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₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर लग सकता है चार्ज, आम आदमी पर क्या होगा असर?

| Updated: August 5, 2026 13:05

2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर लग सकता है MDR शुल्क, जानिए आपके रोजमर्रा के लेन-देन पर इसका क्या असर होगा।

अगर आप भी धड़ल्ले से यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। सरकार जल्द ही 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर मामूली चार्ज लगाने की अनुमति दे सकती है। हालांकि, यह शुल्क केवल कारोबारियों (मर्चेंट) को किए गए पेमेंट पर लागू होगा। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले आम लेनदेन को इस दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक’ पेश किया। इस बिल का मुख्य उद्देश्य बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को कुछ तय इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की छूट देना है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को कब से लागू किया जाएगा, इसे लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। संभावना है कि यह मर्चेंट शुल्क 0.25 प्रतिशत से लेकर 0.4 प्रतिशत के बीच हो सकता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपये की यह सीमा सभी यूपीआई लेनदेन के केवल 5 प्रतिशत हिस्से को ही प्रभावित करेगी। लेकिन अगर लेनदेन के कुल मूल्य की बात करें, तो 65 प्रतिशत हिस्सा इसी श्रेणी में आता है। आम लोगों को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि दूध, सब्जी, किराना सामान या ऑटो-टैक्सी के किराये जैसे रोजमर्रा के भुगतानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

जुलाई महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में कुल 23.7 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये थी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अगर यह नियम लागू भी होता है, तो 95 प्रतिशत लेनदेन पूरी तरह से एमडीआर (MDR) से मुक्त रहेंगे। इसके अलावा, यह चार्ज इतना मामूली होगा कि सभी कारोबारी इस छोटे से शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों की जेब पर नहीं डालेंगे।

उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि सरकार इस शुल्क की अधिकतम सीमा (सीलिंग) भी तय कर सकती है। एक सूत्र ने बताया कि क्रेडिट कार्ड के विपरीत यूपीआई में कोई फंडिंग लागत शामिल नहीं होती है, इसलिए लागत पूरी होने के बाद एक निश्चित सीमा तय करना काफी तार्किक होगा। वर्तमान में क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर पहले से ही एमडीआर लागू है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के चलते ज्यादातर मर्चेंट इसे ग्राहकों से वसूलने के बजाय खुद ही वहन करते हैं।

आपको बता दें कि क्रेडिट कार्ड के मामले में एमडीआर रेगुलेटेड नहीं है और यह लेनदेन मूल्य का 3 प्रतिशत तक हो सकता है। वहीं, डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतानों के लिए नियम अलग हैं। डेबिट कार्ड से 20 लाख रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत की सीमा तय की गई है, जबकि इससे अधिक राशि के लेनदेन पर यह चार्ज 0.9 प्रतिशत लगता है।

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