अहमदाबाद के शिलज इलाके में स्थित एक निजी स्कूल में मंगलवार को कई अभिभावकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। यह पूरा हंगामा एक दिन पहले प्राथमिक कक्षा के छात्रों को परोसे गए भोजन में कथित तौर पर कांच का टुकड़ा मिलने के बाद शुरू हुआ।
हालांकि, जल्द ही इस मुद्दे ने एक अलग ही मोड़ ले लिया। अभिभावकों ने शिलज कैंपस स्थित आनंद निकेतन स्कूल पर एक विशेष धर्म के साथ भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाया। साथ ही नोबेल पुरस्कार विजेता पाकिस्तानी शिक्षा कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई और जर्मन डायरिस्ट ऐनी फ्रैंक की किताबें पढ़ाए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
बढ़ते विवाद के बीच स्कूल प्रबंधन ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक मजबूत करने के लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए हैं। इसके अलावा सुपरवाइजरी जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है।
इस गंभीर मामले में अहमदाबाद के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे भोजन में मिले कांच के टुकड़े पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। बाद में स्कूल ने अभिभावकों को संदेश भेजकर बुधवार को प्राथमिक कक्षाओं के लिए छुट्टी की घोषणा कर दी।
यह पूरी घटना सोमवार की है जब कक्षा 8 का एक छात्र स्कूल परिसर में भिंडी, दाल, चपाती और चावल का लंच कर रहा था। तभी उसे मुंह में कुछ कठोर चीज महसूस हुई और उसे एहसास हुआ कि उसने कांच का एक टुकड़ा चबा लिया है।
छात्र के पिता मालव शाह ने बताया कि उनके बेटे ने तुरंत इस बात की जानकारी अपनी शिक्षिका को दी। बच्चे ने कांच का कुछ हिस्सा निगल लिया था, लेकिन बचा हुआ टुकड़ा उसने अपनी टीचर को सौंप दिया।
मंगलवार को कई अभिभावक स्कूल पहुंचे और मांग की कि कांच का वह टुकड़ा उन्हें सौंपा जाए। वे उस टुकड़े को बच्चे का इलाज कर रहे डॉक्टर को दिखाना चाहते थे। शाह के अनुसार, उनके बेटे को स्कूल की डिस्पेंसरी के बजाय सीधे अस्पताल ले जाया गया और माता-पिता को वहीं पहुंचने के लिए कहा गया।
पीड़ित छात्र के पिता ने आरोप लगाया कि मानवीय भूल को स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन स्कूल प्रबंधन का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर यह तय करने के लिए कांच का टुकड़ा देखना चाहते थे कि एंडोस्कोपी की जाए या नहीं, क्योंकि अंदरूनी ब्लीडिंग का भारी खतरा था।
शाह ने आगे कहा कि उस समय अस्पताल में स्कूल की तरफ से कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं था और एक बच्चे की जान इतनी सस्ती नहीं है। स्कूल को इस घटना की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे हैं और कांच का टुकड़ा भी परिजनों को नहीं सौंप रहे हैं।
इसके अलावा, शाह ने यह भी आरोप लगाया कि कक्षा 5 के छात्रों को मलाला यूसुफजई और ऐनी फ्रैंक की किताबें अनिवार्य रूप से पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
किताबों को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर स्कूल प्रशासन ने अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि मलाला यूसुफजई और ऐनी फ्रैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त लेखकों की साहित्यिक कृतियां प्रसिद्ध शैक्षिक साहित्य का अहम हिस्सा हैं। इन्हें स्कूल के बुक क्लब में इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्रों में उम्र के हिसाब से पढ़ने की आदत, सहानुभूति और वैश्विक जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।
स्कूल ने अपनी बात में यह भी जोड़ा कि उन्होंने शारीरिक व्यायाम और योग के माध्यम से अपने सुबह के फिटनेस कार्यक्रम को काफी मजबूत किया है। स्कूल के अनुसार, नाश्ते और दोपहर के भोजन के दौरान रोजाना श्लोकों का पाठ जारी है और माध्यमिक विभाग में चुनी हुई छात्र परिषद द्वारा सुबह की सभाएं आयोजित की जाती हैं, जिससे छात्रों में नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है।
इस पूरे विवाद के बीच स्कूल द्वारा भेजे गए संदेशों को लेकर भी भारी असमंजस देखने को मिला। स्कूल ने मंगलवार शाम करीब 5 बजे पहले एक संदेश भेजा, जिसमें कहा गया था कि अभिभावकों के एक वर्ग द्वारा किए गए चरम मानसिक उत्पीड़न के कारण पूरा स्टाफ कुछ दिनों के लिए ‘मेंटल हेल्थ ब्रेक’ ले रहा है।
हालांकि, महज एक घंटे के भीतर ही स्कूल ने अपना यह संदेश वापस ले लिया। इसके बाद अभिभावकों को दूसरा संशोधित संदेश भेजा गया जिसमें बताया गया कि कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई सामान्य रूप से चलेगी, जबकि बाकी कक्षाओं के लिए बुधवार को छुट्टी रहेगी।
मीडिया को जारी अपने बयान में स्कूल ने परिसर के भीतर अनधिकृत भीड़ के इकट्ठा होने पर भी चिंता जताई है। प्रबंधन का कहना है कि ऐसी स्थितियों से छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा को अनावश्यक खतरा हो सकता है।
संदेशों में हुई इस भारी गड़बड़ी के बारे में पूछे जाने पर स्कूल के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच रखने वाले एक शिक्षक ने गलती से वह पहला संदेश भेज दिया था। स्कूल ने उस शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है और सही संदेश अभिभावकों के साथ साझा कर दिया गया है।
डीईओ रोहित चौधरी ने अपने नोटिस में स्कूल प्रबंधन से पूरी घटना पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। इसके अलावा, भोजन तैयार करने या आपूर्ति करने वाली एजेंसी का विवरण, खाद्य सुरक्षा के लिए स्कूल द्वारा किए गए निरीक्षण, घटना के बाद उठाए गए तत्काल कदम और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किए गए सुधारात्मक उपायों की जानकारी भी मांगी गई है।
डीईओ ने मामले में तत्काल निरीक्षण के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही छात्रों और अभिभावकों से प्राप्त जानकारी, सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच, तस्वीरों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस पूरी घटना की एक विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।
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