comScore राजकोट DGFT अधिकारी की संदिग्ध मौत: गुजरात हाईकोर्ट का सख्त रुख, CBI की थ्योरी खारिज और FIR के आदेश - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

राजकोट DGFT अधिकारी की संदिग्ध मौत: गुजरात हाईकोर्ट का सख्त रुख, CBI की थ्योरी खारिज और FIR के आदेश

| Updated: October 3, 2026 15:32

सीबीआई की 'आत्महत्या' थ्योरी पर हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल, पत्नी के आरोपों के बाद CID क्राइम को सौंपी गई जांच, 3 महीने में मांगी रिपोर्ट।

गुजरात हाईकोर्ट ने राजकोट के संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) जावरी मल विश्नोई की हिरासत में हुई मौत के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने इस संवेदनशील मामले की जांच सीआईडी (क्राइम) के डीआईजी को सौंप दी है। गौरतलब है कि एक सीबीआई छापे के दौरान विश्नोई ने कथित तौर पर चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।

इस वरिष्ठ अधिकारी की मौत 25 मार्च, 2023 को हुई थी। इसके बाद उनकी पत्नी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि सीबीआई के अधिकारियों ने उनके पति को 19 घंटे तक लगातार प्रताड़ित और परेशान किया। उन्होंने इस मामले में छापेमारी करने वाली टीम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की सख्त मांग की थी।

इस पूरी घटना की शुरुआत 24 मार्च, 2023 को हुई थी, जब सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने विश्नोई के दफ्तर में जाल बिछाया था। एजेंसी ने उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने का दावा किया था और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इसके साथ ही सीबीआई की एक अन्य टीम ने उनके आवास पर छापा मारा था। यह पूरी कार्रवाई अगली सुबह तक चली, जिसके तुरंत बाद विश्नोई की मौत की खबर सामने आई।

शुरुआत में राजकोट पुलिस ने इसे एक ‘हादसा’ मानकर जांच की थी। पुलिस का निष्कर्ष था कि सीबीआई ने हिरासत में उचित देखभाल नहीं की, हालांकि इसमें आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई सीधा मामला नहीं पाया गया। चूंकि विश्नोई सीबीआई की कस्टडी में थे, इसलिए एक न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सीआरपीसी की धारा 176 के तहत जांच की और सीबीआई टीम को क्लीन चिट दे दी थी।

हालांकि, विश्नोई का परिवार इस थ्योरी से बिल्कुल भी सहमत नहीं था। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और मजिस्ट्रेट का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि प्रताड़ना के कारण यह रहस्यमय मौत हुई है। परिवार का स्पष्ट कहना था कि विश्नोई खिड़की से कूद ही नहीं सकते थे। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अवैध हिरासत, गिरफ्तारी के नियमों का पालन न होने और तलाशी के दौरान धमकियां मिलने की बात कही।

परिवार ने यह भी बताया कि मृतक के शरीर पर मिले चोट के निशान आत्महत्या की कहानी से मेल नहीं खाते। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अपने बेटे के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हुए एक कथित ऑडियो को भी अहम सबूत बनाया, जिसे सीबीआई की तलाशी के दौरान रिकॉर्ड किया गया था।

सीबीआई और राज्य सरकार ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया, लेकिन जस्टिस एम. के. ठक्कर ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि दुर्घटनावश मौत की जांच और न्यायिक जांच अधूरी थीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब आरोप किसी संज्ञेय अपराध की ओर इशारा करते हैं, तो ये सतही जांचें एक पूर्ण पुलिस जांच का विकल्प नहीं हो सकतीं।

हाईकोर्ट ने पिछली जांच की कमियों को उजागर करते हुए कहा कि कस्टोडियल डेथ और संवैधानिक अधिकारों के हनन के मामलों में अदालत का रवैया बिल्कुल अलग होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस, जेल या किसी अन्य हिरासत में किसी अधिकारी या व्यक्ति द्वारा संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो अदालत को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देकर हस्तक्षेप करना ही चाहिए।

चूंकि इससे पहले इस मामले की जांच एक एसीपी के नेतृत्व वाली एसआईटी (SIT) द्वारा की गई थी, इसलिए हाईकोर्ट ने अब नई व्यवस्था दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब यह जांच सीआईडी क्राइम के डीआईजी के पर्यवेक्षण में की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में और पूरी तत्परता के साथ हो।

अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं कि आज से ठीक तीन महीने के भीतर इस मामले की रिपोर्ट तैयार कर ली जाए और आगे के अवलोकन के लिए इसे हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में अनिवार्य रूप से पेश किया जाए।

यह भी पढ़ें-

धारावी के सुनहरे भविष्य की झलक: सीएम देवेंद्र फडणवीस ने किया भव्य ‘धारावी एक्सपीरियंस सेंटर’ का उद्घाटन

कॉर्पोरेट जगत से राज्यसभा का सफर: जानिए धनराज नथवानी की शानदार राजनीतिक एंट्री के क्या हैं मायने?

Your email address will not be published. Required fields are marked *