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बेटे को ऑस्ट्रेलिया भेजने का सपना हुआ चकनाचूर, वीज़ा कंसल्टेंट ने व्यापारी को लगाया 16.7 लाख रुपये का चूना

| Updated: July 28, 2026 14:21

मकरबा के एक फर्जी कंसल्टेंट ने व्यापारी के बेटे को ऑस्ट्रेलिया भेजने का पक्का झांसा देकर 16.7 लाख रुपये ऐंठे। सच्चाई तब खुली जब बेटे को नेपाल एयरपोर्ट से बैरंग लौटना पड़ा।

अहमदाबाद के एक व्यापारी को अपने बेटे के सुनहरे भविष्य के लिए ऑस्ट्रेलिया का वीज़ा बनवाना काफी महंगा पड़ गया। मकरबा इलाके के एक वीज़ा कंसल्टेंट ने इस व्यापारी के साथ 16.7 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। इस मामले में पीड़ित ने सोमवार को गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन में अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।

एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता रतनपोल में साड़ी का कारोबार करते हैं। उन्होंने कुछ समय पहले एक वीज़ा कंसल्टेंसी फर्म का विज्ञापन देखा था।

इसके बाद जून 2024 में वह अपने बेटे के साथ नवरंगपुरा में विजय क्रॉसरोड्स के पास स्थित उस फर्म के ऑफिस पहुंचे। वहां फर्म के मालिक ने उन्हें पक्का भरोसा दिलाया कि 30 लाख रुपये की फीस में चार महीने के भीतर उनके बेटे का ऑस्ट्रेलियाई वीज़ा बनकर तैयार हो जाएगा।

व्यापारी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने शुरुआत में 6 लाख रुपये का भुगतान किया था। इसके बाद उन्होंने किश्तों में 5.5 लाख रुपये और दिए। फरवरी 2025 में कंसल्टेंट ने उन्हें खुशखबरी दी कि वीज़ा मंजूर हो गया है। इसके साथ ही उसने यात्रा की अन्य औपचारिकताओं के नाम पर 3,000 अमेरिकी डॉलर की मांग कर डाली। परिवार ने यह विदेशी मुद्रा सौंप दी और तय उड़ान से ठीक पहले 10 लाख रुपये नकद भी दे दिए।

इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब मार्च 2025 में व्यापारी का बेटा नेपाल के रास्ते ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए निकला। वहां एयरपोर्ट पर उसे फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया, क्योंकि जांच में पता चला कि उसके नाम पर कोई वीज़ा जारी ही नहीं हुआ था। सच्चाई सामने आने के बाद हताश परिवार ने तुरंत कंसल्टेंट से संपर्क किया।

कंसल्टेंट ने परिवार को लिखित में आश्वासन दिया था कि वीज़ा नहीं मिलने की स्थिति में वह सारे पैसे लौटा देगा। पुलिस के अनुसार, दबाव में आकर आरोपी ने बाद में किश्तों में 7.5 लाख रुपये वापस भी कर दिए। बकाया रकम चुकाने के लिए उसने 13 लाख रुपये का एक चेक दिया, लेकिन बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण वह चेक बाउंस हो गया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि लगातार मिन्नतें करने और चक्कर काटने के बावजूद न तो उनके बेटे का वीज़ा बना और न ही उनके बाकी बचे 16.7 लाख रुपये वापस मिले। फिलहाल गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और इस पूरे रैकेट की गहन जांच शुरू कर दी है।

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