comScore क्या समय से पहले होंगे 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव? बंगाल की जीत के बाद 'मिशन मोड' में BJP, दिया ये बड़ा निर्देश - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

क्या समय से पहले होंगे 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव? बंगाल की जीत के बाद ‘मिशन मोड’ में BJP, दिया ये बड़ा निर्देश

| Updated: June 16, 2026 13:11

2027 की जनगणना और बंगाल फतह के बाद बीजेपी ने यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में चुनावी तैयारियां 'फास्ट-ट्रैक' कर दी हैं। जानिए चुनाव पहले कराने के पीछे क्या है पार्टी की असली रणनीति और कांग्रेस की चुनौती।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में अपनी राज्य इकाइयों को चुनावी तैयारियां तेज करने का सख्त निर्देश दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन राज्यों में विधानसभा चुनाव समय से पहले कराए जा सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना है। चुनाव और जनगणना की तारीखों में टकराव से बचने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है।

वहीं, अगले साल की शुरुआत में चुनाव का सामना करने वाले पांचवें राज्य मणिपुर में स्थिति थोड़ी अलग है। वहां के मौजूदा तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने पैनी नजर बनाई हुई है और हर घटनाक्रम की बारीकी से समीक्षा की जा रही है।

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी राजनीतिक रूप से इस बात की इच्छुक है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत की लय बरकरार रहते हुए ही इन राज्यों में चुनाव मैदान में उतरा जाए। सभी राज्य इकाइयों को इस ‘मोमेंटम’ को बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर कड़ी मेहनत करने को कहा गया है।

पार्टी के भीतर एक बड़े वर्ग का मानना है कि पश्चिम बंगाल में मिली प्रचंड जीत के पीछे हिंदू एकीकरण का बहुत बड़ा हाथ है। बीजेपी को पूरी उम्मीद है कि यही चुनावी समीकरण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी उसके पक्ष में अहम और निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

इन सभी चुनावी राज्यों के कोर ग्रुप्स को अपनी रणनीतियों पर तेजी से काम करने के लिए कहा गया है। उत्तर प्रदेश, गोवा और पंजाब के बीजेपी सूत्रों ने संकेत दिया है कि जनगणना से जुड़ी प्रशासनिक और तार्किक चुनौतियों से बचने के लिए चुनाव को कुछ हफ्ते पहले खिसकाया जा सकता है।

दरअसल, चुनाव और जनगणना दोनों ही बड़े राष्ट्रीय कार्यों में लगभग एक ही तरह के सरकारी अमले की जरूरत होती है। दिलचस्प बात यह है कि उत्तराखंड बीजेपी चुनाव को और भी ज्यादा पहले कराने के पक्ष में नजर आ रही है।

देशभर में जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत फरवरी में होनी तय है। इस महत्वपूर्ण चरण के दौरान सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक और प्रजनन संबंधी आंकड़े जुटाए जाएंगे। बाद में इन्हीं विस्तृत आंकड़ों का इस्तेमाल जातिगत जनगणना में शामिल करने के लिए किया जाएगा। इसी बड़ी और जटिल कवायद को देखते हुए चुनावी प्रक्रिया पहले निपटाने पर विचार हो रहा है।

बीजेपी की इस रणनीतिक हलचल का सीधा असर कांग्रेस पर पड़ना तय है। उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी चुनावी राज्यों में कांग्रेस ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी की भूमिका में है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर चुनाव समय से पहले होते हैं, तो विपक्षी दलों को अपनी तैयारियों के लिए बहुत कम समय मिलेगा और यह स्थिति सीधे तौर पर बीजेपी के पक्ष में काम करेगी।

हाल ही में दक्षिण भारत के राजनीतिक घटनाक्रमों से कांग्रेस को एक नई ऊर्जा मिली है। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने माना कि दक्षिण की जीतों ने कांग्रेस के मनोबल को काफी बढ़ाया है और अब वह गठबंधन करने व मजबूती से चुनाव लड़ने की बेहतर स्थिति में है। इसलिए, बीजेपी किसी भी संभावित चुनौती को कम आंकने की गलती नहीं करना चाहती।

दक्षिण भारत के सियासी समीकरणों की बात करें तो केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने शानदार जीत दर्ज की है। तमिलनाडु में पार्टी ने जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिझागा वेत्री कड़गम (टीवीके) के साथ हाथ मिलाकर सरकार बनाई है। इसके अलावा कर्नाटक में भी कांग्रेस ने सिद्धारमैया की जगह डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता का सहज और शांतिपूर्ण हस्तांतरण सुनिश्चित किया है।

पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में भी हलचल तेज है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पिछले हफ्ते पंजाब के एक कार्यक्रम में संकेत दिया था कि राज्य में विधानसभा चुनाव इस साल नवंबर में ही कराए जा सकते हैं।

हालांकि, साल 2004 के लोकसभा चुनाव में समय से पहले चुनाव कराने पर मिली हार के बाद से बीजेपी आमतौर पर ऐसे फैसलों से बचती रही है। पिछले हफ्ते पंजाब इकाई के कोर ग्रुप की बैठक में भी एक वरिष्ठ नेता ने शेड्यूल में किसी बड़े बदलाव की संभावना से इनकार किया था।

इसके बावजूद, बड़ी राजनीतिक तस्वीर और प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए चुनाव को कुछ हफ्ते पहले कराने की पूरी गुंजाइश बनी हुई है। पंजाब बीजेपी के एक नेता ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय नेतृत्व ने जीत के स्पष्ट लक्ष्य के साथ सभी को अपनी तैयारियां ‘फास्ट-ट्रैक’ करने को कहा है और हर कार्यकर्ता को चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश मिल चुका है।

यह भी पढ़ें-

जमीन अधिग्रहण और कर्ज माफी के खिलाफ गुजरात में किसानों का महाआक्रोश: अहमदाबाद से गांधीनगर तक ट्रैक्टरों का रेला

NEET UG 2026 री-एग्जाम पर सरकार की तैयारी: पेपर लीक और धोखाधड़ी रोकने के लिए भारत में टेलीग्राम पर बैन

Your email address will not be published. Required fields are marked *