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H-4 EAD: ट्रंप प्रशासन के नए कदम से बढ़ी भारतीयों की चिंता, लेकिन फिलहाल घबराने की जरूरत क्यों नहीं है?

| Updated: August 31, 2026 12:50

ट्रंप प्रशासन के नए प्रस्ताव से अमेरिका में बसे भारतीयों की बढ़ी चिंता, लेकिन जानिए क्यों आपकी नौकरी फिलहाल सुरक्षित है और आगे क्या होने वाला है।

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-4 (H-4) रोजगार प्राधिकरण पर उठाए गए ताजा कदम ने वहां रह रहे हजारों भारतीय परिवारों की चिंताएं स्वाभाविक रूप से बढ़ा दी हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि एच-4 ईएडी (H-4 EAD) धारकों के लिए अभी तक जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए तुरंत पैनिक करने की आवश्यकता नहीं है।

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने अपने रेगुलेटरी एजेंडे में एक नया प्रस्ताव जोड़ा है। इस प्रस्ताव का शीर्षक “एच-4 आश्रित जीवनसाथियों को रोजगार प्राधिकरण (ईएडी) के लिए पात्र गैर-नागरिकों की श्रेणियों से हटाना” रखा गया है। यह कदम ओबामा प्रशासन के दौरान लागू किए गए उस 2015 के नियम को पलट देगा, जिसने एच-1बी (H-1B) कर्मचारियों के उन एच-4 जीवनसाथियों को काम करने की अनुमति दी थी जो ग्रीन कार्ड हासिल करने की कतार में थे।

प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति

यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि यह अभी तक कोई प्रस्तावित नियम (Proposed Rule) नहीं बना है। इस एजेंडे को केवल “दीर्घकालिक कार्रवाई” (Long-Term Action) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित नियम की तारीख के आगे “निर्धारित किया जाना है” (To be determined) लिखा गया है। फिलहाल इसका कोई ड्राफ्ट उपलब्ध नहीं है और इसे पेश करने की कोई समय सीमा भी तय नहीं की गई है। आसान शब्दों में कहें तो यह केवल एक संकेत है कि डीएचएस भविष्य में इस मुद्दे पर विचार करने का इरादा रखता है।

एच-4 ईएडी को पूरी तरह से समाप्त करने से पहले डीएचएस को कई कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। उन्हें एक प्रस्तावित नियम प्रकाशित करना होगा, जनता से टिप्पणियां मांगनी होंगी, उन पर विचार करके जवाब देना होगा और अंत में एक प्रभावी तिथि के साथ अंतिम नियम प्रकाशित करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम कई महीनों का समय लगेगा और किसी भी अंतिम फैसले को अदालत में चुनौती भी दी जा सकती है।

विशेषज्ञों की क्या राय है?

आव्रजन (इमिग्रेशन) मामलों के जाने-माने वकील जोनाथन वास्डेन ने एच-4 ईएडी धारकों से न घबराने की अपील की है। वास्डेन का कहना है कि मौजूदा प्रस्ताव और कानून में वास्तविक बदलाव के बीच एक बहुत लंबा सफर तय होना बाकी है, इसलिए अभी से चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि आर्थिक प्रभाव विश्लेषण की समस्याओं के कारण ऐसे नियमों को अंतिम रूप देने का एक पिछला प्रयास विफल हो गया था। उनके अनुसार, अगर कोई नया नियम आता भी है, तो उसका प्रभाव भविष्यलक्षी (Prospective) होने की उम्मीद है। इसका अर्थ है कि जो लोग पहले से ईएडी के पात्र हैं, वे शायद इससे प्रभावित न हों।

भारतीयों के लिए यह मुद्दा इतना अहम क्यों है?

एच-4 ईएडी के महत्व को अमेरिका में रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के भारी बैकलॉग को समझे बिना नहीं जाना जा सकता है। हजारों भारतीय परिवारों के लिए एच-1बी वीजा स्थायी निवास (Permanent Residence) के रास्ते का महज एक अस्थायी पड़ाव नहीं है। देश-विशिष्ट कोटे (Country-specific limits) और बैकलॉग के विशाल आकार के कारण रोजगार-आधारित इमिग्रेशन श्रेणियों में भारतीयों को ग्रीन कार्ड के लिए असाधारण रूप से लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है।

