गांधीनगर: साल 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अहम खेल परिसरों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसी बीच गुजरात सरकार ने एक ऐसी दूरगामी रणनीति तैयार की है, जिससे खेलों के खत्म होने के बाद यह विशाल बुनियादी ढांचा राज्य के खजाने पर वित्तीय बोझ न बने।
राज्य सरकार एक विशेष कॉर्पस फंड के सहयोग से एक ‘स्पेशल पर्पज व्हीकल’ (SPV) स्थापित करने की योजना बना रही है। इस इकाई का मुख्य काम इन विश्वस्तरीय सुविधाओं का प्रबंधन और रखरखाव करना होगा। इसके साथ ही, यह वाणिज्यिक पट्टे (कमर्शियल लीजिंग) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से एक स्थायी राजस्व भी उत्पन्न करेगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला अहमदाबाद शहर ‘परपेचुअल मेंटेनेंस रेवेन्यू स्ट्रीम’ मॉडल को अपनाएगा। इस मॉडल के तहत स्टेडियम परिसरों के भीतर मौजूद रिटेल और हॉस्पिटैलिटी स्पेस को खेलों के बाद कमर्शियल रूप से किराए पर दिया जाएगा।
इन जगहों को किराए पर देने से जो भी आय होगी, उसका इस्तेमाल सीधे तौर पर खेल ढांचे के रखरखाव और लाइफसाइकिल मैनेजमेंट में किया जाएगा।
इस पूरे वित्तीय मॉडल को संस्थागत रूप देने के लिए सरकार एक ‘इंफ्रास्ट्रक्चर लिगेसी एंड ऑपरेशंस ट्रस्ट’ (ILOT) को औपचारिक रूप देगी। यह ट्रस्ट ही उस SPV के रूप में काम करेगा, जो नारणपुरा स्थित वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव (SVPSE) के दीर्घकालिक प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गुजरात सरकार यह अच्छी तरह समझती है कि 2030 के खेलों की असली सफलता इसी बात से मापी जाएगी कि आयोजन के बाद वाले दशक में इन संपत्तियों का कितना और कैसा उपयोग होता है।
इस अनूठी रणनीति का मुख्य उद्देश्य उस बड़ी समस्या से बचना है जिसने अतीत में कई कॉमनवेल्थ और ओलंपिक मेजबान शहरों को परेशान किया है। अक्सर आयोजनों के बाद महंगे खेल स्थल खाली पड़े रह जाते हैं, जिससे सरकारों पर रखरखाव का भारी खर्च आता है और इसके बदले में व्यावसायिक रिटर्न न के बराबर मिलता है।
खेल परिसरों के भीतर ही कमाई करने वाली संपत्तियां विकसित करके, राज्य सरकार इन आयोजन स्थलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के बीत जाने के बाद भी ये जगहें सक्रिय रहें और इनका भरपूर इस्तेमाल हो सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह नया मॉडल इस बात की गारंटी देता है कि ये विश्वस्तरीय संपत्तियां केवल खेलों के लिए नहीं बनाई जा रही हैं, बल्कि इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए अहमदाबाद के सामुदायिक जीवन के एक अहम हिस्से के रूप में संरक्षित किया जाएगा।
एक सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह कदम खेल के बुनियादी ढांचे को केवल किसी आयोजन तक सीमित रखने की पुरानी सोच में एक बड़ा बदलाव है। अब इन्हें व्यावसायिक इकोसिस्टम से लैस ऐसी दीर्घकालिक सार्वजनिक सुविधाओं के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो अपने रखरखाव और संचालन का खर्च खुद उठा सकें।
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