अहमदाबाद के एक उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनियों को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए यह फैसला सुनाया है कि अब आयुर्वेद से इलाज कराने पर भी मेडिक्लेम का लाभ मिलेगा। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह एक पॉलिसीधारक के इलाज का पूरा खर्च ब्याज सहित वापस करे।
यह पूरा मामला अहमदाबाद के चांदलोडिया इलाके की एक महिला से जुड़ा है, जिन्होंने फरवरी 2022 में आंतरिक बवासीर से परेशान होकर एक निजी आयुर्वेद अस्पताल में इनपेशेंट के तौर पर इलाज कराया था। इस उपचार के दौरान उन्हें 15,800 रुपये का खर्च उठाना पड़ा था। महिला के पास स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की 5 लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी थी, जिसके तहत उन्होंने इस खर्च के लिए क्लेम किया था।
लेकिन बीमा कंपनी ने पॉलिसी की एक शर्त का हवाला देते हुए उनके क्लेम को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि एलोपैथी के अलावा किसी अन्य चिकित्सा पद्धति से कराए गए इलाज का मुआवजा पाने के हकदार पॉलिसीधारक नहीं हैं। बीमा कंपनी के इस रवैये से आहत होकर महिला ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (मुख्य), अहमदाबाद का दरवाजा खटखटाया और कंपनी पर सेवा में कोताही तथा अनुचित व्यापार प्रथा अपनाने का गंभीर आरोप लगाया।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपने बचाव में बहिष्करण खंड संख्या 39 का हवाला दिया। हालांकि, आयोग ने बीमा कंपनी के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि महिला की डिस्चार्ज समरी में एक योग्य एमएस (आयु) डॉक्टर द्वारा आयुर्वेद पद्धति से इलाज किए जाने की स्पष्ट पुष्टि हुई है।
आयोग ने बीमा पॉलिसी के उन प्रावधानों का भी संज्ञान लिया जिनके तहत आयुष उपचारों को शर्तों के अधीन भुगतान योग्य माना गया है। इसके साथ ही, आयोग ने बीमा नियामक इरडा के 10 जनवरी 2017 के उस सर्कुलर का भी हवाला दिया जिसमें बीमा कंपनियों को सरकारी या पंजीकृत अस्पतालों में कराए जाने वाले आयुष उपचारों का खर्च उठाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है, और जिस अस्पताल में महिला का इलाज हुआ था वह एक पंजीकृत अस्पताल था।
आयोग ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्षी पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह असमर्थ रहा है कि उसने मेडिक्लेम की 15,800 रुपये की राशि को किस आधार पर और क्यों खारिज किया था।
आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता का दावा गलत और अवैध तरीके से अस्वीकार किया गया था, जो बीमा कंपनी की ओर से सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार प्रथा को दर्शाता है। इसके बाद आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह 15,800 रुपये की दावा राशि को 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के रूप में 3,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का भी आदेश सुनाया गया।
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