गुजरात के पुलिस स्टेशन इन दिनों जब्त की गई संपत्तियों (मुद्देमाल) को सुरक्षित रखने की एक अनोखी चुनौती से जूझ रहे हैं। आपराधिक जांच के नियमों का पालन करने के चक्कर में पुलिस को पापड़, ताजी सब्जियों और अचार के डिब्बों से लेकर टूटे हुए फर्नीचर और यहां तक कि कंडोम जैसी चीजों की भी निगरानी करनी पड़ रही है।
सूरत जिले के पलसाणा पुलिस स्टेशन में जगह की कमी की यह समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है। हालात यह हैं कि चावल के पापड़ से लदे एक पूरे ट्रक को पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी कैमरे की कड़ी निगरानी में रखा गया है।
पलसाणा असल में नेशनल हाईवे 48, नेशनल हाईवे 53 और नेशनल एक्सप्रेसवे 4 के जंक्शन पर स्थित है। इस वजह से यह पुलिस के लिए वाहनों की चेकिंग का एक मुख्य केंद्र है।
अधिकारियों का कहना है कि शराबबंदी और तस्करी से जुड़े मामलों में लगातार हो रही कार्रवाई के कारण वाहनों और अवैध सामानों का अंबार लग गया है। इससे थाने में जगह का भारी संकट पैदा हो गया है।
हाल ही में सूरत ग्रामीण पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) ने एक ट्रक से 3.75 करोड़ रुपये कीमत का 2.5 टन पोस्त दाना (poppy husk) जब्त किया था। तस्करों ने इस नशे की खेप को चावल के पापड़ की बोरियों के पीछे बड़ी चालाकी से छिपा रखा था।
फिलहाल, इस बेशकीमती पोस्त दाने को पुलिस स्टेशन के अंदर स्टोर रूम में सुरक्षित रखा गया है। वहीं, पापड़ की बोरियों को बाहर ट्रक में ही सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में छोड़ना पड़ा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त की गई किसी भी संपत्ति को तब तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है, जब तक कि अदालत का कोई आदेश न आ जाए। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अगर कोई वैध मालिक अपने सामान का दावा करे, तो उसे वह लौटाया जा सके। अगर कोई दावेदार सामने नहीं आता है, तो पुलिस इन सामानों को नष्ट करने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगती है।
सूरत के पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश गढिया ने इस समस्या को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि स्टोरेज की कमी एक बड़ी चिंता का विषय है, खासकर पलसाणा जैसे थानों में जहां लगातार जब्ती होती रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में जब्त किए गए वाहनों और अन्य संपत्तियों के लिए जगह बनाने के वास्ते पुलिस को भारी मात्रा में अवैध शराब को नष्ट करना पड़ा।
अहमदाबाद पुलिस के रिकॉर्ड्स भी कुछ ऐसी ही अजीबोगरीब स्थिति बयां करते हैं। नियम के मुताबिक, अपराध से जुड़ी या छापेमारी के दौरान मिली किसी भी चीज की सूची बनानी होती है और उसे सबूत के तौर पर सहेजना होता है। इसमें रजाई, गद्दे, टूटे हुए घरेलू फर्नीचर और कंडोम जैसी चीजें भी शामिल हैं, जिनका कोई खास आर्थिक मूल्य नहीं होता।
सोमवार को प्रिवेंशन ऑफ क्राइम ब्रांच (PCB) ने न्यू राणिप के एक फ्लैट में चल रहे जुए के अड्डे पर छापा मारा था। इस कार्रवाई में मुख्य तौर पर 3.55 लाख रुपये नकद, 10 मोबाइल फोन, दो चार-पहिया वाहन और एक दोपहिया वाहन जब्त किया गया। इस पूरी जब्ती की कुल कीमत 38.15 लाख रुपये आंकी गई।
हालांकि, जब्ती के आधिकारिक मेमो में चार गद्दे और एक एल्युमीनियम का टब भी शामिल था। भले ही इन गद्दों और टब की कीमत शून्य (Zero) बताई गई, लेकिन कानूनी कागजी कार्रवाई और उनके रखरखाव की व्यवस्था पुलिस को करनी ही पड़ी।
इसी तरह, 24 जून को नारोल में शराबबंदी के तहत मारे गए एक छापे में पुलिस ने 28.24 लाख रुपये की शराब और एक टाटा 710 वाहन जब्त किया था। इस जब्ती मेमो में 20 पुराने और टूटे हुए फर्नीचर के टुकड़े भी शामिल थे। इनमें कुर्सियां, मेज और एक लकड़ी का सोफा (settee) शामिल था, जिनकी कीमत भी शून्य दर्ज की गई थी।
शनिवार को स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) ने एसजी हाईवे पर स्थित चार स्पा सेंटरों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई ने ‘मुद्देमाल’ रजिस्टर में एक और अजीब एंट्री जोड़ दी, जब पुलिस ने सबूत के तौर पर आठ कंडोम का एक पैकेट जब्त किया।
वडोदरा रेलवे पुलिस को भी हाल ही में एक ऐसे ही अजीब मामले का सामना करना पड़ा, जिसे अधिकारियों ने मजाकिया लहजे में “अचार की मुसीबत” नाम दिया। पुलिस ने गांजे की एक खेप पकड़ी थी, जिसे तस्करों ने कई किलो आम के अचार के नीचे बड़ी होशियारी से छिपा रखा था।
रेलवे पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें सबूत के तौर पर नशीले पदार्थ के साथ-साथ अचार के डिब्बों को भी सुरक्षित रखना पड़ा। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के काफी समय बाद ही उस खाने-पीने की चीज (अचार) को नष्ट किया जा सका।
वडोदरा पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि अक्सर वे ऐसे वाहन पकड़ते हैं जिनमें सब्जियों के पीछे शराब छिपाई गई होती है। ऐसे मामलों में इन जल्दी खराब होने वाली सब्जियों को नष्ट करने से पहले पुलिस को पूरी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है। अधिकारियों ने एक पुराना मामला भी याद किया जिसमें शराब छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए लोहे की मशीनरी के भारी पुर्जों को भी सबूत के तौर पर थाने में रखना पड़ा था।
21 जून को दरियापुर में जुए के एक अड्डे पर पड़े छापे की लिस्ट यह साबित करती है कि सबूतों की सूची कितनी विविधता भरी हो सकती है। इस दौरान पुलिस ने नकदी, मोबाइल फोन, एक ऑटो-रिक्शा और एक मोटरसाइकिल के अलावा बहुत सी छोटी चीजें जब्त की थीं।
इस सूची में 102 ताश के पत्ते, ताश की 40 गड्डियां, मोहरों के साथ एक शतरंज का बोर्ड और 270 प्लास्टिक के टोकन शामिल थे। इतना ही नहीं, सबूतों की इस कड़ी को पूरा करने के लिए पुलिस ने ‘शतरंज’ और ‘धोरसो’ जैसी पारंपरिक बिछाने वाली चीजों को भी मेमो में दर्ज किया। यह इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे रोजमर्रा की साधारण चीजें भी आपराधिक जांच का हिस्सा बनकर थानों के स्टोर रूम में अपनी जगह बना लेती हैं।
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