महीसागर जिले के एक गांव के सरपंच ने दो बच्चों के नियम (टू-चाइल्ड रूल) के तहत खुद को पद से हटाए जाने के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया है। सरपंच ने इस संबंध में अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी है और अपनी बर्खास्तगी को कानूनी रूप से गलत ठहराया है।
महीसागर के कंजारा ग्रुप ग्राम पंचायत के सरपंच वीरा पटेलिया का तर्क है कि उन पर गुजरात पंचायत अधिनियम के तहत अयोग्यता का यह प्रावधान लागू ही नहीं होता। एडवोकेट विकास नायर और सी जे गोगड़ा के माध्यम से दायर अपनी याचिका में पटेलिया ने बताया कि उन्हें जून 2025 में सरपंच चुना गया था।
चुनाव जीतने के कुछ समय बाद अधिकारियों ने उन्हें यह कहते हुए अयोग्य घोषित कर दिया कि उनके तीन जैविक बच्चे हैं। प्रशासन द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड के अनुसार इन तीनों बच्चों का जन्म क्रमशः साल 2006, 2013 और 2020 में हुआ था।
इसके जवाब में पटेलिया ने अदालत में एक बेहद अहम दलील पेश की है। उनका कहना है कि उन्होंने साल 2011 में एक पंजीकृत गोदनामे (अडॉप्शन डीड) के जरिए अपने सबसे बड़े बच्चे को एक रिश्तेदार को कानूनी तौर पर गोद दे दिया था। तब से वह बच्चा अपने दत्तक पिता के साथ ही रह रहा है।
याचिका में दावा किया गया है कि कानूनी तौर पर बच्चा गोद दिए जाने के बाद, पंचायत नियमों के तहत परिवार के आकार की गणना के लिए जैविक संबंध समाप्त हो जाता है। इस आधार पर उनकी पारिवारिक इकाई में केवल दो ही बच्चे माने जाने चाहिए, इसलिए उन्हें पद से नहीं हटाया जा सकता।
उनका आरोप है कि अधिकारियों ने अधिनियम की धारा 32(2) को लागू करने में भारी चूक की है। पटेलिया ने इस बर्खास्तगी की प्रक्रिया को लेकर एक तकनीकी कानूनी आपत्ति भी उठाई है। उनका तर्क है कि अधिनियम की धारा 30, जो दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को रोकती है, वह केवल पंचायत सदस्यों पर लागू होती है।
सरपंच की दलील है कि यह नियम उन पर लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि एक सरपंच सीधे तौर पर चुना जाता है और वह पदेन सदस्यता (एक्स-ऑफिसियो मेंबरशिप) रखता है। उसे किसी वार्ड से पंचायत सदस्य के रूप में निर्वाचित नहीं किया जाता है।
उन्होंने अदालत को बताया कि अधिकारियों के पास इस विशेष प्रावधान के तहत उन्हें पद से हटाने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। कानूनन एक सरपंच को केवल अविश्वास प्रस्ताव लाकर ही उसके पद से हटाया जा सकता है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर दिया है। अदालत के नोटिस के बाद अधिकारियों ने पटेलिया की दलीलों का विरोध किया है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की गई है।
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