जुलाई के अंत में हुई बारिश और उसके बाद उमस भरी गर्मी ने अहमदाबाद शहर में मौसमी बीमारियों का कहर बरपा दिया है। शहर में एक तरफ वायरल इन्फेक्शन और H1N1 के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा देखा जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर पूरे के पूरे परिवार संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। इसके साथ ही डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियों ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे घरों के आसपास पानी जमा न होने दें और लक्षण दिखने पर खुद दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बाल रोग और संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. चेतन त्रिवेदी के मुताबिक, अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले हर 10 में से 6 मरीज वायरल बुखार के हैं। इनमें से कई लोगों में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हो रही है। जानकारों का कहना है कि इन्फ्लूएंजा के साथ-साथ जलजनित और मच्छर जनित बीमारियों का ग्राफ भी तेजी से चढ़ रहा है। मौसम में अचानक आए इस बदलाव, जगह-जगह हुए जलभराव और खुले प्लॉट में जमा पानी के कारण मच्छरों का पनपना इस मौजूदा संकट की मुख्य वजह है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरव बेनानी ने माता-पिता को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अगर किसी बच्चे को तेज बुखार के साथ सिरदर्द, बदन दर्द या गले में खराश की शिकायत होती है, तो इसे इन्फ्लूएंजा का लक्षण माना जाना चाहिए। डॉक्टरों के सामने ऐसे कई मामले आ रहे हैं जहां परिवार का एक सदस्य बीमार पड़ता है और फिर पूरा घर इसकी चपेट में आ जाता है। संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए डॉक्टरों ने हिदायत दी है कि लक्षण दिखने पर बच्चों को स्कूल बिल्कुल न भेजें।
शेल्बी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आर. सी. दमानी ने बताया कि मच्छरों से होने वाली बीमारियों का मौसम पूरी तरह से शुरू हो चुका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों का अनुपात काफी कम है और ज्यादातर मामले गंभीर श्रेणी के नहीं हैं। इसके बावजूद चिकनगुनिया, टाइफाइड और पीलिया के छिटपुट मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने लोगों को मच्छरों के काटने से बचने, संतुलित आहार लेने और शरीर में पानी की कमी न होने देने की सलाह दी है।
नारायण अस्पताल के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. मनीष माहेश्वरी का मानना है कि बचाव की शुरुआत घर और मोहल्ले से ही होनी चाहिए। उन्होंने शहरवासियों से कूलर, गमले, पुराने टायर और ऐसे किसी भी बर्तन को नियमित रूप से साफ करने को कहा है जहां पानी जमा हो सकता है। इसके अलावा आस-पड़ोस को साफ रखने, मच्छर भगाने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करने और पूरी बांह के कपड़े पहनने को भी जरूरी बताया गया है।
बीमारियों को लेकर एएमसी (अहमदाबाद नगर निगम) के स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़े स्थिति की गंभीरता को बयां करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 1 अगस्त से 9 अगस्त के बीच महज नौ दिनों में शहर में गैस्ट्रोएंटेराइटिस के 113, टाइफाइड के 46 और पीलिया के 17 मामले दर्ज किए गए हैं। इसी नौ दिन की अवधि के दौरान नगर निगम ने डेंगू के 19, मलेरिया के 13, फाल्सीपेरम मलेरिया का एक और चिकनगुनिया का एक मामला भी रिकॉर्ड किया है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस दौरान पीने के पानी की गुणवत्ता भी सख्ती से जांची है। एएमसी ने अवशिष्ट क्लोरीन (रेसिडुअल क्लोरीन) की जांच के लिए पानी के कुल 16,536 नमूने लिए, जिनमें से 6 में क्लोरीन की मात्रा बिल्कुल नहीं पाई गई। इसके अतिरिक्त बैक्टीरियोलॉजिकल विश्लेषण के लिए 2,453 सैंपल भी एकत्र किए गए थे, जिनमें से 10 नमूनों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया।
अगर इस साल की शुरुआत से बात करें तो मौसमी बीमारियों का प्रकोप और भी साफ नजर आता है। एएमसी के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 9 अगस्त तक अहमदाबाद में डेंगू के कुल 246 मरीज मिल चुके हैं। वहीं, मलेरिया के 188, फाल्सीपेरम मलेरिया के 20 और चिकनगुनिया के चार मामले सामने आए हैं। इसी समयावधि में जलजनित बीमारियों ने भी खूब परेशान किया है, जिसमें गैस्ट्रोएंटेराइटिस के 3,669, टाइफाइड के 1,247 और पीलिया के 469 दर्ज किए गए मामले शामिल हैं।
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