गुजरात पुलिस के ‘साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CCoE) ने साइबर अपराधियों को उन्हीं के खेल में मात देकर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने लाइव ‘डिजिटल अरेस्ट’ का बेहद चतुराई से इस्तेमाल करते हुए न सिर्फ असम में बैठे एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया, बल्कि देश के चार राज्यों के 10 लोगों की लाखों रुपये की गाढ़ी कमाई भी ठगों के हाथ में जाने से बचा ली। यह अपराधी कई बैंक खातों के जरिए धोखाधड़ी से कमाए गए पैसों को ठिकाने लगाने का काम कर रहा था।
इस पूरे मामले का खुलासा 9 अगस्त को तब शुरू हुआ, जब अहमदाबाद के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी ने एक आईएएस अधिकारी की सलाह पर साइबर सेंटर से संपर्क किया। बुजुर्ग को शक था कि उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया है। अधिकारियों ने जब उनके फोन और मैसेज की जांच की, तो पता चला कि पीड़ित को पिछले 7 दिनों से डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया था। ठगों ने उन पर दबाव बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फर्जी समन पत्र भी भेजे थे।
सीसीओई के एसपी विवेक भेड़ा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि साइबर अपराधियों ने नासिक पुलिस का अधिकारी बनकर इस बुजुर्ग को धमकाया था। ठगों ने पीड़ित पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी में शामिल होने का गंभीर और झूठा आरोप लगाया था।
बुजुर्ग इस खौफनाक जाल में पूरी तरह फंस चुके थे। शातिर ठग उन्हें हर दिन तीन से चार घंटे तक फोन कॉल पर जोड़े रखते थे। दहशत में आकर पीड़ित ने अपनी पत्नी के बैंक खाते की सारी रकम भी अपने खाते में ट्रांसफर कर ली थी, ताकि ठगों की मांग के अनुसार उन्हें 20 लाख रुपये दिए जा सकें।
सौभाग्य से, पीड़ित ने समय रहते पुलिस से मदद मांग ली। इसके बाद साइबर टीम ने इस ‘डिजिटल अरेस्ट’ को ठगों के ही खिलाफ अपना हथियार बना लिया। पुलिस के निर्देश पर बुजुर्ग ने नाटक जारी रखा और ठगों की बातों में आने का दिखावा किया। वेरिफिकेशन के बहाने पीड़ित ने ठगों के दिए गए बैंक खाते में 200 रुपये ट्रांसफर किए। इसी एक बैंक खाते के नंबर से पुलिस को पूरे सिंडिकेट तक पहुंचने का अहम सुराग मिल गया।
जांच में सामने आया कि यह बैंक खाता असम के बारपेटा से संचालित किया जा रहा था। बिना समय गंवाए गुजरात पुलिस की एक टीम असम के लिए रवाना हो गई। वहां पहुंचकर टीम ने 25 वर्षीय रफिकुल आलम नामक संदिग्ध की पहचान की, जो बारपेटा के संचुका का रहने वाला है। 16 अगस्त, रविवार को उसे हिरासत में ले लिया गया और ट्रांजिट वारंट के जरिए गुजरात लाया गया।
इस शातिर आरोपी के खिलाफ सीआईडी क्राइम के स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। जांच में सामने आया है कि उसके खिलाफ अन्य राज्यों में भी कम से कम पांच अलग-अलग शिकायतें दर्ज हैं। जिस बैंक खाते पर पुलिस नजर रख रही थी, उसमें अन्य पीड़ितों द्वारा 50 लाख रुपये जमा किए गए थे।
सीसीओई की टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पैसे जमा करने वाले लोगों को ट्रेस किया और आठ अलग-अलग जगहों पर पहुंचकर उन्हें आगे कोई भी रकम भेजने से रोक दिया।
इन बचाए गए लोगों में गुजरात के जामनगर से तीन, सूरत से एक और अहमदाबाद से एक व्यक्ति शामिल है। इसके अलावा, महाराष्ट्र के मुंबई से एक, छत्तीसगढ़ के रायपुर से एक और ओडिशा के सुंदरगढ़ व भुवनेश्वर के तीन लोगों को ठगों का शिकार होने से बचाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि सूरत के एक व्यक्ति को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का डर दिखाकर और फर्जी टेरर फंडिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 10 लाख रुपये ऐंठ लिए गए थे। वह व्यक्ति 20 लाख रुपये और देने के लिए अपनी दुकान तक बेच चुका था, लेकिन पुलिस ने उसे ऐन वक्त पर रोक लिया।
इसी तरह, जामनगर के एक शख्स को फर्जी निवेश मामले में फंसाकर 9.5 लाख रुपये ठग लिए गए थे। वह 10 लाख रुपये और भेजने ही वाला था कि सीसीओई टीम ने हस्तक्षेप कर उसे बचा लिया।
इस पूरे मामले में वित्तीय धोखाधड़ी का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। सीसीओई को जांच के दौरान मुख्य बैंक खाते से 1,000 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। एसपी भेड़ा ने स्पष्ट किया कि अपराध की इस भारी रकम को अलग-अलग जगह भेजने (लेयरिंग) के लिए 1,754 अन्य खातों का इस्तेमाल किया गया था।
कुल 1,090 साइबर क्राइम मामलों में इन खातों से 1,071.55 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। ठग मुख्य खाते से इन लेयरिंग खातों में पलक झपकते ही 3,000-3,000 रुपये की किस्तों में पैसे ट्रांसफर कर देते थे।
पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए 23 क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट भी खोज निकाले हैं, जिनसे 16 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक यह पैसा संभवतः चीन भेजा जा रहा था। गिरफ्तार आरोपी के फोन से एक ऐसा संपर्क भी मिला है जिसे “चाइना मैम 4” के नाम से सेव किया गया था।
अधिकारियों का मानना है कि फर्जी कॉल करने वाले मास्टरमाइंड कंबोडिया में बैठे हो सकते हैं और यह विशाल नेटवर्क केवल एक शुरुआत भर है। फिलहाल पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए आगे की जांच में जुटी हुई है।
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