गुजरातियों की रग-रग में बसे व्यापार या ‘धंधो’ की झलक अब वैश्विक स्तर पर भी साफ दिखाई दे रही है। हाल ही में जारी ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप मॉनिटर (GEM) रिपोर्ट 2024-25 ने इस बात पर मुहर लगा दी है। यह रिपोर्ट दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में उद्यमशीलता की गतिविधियों का कई पैमानों पर आंकलन करती है। इस ताजा सर्वे के अनुसार, व्यापार की संभावनाओं को पहचानने और नए स्टार्टअप शुरू करने के इरादे में गुजरात ने राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ दिया है।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पूरे भारत में 83.6 प्रतिशत लोगों ने व्यापार के अनुकूल अवसरों की पहचान की है। वहीं गुजरात में यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर से थोड़ा अधिक, 84.2 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसके अलावा, नए कारोबार को शुरू करने की इच्छाशक्ति यानी ‘एंटरप्रेन्योरियल इंटेंशन’ के मामले में भी राज्य आगे है। देश भर में जहां 27.8 प्रतिशत लोग अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, वहीं गुजरात में यह आंकड़ा 29.2 प्रतिशत है।
भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) के प्रोफेसर और इस रिपोर्ट के सह-लेखक अमित कुमार द्विवेदी के मुताबिक, उद्यमशीलता को लेकर गुजरात का रवैया लगभग सभी पैमानों पर काफी सकारात्मक रहा है। यहां के लोग व्यापार शुरू करने की आसानी और अपनी क्षमताओं को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।
हालांकि, प्रोफेसर द्विवेदी ने यह भी बताया कि यहां असफलता का डर (75 प्रतिशत) काफी अधिक है। यह डर व्यापार के प्रति सकारात्मक सोच और उसे असलियत में बदलने के बीच एक बड़ी बाधा का काम करता है। उन्होंने राज्य में व्यापार शुरू करने की सहूलियत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पिछली रिपोर्ट में ‘ईज ऑफ स्टार्टिंग बिजनेस’ का प्रतिशत 82.5 था। अब इसमें मामूली सुधार देखा गया है और यह बढ़कर 83.4 प्रतिशत हो गया है।
राष्ट्रीय स्तर की बात करें तो भारत ने 51 भागीदार अर्थव्यवस्थाओं में दूसरा स्थान हासिल कर दुनिया में अपना डंका बजाया है। EDII के महानिदेशक और मुख्य लेखक प्रोफेसर सुनील शुक्ला ने इस उछाल पर जोर देते हुए बताया कि भारत में व्यापार शुरू करने के इरादे में जबरदस्त वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा साल 2023-24 के 19.5 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 27.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
प्रोफेसर शुक्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि 25,000 डॉलर से कम प्रति व्यक्ति जीडीपी वाले ‘लेवल सी’ समूह में भारत अपने समकक्ष देशों से काफी आगे है। भारत की प्रारंभिक चरण की उद्यमशीलता गतिविधि 12.2 प्रतिशत है, जो कि चीन (5.4 प्रतिशत) और मिस्र (5.2 प्रतिशत) जैसे देशों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
इस अध्ययन के लेखकों ने यह भी पाया कि भारत का बाजार भी वैश्विक प्रवृत्तियों का ही अनुसरण कर रहा है। यहां अधिकांश नए व्यवसाय बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) गतिविधियों के बजाय सीधे उपभोक्ता बाजारों (Direct Consumer Markets) पर केंद्रित होकर काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट के तीसरे लेखक प्रोफेसर पंकज भारती ने स्टार्टअप्स के सामने आने वाली चुनौतियों को कम करने पर जोर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि देश में वित्तीय बाधाओं को दूर करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कारकों में सुधार और विशेषकर महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि इस क्षेत्र में सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
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