comScore ओलंपिक की तैयारी: 2030 तक अहमदाबाद से बाहर होंगी सभी इंडस्ट्रियल यूनिट्स, बदल रहा है शहर का नक्शा - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

ओलंपिक की तैयारी: 2030 तक अहमदाबाद से बाहर होंगी सभी इंडस्ट्रियल यूनिट्स, बदल रहा है शहर का नक्शा

| Updated: August 12, 2026 14:59

प्रदूषण कम करने और 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार हुआ मास्टर प्लान, 2030 तक शहर की सीमा से बाहर जाएंगे सभी उद्योग, सरकार की 'थ्राइव' योजना से मिलेगा लाभ।

वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और संभावित 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए अहमदाबाद बड़े पैमाने पर तैयार हो रहा है। इसके लिए शहर के विकास योजना का पूरा खाका नए सिरे से तैयार किया जा रहा है, जिसमें उद्योगों को शहर की सीमा से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। नई योजना के तहत एएमसी (AMC) और औडा (Auda) की सीमा में आने वाले सभी औद्योगिक क्षेत्रों को गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में बदलने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही शहर के भीतर किसी भी नए उद्योग को स्थापित करने पर भी सख्त रोक लगाई जाएगी।

शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा इंडस्ट्रियल यूनिट्स को भी अपनी वर्तमान सुविधाओं के विस्तार या पुनर्गठन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन सख्त प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य शहर में प्रदूषण के स्तर को भारी मात्रा में कम करना है। इसका सीधा मतलब यह है कि शहर की सीमा के भीतर स्थित सभी उद्योगों और औद्योगिक एस्टेट्स को अंततः शहरी सीमा से बाहर जाना होगा। इसके लिए उन्हें राज्य सरकार द्वारा इसी साल जून में नई औद्योगिक नीति के हिस्से के रूप में पेश की गई ‘थ्राइव’ (THRIVE) योजना का विकल्प चुनना होगा।

इस अहम बदलाव से जुड़े एक करीबी सूत्र ने बताया कि मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को अगले दो से तीन वर्षों तक अपना संचालन उसी जगह पर जारी रखने की मोहलत दी जाएगी। हालांकि इस रिलोकेशन की बारीकियों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है, लेकिन यह पूरी तरह तय है कि शहर की सीमा के अंदर मौजूद सभी उद्योगों को सरकार की ‘थ्राइव’ योजना का लाभ उठाते हुए हर हाल में साल 2030 तक शहर के बाहर स्थानांतरित होना ही होगा।

राज्य का शहरी विकास विभाग इस पूरे प्रस्ताव की अगुवाई कर रहा है। संभावित 2036 ओलंपिक की मेजबानी से पहले प्रदूषण को कम करने और शहरी पर्यावरण को विश्वस्तरीय बनाने के प्रयासों के तहत इस योजना को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि एएमसी और औडा दोनों को ही एक समयबद्ध रणनीति लागू करनी होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदूषण फैलाने वाले सभी उद्योग शहर की सीमा से बाहर विशेष रूप से चिह्नित किए गए जोन में चले जाएं।

अधिकारियों का कहना है कि गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC) के एस्टेट्स को भी इसी मास्टर प्लान में शामिल किया गया है। उद्योग और खान विभाग के तहत काम करने वाले जीआईडीसी (GIDC) से भी इसी तय ढांचे का पालन करने और अपने स्तर पर रिलोकेशन के उपाय शुरू करने की उम्मीद है। प्रस्ताव में यह आकर्षक प्रावधान भी शामिल है कि जो उद्योग ‘थ्राइव’ योजना के तहत स्थानांतरित होंगे, वे अपने नए स्थानों पर कम से कम दोगुने एफएसआई (FSI – फ्लोर स्पेस इंडेक्स) का सीधा लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, विश्वसनीय सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि सरकार इन उद्योगों के लिए भूमि-उपयोग रूपांतरण शुल्क (लैंड-यूज कन्वर्जन चार्ज) पूरी तरह माफ करने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।

यह भी पढ़ें-

‘मुद्देमाल’ का मकड़जाल: गुजरात के थानों में पापड़ से लेकर कंडोम तक का पहरा, पुलिस परेशान!

अहमदाबाद पर बीमारियों का डबल अटैक: H1N1 और डेंगू ने बढ़ाई टेंशन, एएमसी के आंकड़े डराने वाले

Your email address will not be published. Required fields are marked *