अहमदाबाद में कुदरत का ऐसा कहर बरपा है जिसने पूरे शहर की रफ्तार रोक दी है। महज 24 घंटे के भीतर 296 मिलीमीटर बारिश ने शहर को घुटनों पर ला दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 100 वर्षों में यह अहमदाबाद में एक दिन में हुई चौथी सबसे भारी बारिश है। इससे पहले 1927 में सबसे ज्यादा 414.8 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद जुलाई 2000 में 325.9 मिमी और 1967 में 322.3 मिमी बारिश का रिकॉर्ड है।
गुरुवार का दिन शहरवासियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। इस अप्रत्याशित जलप्रलय ने रिहायशी और औद्योगिक दोनों ही इलाकों को पानी में डुबो कर जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। सबसे बुरी मार पश्चिमी इलाकों पर पड़ी है।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बोपल में 467 मिमी, बकरोल में 462.5 मिमी, जोधपुर में 418 मिमी, सरखेज में 416 मिमी और थलतेज में 408 मिमी पानी बरसा है।
हालात इतने बेकाबू हो गए कि बचाव कार्यों के लिए भारतीय सेना की चार टुकड़ियों के साथ-साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अहमदाबाद फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज को मोर्चा संभालना पड़ा।
इन टीमों ने बोपल, घुमा और शेल जैसे आलीशान इलाकों में अपने घरों में फंसे 200 से अधिक लोगों को बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर सुरक्षित बाहर निकाला। बोपल की बेहद महंगी आवासीय परियोजना ‘सेंटोसा पार्क बंगले’ से भी लगभग 50 निवासियों को नावों के जरिए बाढ़ के पानी से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार सुबह पश्चिमी अहमदाबाद के भारी जलभराव वाले इलाकों का दौरा किया। बाढ़ के पानी के बीच पैदल चलते हुए उन्होंने प्रभावित स्थानीय लोगों से बातचीत की।
बाद में अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्होंने शुक्रवार शाम 6 बजे तक पानी की निकासी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। इस बीच, बावला के पास गैलप्स इंडस्ट्रियल पार्क में जलभराव के कारण फंसे लगभग 900 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि गुरुकुल स्थित इंद्रप्रस्थ कॉम्प्लेक्स की करीब 45 दुकानें बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गईं।
इस आसमानी आफत ने अर्थव्यवस्था को भी गहरी चोट पहुंचाई है। गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (जीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष पथिक पटवारी के अनुसार, कारखानों का कामकाज ठप होने से दो दिनों के भीतर उत्पादन में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। शहर के प्रमुख क्लब भी पानी से अछूते नहीं रहे। गुजरात स्पोर्ट्स क्लब को बारिश के पानी से जूझना पड़ा, वहीं कर्णावती और राजपथ क्लब भी पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिर गए।
अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के आयुक्त बंछानिधि पाणि ने बताया कि 20 से अधिक वर्षों में यह पहली बार है जब पश्चिमी अहमदाबाद में 24 घंटे में इतनी भारी बारिश हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को भी बारिश जारी है और एएमसी बचाव तथा राहत के लिए अपने बेहतरीन प्रयास कर रही है। हालांकि, इस बाढ़ ने शहर के सबसे महंगे और सुविधा संपन्न पश्चिमी कॉरिडोर के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है।
शहर का पश्चिमी हिस्सा, जो अपनी बेहतरीन लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है, गुरुवार की बारिश में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। बोपल-आंबली स्ट्रेच, राजपथ रंगोली रोड और सिंधु भवन रोड जैसे इलाके, जहां सरकारी नीलामी दरें 2.2 लाख से 4 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के बीच हैं, वहां पांच फीट तक पानी भर गया। वैष्णो देवी से सरखेज तक एसपी रिंग रोड और एसजी हाईवे के समानांतर चलने वाले इस शानदार कॉरिडोर में स्थानीय जल निकासी नेटवर्क की विफलता कई असहज करने वाले सवाल खड़े करती है।
वंश्री विला में रहने वाले 70 वर्षीय मुकेश दवे और उनकी पत्नी अपने घर के अंदर 7 से 8 इंच पानी भर जाने के कारण ऊपरी मंजिल पर फंस गए। उनका कहना है कि एएमसी द्वारा कैचपिट और नालियों की समय पर सफाई किए जाने के बावजूद पास में डाली गई नई पाइपलाइनों ने समस्या पैदा की होगी। उनका दर्द छलकते हुए निकला कि यह परेशानी पिछले एक दशक से हर मानसून में लौट आती है।
वहीं दक्षिण बोपल में आंबली झील का तटबंध टूटने से जवेरी सर्कल के पास 50,000 वर्ग गज में फैले सेंटोसा पार्क में बारिश का पानी घुस गया। स्थानीय निवासी दिलीप जवेरी ने बताया कि उनकी सोसायटी ने सालों से इसी स्थिति से निपटने की तैयारी की थी। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों की परेशानी के बाद सोसायटी ने तीन पंप लगाए थे, लेकिन बाढ़ के पानी ने पावर सप्लाई शॉर्ट कर दी और डीजल जनरेटर में पानी जाने से हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए।
फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद सात फीट गहरे पानी से 8, 11 और 3 सदस्यों वाले परिवारों को सुरक्षित निकाला। एक डेवलपर भाविन शाह ने सिंधु भवन रोड का खौफनाक मंजर बयां करते हुए बताया कि चौड़ी सड़कें सिकुड़ कर सिंगल लेन की हो गई थीं। पानी का तेज बहाव गाड़ियों को अपने साथ बहा ले जा रहा था और जिस रास्ते को पार करने में आम तौर पर दो मिनट लगते हैं, वहां आधा घंटा लग गया।
यह पूरी स्थिति बुनियादी ढांचे पर होने वाले खर्च की प्राथमिकताओं की हकीकत दर्शाती है। जगतपुर, छरोड़ी, थलतेज, महिला, आंबली और आरएमएस झीलों को जोड़ने और उनकी गाद निकालने के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, लेकिन वह पूरा पैसा केवल गाद निकालने में ही खर्च हो गया। इसके ऊपर से एलिवेटेड (ऊंची) मुख्य सड़कें, झीलों की सोखने की क्षमता से कहीं ज्यादा पानी इन इलाकों की ओर धकेल देती हैं, जिससे जलभराव की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
इन तमाम खामियों और लोगों के सवालों के बीच, नगर निगम प्रमुख बंछानिधि पाणि ने 1,600 मिमी से 2,400 मिमी की वेस्टर्न ट्रंक लाइन का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20 इंच से अधिक बारिश होने के बावजूद, इस ट्रंक लाइन की बदौलत ही शहर को काफी बड़ी राहत मिल सकी है।
यह भी पढ़ें-
नीट विवाद: 2 मांगों पर झुकी सरकार, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर आर-पार के मूड में CJP










