मुंबई: अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने मुंबई में आयोजित केयरएज ग्रुप (CareEdge Group) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में मुख्य भाषण देते हुए भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य पर अपना विजन साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का बुनियादी ढांचा अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां जोखिम मापने वाले पारंपरिक पैमानों को भी अपग्रेड करने की सख्त आवश्यकता है।
रेटिंग एजेंसियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
केयरएज ग्रुप को उसकी तीन दशकों की शानदार यात्रा के लिए बधाई देते हुए, अडानी ने बताया कि उनके समूह और केयरएज का रिश्ता लगभग 20 साल पुराना है। आज यह संबंध 100 से अधिक संस्थाओं में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रेटेड संपत्तियों तक फैल चुका है। उन्होंने कहा कि एक उद्यमी के रूप में उनके विचार ही काफी नहीं थे, बल्कि विश्वसनीयता ने विश्वास पैदा किया और उसी विश्वास ने पूंजी को आकर्षित कर सपनों को साकार किया।
उन्होंने रेटिंग विश्लेषकों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि एक रेटिंग सिर्फ एक संख्या या अक्षर नहीं है। इसके पीछे मानवीय परिणाम छिपे होते हैं। एक सही रेटिंग बंदरगाह के आसपास के ग्रामीणों को रोजगार दिला सकती है और ग्रामीण भारत के बच्चों को रोशनी दे सकती है। आज जब भारत अपने सामर्थ्य पर अटूट विश्वास कर रहा है, तब यह जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है।
मुंद्रा, विझिंजम और खावड़ा: नए भारत की सफलता की कहानियाँ
अडानी ने अपनी यात्रा के तीन अहम अनुभव साझा किए जो बताते हैं कि पारंपरिक रेटिंग ढांचे उभरते हुए भारत को पूरी तरह से क्यों नहीं समझ पाते। उन्होंने मुंद्रा का उदाहरण दिया जो कभी दलदली तट था और आज भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल गेटवे है। मुंद्रा ने साबित कर दिया है कि प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर एक बहु-स्तरीय नेटवर्क के रूप में काम करता है जो भविष्य की अपार संभावनाएं खोलता है।
विझिंजम पोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे भारत दशकों तक विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर था। कई टेंडर फेल होने और इंजीनियरिंग को बेहद जटिल माने जाने के बावजूद, इसे बनाया गया। महज अठारह महीनों के भीतर यह दो मिलियन टीईयू (TEU) हासिल करने वाला सबसे तेज भारतीय बंदरगाह बन गया। यह भारत की संप्रभुता और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है।
तीसरा उदाहरण कच्छ के रण में बन रहे 30 गीगावाट के खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म का था, जो अंतरिक्ष से भी दिखाई देता है। यह केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं है, बल्कि ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), विनिर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अभूतपूर्व संगम है। यह भारत की एआई अर्थव्यवस्था की नींव बनने जा रहा है।
एआई अर्थव्यवस्था और भविष्य का इंफ्रास्ट्रक्चर
अडानी ने स्पष्ट किया कि असली मूल्य अब ऊर्जा, डेटा और मैन्युफैक्चरिंग के संगम पर पैदा हो रहा है। एआई केवल सॉफ्टवेयर नहीं है; इसे चलने के लिए डेटा सेंटर, ट्रांसमिशन नेटवर्क और विशाल स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होती है। जो देश बुद्धिमत्ता को बड़े पैमाने पर लागू करने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगा, वही भविष्य में राज करेगा।
भारत को निचले मानकों की नहीं, बल्कि व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह रेटिंग एजेंसियों से स्वतंत्रता से समझौता करने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसे गतिशील मॉडल बनाने का आग्रह कर रहे हैं जो राष्ट्रीय प्लेटफार्मों की शक्ति को पहचान सकें।
केयरएज को नई रूपरेखा तैयार करने की चुनौती
शिखर सम्मेलन के अंत में, चेयरमैन गौतम अडानी ने केयरएज टीम के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की। उन्होंने पूछा कि दुनिया का पहला व्यापक “क्रेडिट फ्रेमवर्क फॉर इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर” भारत से क्यों नहीं आना चाहिए और केयरएज इसका नेतृत्व क्यों नहीं कर सकता?
उन्होंने एक ऐसे फ्रेमवर्क की मांग की जो केवल स्टैंडअलोन कैश फ्लो को नहीं, बल्कि इकोसिस्टम मल्टीप्लायर्स और सामरिक लचीलेपन को भी मापे। अंत में, उन्होंने 2047 के विकसित भारत का सपना साझा करते हुए कहा कि एक महान इंफ्रास्ट्रक्चर वह नहीं है जो सिर्फ स्मारक बने, बल्कि वह है जिस पर एक देश अपने भविष्य की नींव रखता है।
“जहाँ हर भारतीय के सपनों को मिले ऊँची उड़ान,
जहाँ आत्मविश्वास बने भारत की नई पहचान,
जहाँ सामर्थ्य और संकल्प बढ़ाएँ राष्ट्र का सम्मान,
वही भारत बनेगा विकसित समर्थ और महान।”
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