालाब में निकालने के लिए मानसून से पहले धरणीधर ब्रिज के नीचे दो स्टैंडबाय पंप लगाने की योजना बनाई गई थी।
इसके बावजूद गुरुवार की भारी बारिश के दौरान दोनों में से कोई भी पंप चालू नहीं हो सका। रखरखाव के अभाव में पूरी तरह से खराब पड़े इन पंपों के कारण शाम 5 बजे के बाद भी यह पूरा इलाका गहरे पानी में डूबा रहा और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
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