अहमदाबाद के जोधपुर गांव स्थित एक फ्लैट में युवती के साथ हुए दुष्कर्म मामले में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाले सिक्योरिटी गार्ड को घटना से मात्र चार दिन पहले ही नौकरी पर रखा गया था।
पुलिस की जांच में यह बात निकलकर आई है कि जिस सुरक्षा एजेंसी ने आरोपी को काम पर रखा था, उसका लाइसेंस लगभग चार महीने पहले ही खत्म हो चुका था। लाइसेंस का नवीनीकरण न कराने और लापरवाही बरतने के आरोप में अब पुलिस ने कंपनी के मालिक के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी गार्ड का नाम धर्मसिंह है। उसने हाल ही में इस सिक्योरिटी कंपनी में काम करना शुरू किया था और उसे सुरक्षा संबंधी कोई भी औपचारिक प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) नहीं दिया गया था। पुलिस ने गार्ड की नियुक्ति और कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर ‘ए वन सिक्योरिटी कंपनी’ के मालिक रामप्रकाश तिवारी से गहन पूछताछ की है।
आनंदनगर पुलिस द्वारा कंपनी के दस्तावेजों की जांच करने पर पता चला कि यह फर्म साल 2015 से संचालित हो रही थी। इसके लाइसेंस को 2021 में रिन्यू किया गया था, जिसकी वैधता 5 अप्रैल, 2026 तक थी। अवधि समाप्त होने के बाद कंपनी ने इसे दोबारा रिन्यू कराने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की।
इसी लापरवाही और बिना वैध लाइसेंस के कंपनी चलाने के कारण आनंदनगर पुलिस ने मालिक रामप्रकाश तिवारी के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
सुरक्षा एजेंसियों और गार्ड्स के लिए कुछ सख्त नियम अनिवार्य हैं, जिनका पालन होना ही चाहिए। नियमों के मुताबिक किसी भी सिक्योरिटी कंपनी के पास पसारा (PSARA – प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज रेगुलेशन एक्ट) लाइसेंस और कंपनी का रजिस्ट्रेशन होना बेहद जरूरी है।
इसके अलावा, काम पर रखे जाने वाले किसी भी गार्ड को 160 घंटे की ट्रेनिंग देना अनिवार्य होता है। हर एक गार्ड का पुलिस वेरिफिकेशन और कैरेक्टर सर्टिफिकेट होना भी आवश्यक है, और यदि गार्ड को बंदूक दी जाती है, तो आर्म्स लाइसेंस होना अनिवार्य शर्त है।
अगर पूरे गुजरात की बात करें तो राज्य में करीब 2,500 निजी सुरक्षा एजेंसियां काम कर रही हैं, जिनमें से लगभग 600 से 800 एजेंसियां केवल अहमदाबाद में ही सक्रिय हैं। ये एजेंसियां पूरे राज्य में अनुमानित 5 से 6 लाख सुरक्षा गार्ड्स को रोजगार देती हैं, जबकि अकेले अहमदाबाद में करीब 1.5 लाख गार्ड्स तैनात हैं।
आमतौर पर आवासीय सोसाइटियों, मॉल और दफ्तरों में तैनात निहत्थे (बिना हथियार वाले) सुरक्षा गार्ड्स हर महीने 13,000 रुपये से लेकर 18,000 रुपये तक कमाते हैं। वहीं, बैंक कैश वैन और ज्वेलरी शोरूम में सुरक्षा के लिए तैनात हथियारबंद गार्ड्स का वेतन 22,000 रुपये से लेकर 28,000 रुपये के बीच होता है।
सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती से पहले पुलिस वेरिफिकेशन और वैध लाइसेंस प्राप्त करना एजेंसियों के लिए अनिवार्य है। इतनी बड़ी संख्या में गार्ड्स के काम करने और अनिवार्य वेरिफिकेशन प्रक्रिया के बावजूद, नियुक्ति के बाद उनकी नियमित निगरानी और पर्यवेक्षण में भारी कमी देखने को मिल रही है। यह स्थिति जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह भी पढ़ें-
लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’: 80वां स्वतंत्रता दिवस होगा खास










