अहमदाबाद में कोरोना महामारी के दौरान एक कोविड पॉजिटिव आरोपी को सिविल अस्पताल से भागने देने के आरोप में दो पुलिसकर्मियों को अब मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। शहर की सत्र अदालत (सेशंस कोर्ट) ने इस मामले में दोनों पुलिसकर्मियों को आरोप मुक्त करने से साफ इनकार कर दिया है।
इस घटना का मुख्य आरोपी सुनील भंडेरी है। वह सरकारी अस्पताल से भागकर पश्चिमी अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गया था। इसके बाद उसने खुद पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करके अपने ठिकाने की जानकारी दी थी। सुनील ने पुलिस को बताया था कि उसे सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भरोसा नहीं था और उसे वहां अपनी जान का डर सता रहा था।
सुनील भंडेरी को 26 अगस्त 2020 को कृष्णानगर पुलिस ने एक बलात्कार के मामले में हिरासत में लिया था। उसकी औपचारिक गिरफ्तारी होने से पहले ही उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई थी। इसके बाद इलाज के लिए उसे तुरंत सिविल अस्पताल परिसर में स्थित 1,200 बेड वाले कोविड अस्पताल में भेज दिया गया था।
आरोपी की सुरक्षा के लिए अस्पताल की इमारत के बाहर पुलिस हेड कांस्टेबल दिनेशकुमार जीवाजी और लोक रक्षक वनराजसिंह वीनूसिंह की ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन अगली ही सुबह सुनील अस्पताल से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। इस घटना के बाद शाहीबाग पुलिस स्टेशन में आरोपी सुनील और दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिसकर्मियों पर एक कैदी को भागने का मौका देने, खतरनाक बीमारी फैलाने और आईपीसी व महामारी रोग अधिनियम के तहत आधिकारिक नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए।
जून 2025 में मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने दोनों पुलिसकर्मियों की खुद को आरोप मुक्त करने की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद राहत की उम्मीद में उन्होंने सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत में उनका तर्क था कि भंडेरी को तकनीकी रूप से कैदी नहीं माना जा सकता क्योंकि उसे तब तक औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया था।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि कोविड अस्पताल में प्रवेश पर सख्त पाबंदी थी और केवल मेडिकल स्टाफ को ही अंदर जाने की अनुमति थी। पुलिसकर्मियों ने कहा कि उनकी ड्यूटी इमारत के बाहर लगाई गई थी, इसलिए वे मरीज पर सीधे नजर नहीं रख सकते थे। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि उनके खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच उनके पक्ष में समाप्त हो गई थी और उन पर लगाया गया मामूली जुर्माना भी वापस ले लिया गया था।
हालांकि, सभी दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एएम मेमन ने पुलिसकर्मियों की याचिका खारिज कर दी। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान मामले में दोनों आवेदकों (दिनेशकुमार और वनराजसिंह) पर लापरवाही से अपनी ड्यूटी करने का स्पष्ट आरोप है, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी सुनील धीरूभाई भंडेरी उनकी हिरासत से भागने में सफल रहा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आरोप साबित होता है या नहीं, इसका फैसला ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा सबूत पेश करने के बाद ही किया जा सकता है। इसे महज एक डिस्चार्ज एप्लीकेशन (आरोप मुक्त करने की याचिका) के आधार पर अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता।
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