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के हालिया विश्लेषण के अनुसार, दिसंबर 2025 तक पहली तीन रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियों में आश्रितों सहित दस लाख से अधिक भारतीय अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

एच-1बी वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले कई भारतीय पेशेवर मुख्य रूप से EB-2 या EB-3 श्रेणियों के माध्यम से स्थायी निवास की मांग करते हैं। EB-2 श्रेणी में वे पेशेवर आते हैं जिनके पास उच्च डिग्री है या विज्ञान, कला या व्यापार में असाधारण क्षमता है। वहीं, EB-3 श्रेणी में कुशल और अन्य पेशेवर श्रमिक शामिल होते हैं।

ग्रीन कार्ड बैकलॉग का डरावना सच

एनएफएपी (NFAP) के विश्लेषण के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। बैकलॉग इतना गंभीर हो गया है कि यदि किसी भारतीय नागरिक का रोजगार-आधारित इमिग्रेशन आवेदन जनवरी 2026 या उसके बाद दायर किया गया है, तो उसे EB-2 श्रेणी में स्थायी निवास के लिए 179 साल और EB-3 श्रेणी में 38 साल तक का संभावित इंतजार करना पड़ सकता है।

इस लंबी कतार में फंसे परिवारों के लिए एच-4 ईएडी केवल एक वर्क परमिट से कहीं बढ़कर है। इसने विशेष रूप से उच्च शिक्षित भारतीय महिलाओं को तब अपने करियर बनाने, स्वतंत्र आय अर्जित करने और आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया है, जब उनका परिवार ग्रीन-कार्ड सिस्टम में फंसा हुआ है। इसके अलावा, ईएडी उन्हें बैंक खाता संचालित करने और कार चलाने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रदान करता है।

एक अनुमान के मुताबिक, लगभग एक लाख भारतीय जीवनसाथियों के पास एच-4 ईएडी है। अगर भविष्य में इस कार्यक्रम को समाप्त कर दिया जाता है, तो इन परिवारों के जीवन में एक बड़ा और विनाशकारी बदलाव आ सकता है।

पुराना इतिहास और कानूनी लड़ाई

यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का कदम उठाया गया है। पहले ट्रंप प्रशासन ने भी साल 2017 में एच-4 ईएडी पात्रता को रद्द करने की योजना की घोषणा की थी। हालांकि, वह प्रशासन कभी भी प्रस्तावित नियम को प्रकाशित करने तक नहीं पहुंच पाया और अंततः उस प्रयास को वापस ले लिया गया।

इस कार्यक्रम को लेकर एक लंबी कानूनी लड़ाई भी चल चुकी है। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘सेव जॉब्स यूएसए’ (Save Jobs USA) ने एच-4 ईएडी नियम को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि डीएचएस ने इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के तहत अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आश्रित वीजा पर असीमित रोजगार की अनुमति दी है। लेकिन जुलाई 2024 में, कोलंबिया सर्किट कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा और यह साफ कर दिया कि डीएचएस के पास ईएडी देने का पूरा अधिकार है।

आगे क्या होगा?

वर्तमान एच-4 ईएडी धारकों के लिए सबसे राहत की बात यह है कि उनका रोजगार प्राधिकरण आज भी पूरी तरह सुरक्षित और मान्य है। असल नजर उस वक्त रखनी होगी जब डीएचएस फेडरल रजिस्टर में कोई वास्तविक प्रस्तावित नियम प्रकाशित करेगा। उसी के बाद औपचारिक सार्वजनिक-टिप्पणी प्रक्रिया शुरू होगी और तभी साफ हो पाएगा कि डीएचएस वास्तव में क्या करना चाहता है और इसका असर किन पर और कब पड़ेगा। तब तक भारतीय परिवारों को स्थिति से अवगत रहना चाहिए, लेकिन इस एजेंडे को तत्काल नौकरी छिन जाने के डर के रूप में नहीं देखना चाहिए।

इसके अलावा, एच-4 ईएडी धारकों को इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि डीएचएस ने 30 अक्टूबर 2025 या उसके बाद दायर किए गए रिन्यूअल आवेदनों के लिए रोजगार प्राधिकरण का स्वतः विस्तार (Automatic Extension) समाप्त कर दिया है। इसके चलते कई लोगों के काम में रुकावट, नौकरी जाने, वित्तीय संकट और मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है, जिसके खिलाफ कई ईएडी कर्मचारियों ने अदालतों का दरवाजा भी खटखटाया है।

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