रविवार का दिन वडोदरा के लिए दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आया। जहां एक तरफ वडोदरा शहर में बारिश नदारद रही, वहीं जिले के ग्रामीण इलाकों में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। निचले इलाकों में पानी भर जाने के कारण हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से 592 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। इस भारी बारिश के कारण सड़कों पर आवाजाही ठप हो गई है और सावली तालुका में स्थित देव डैम से भी पानी छोड़ना पड़ा है।
पिछले 24 घंटों में जलस्तर बढ़ने से कई बस्तियां जलमग्न हो गई हैं। जिला प्रशासन ने खतरे वाले इलाकों से ग्रामीणों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया है। रेस्क्यू किए गए लोगों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा असर डभोई में दिखा है, जहां से 242 लोगों को निकाला गया। इसके अलावा वडोदरा तालुका से 135, शिनोर से 121 और पादरा से 94 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है।
राहत की बात यह है कि रविवार दोपहर तक वाघोडिया, देसर, सावली, कर्जन और वडोदरा शहर के चारों जोन से किसी भी तरह के रेस्क्यू की खबर नहीं आई। वडोदरा के कलेक्टर अनिल धमेलिया हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने और बाढ़ प्रभावित गांवों में युद्ध स्तर पर बचाव अभियान जारी रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।
लगातार हो रही बारिश का असर यातायात पर भी पड़ा है। शिनोर तालुका के मांडवा गांव में खेतों की मिट्टी बहकर मुख्य सड़क पर आ गई, जिससे रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया और गाड़ियों की रफ्तार थम गई। हालांकि, राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत मशीनें मंगवाईं और महज एक घंटे के भीतर सड़क को साफ कर यातायात दोबारा बहाल कर दिया।
कैचमेंट एरिया में पानी की आवक बढ़ने के कारण देव डैम से भी रविवार को नियंत्रित तरीके से पानी डिस्चार्ज किया गया। शाम 5 बजे तक डैम का जलस्तर 87.45 मीटर दर्ज किया गया, जो 88.02 मीटर के नियम स्तर (रूल लेवल) से थोड़ा ही नीचे है। फिलहाल बांध अपनी क्षमता का 60.18 प्रतिशत भर चुका है।
हालात को देखते हुए अधिकारियों ने डैम के दो गेट 0.15 मीटर तक खोल दिए हैं। बांध में 1,004.12 क्यूसेक पानी आ रहा है, जिसके मुकाबले 901.57 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। कैचमेंट इलाके में बारिश जारी होने के कारण बांध की लगातार निगरानी की जा रही है।
एक तरफ जहां कई गांवों में बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं डभोई के लोगों के लिए यह मानसून एक बड़ी सौगात लेकर आया है। यहां का ऐतिहासिक ‘तेन तलाव’ कई सालों बाद पूरी तरह से लबालब भर गया है। हाल ही में इस झील का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया गया था। झील के इस मनमोहक नजारे को देखने के लिए दिनभर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती रही।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर खासा उत्साह है। उनका मानना है कि सालों की कम बारिश के बाद झील का इस तरह छलकना इलाके की खूबसूरती तो बढ़ाएगा ही, साथ ही इससे ग्राउंडवाटर लेवल भी सुधरेगा। यह पानी से लबालब झील आने वाले समय में स्थानीय इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित होने वाली है।
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