नर्सिंग कॉलेज से “निष्कासित” एससी / एसटी छात्रों की वापसी के लिए मंत्री ने की त्वरित कार्रवाई

| Updated: April 13, 2022 3:51 pm

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप में, 17 एससी/एसटी छात्रों को अचानक जेएमडी इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, रायसन से बर्खास्तगी की सूचना दी गई थी। मामले पर हर कोई जानना चाह रहा था ऐसा क्यों हुआ?

कोर्स का यह दूसरा महीना था। छात्रों ने बताया कि, “हमें मैडम के केबिन में व्यक्तिगत रूप से बुलाया गया और सूचित किया गया कि हमारा प्रवेश रद्द कर दिया गया है, क्योंकि हम प्रवेश परीक्षा में आईक्यू आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं।”

JMD Institute of Nursing, Gandhinagar

हालांकि, संतरामपुर के एक किसान के बेटे संजय मछर जैसे कई छात्रों के लिए, यह प्रोफेशनल डिग्री कोर्स परिवार द्वारा लिए गए ऋण के खिलाफ था। सभी 17 छात्र “मैडम के केबिन में बुलाए गए” जिसमें एससी / एसटी वर्ग के छात्र हैं।

वाइब्स ऑफ इंडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर, प्रिंसिपल दिव्या गिगी ने मामले में अपना कोई भी पक्ष रखने से इनकार कर दिया।

छात्रों को बीच में ही छोड़ दिया गया। “कक्षा 12 की मार्कशीट के आधार पर, हमने ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा के लिए क्वालीफाई किया। हम पास हो गए और दो महीने की कक्षा में सम्मलित होने के बाद, हमें एक आईक्यू टेस्ट के आधार पर अब उसे छोड़ने के लिए कहा जा रहा है, जो कभी नहीं हुआ,” छात्र प्रेमल परमार ने कहा।

JMD Institute Of Nursing Principal Divya Gigy

अंतत: 6 अप्रैल को 17 छात्रों का समूह उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री कुबेर डिंडोर के कार्यालय पहुंचा, जिसके बाद अधिक समय बर्बाद न करते हुए मंत्री ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संस्थान को नोटिस जारी किया। 24 घंटे के भीतर नर्सिंग स्कूल ने अपना फैसला वापस लेते हुए छात्रों को वापस बुला लिया।

भंडारा, संतरामपुर के 49 वर्षीय भाजपा विधायक ने कहा, “हम किसी भी अन्याय के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हैं।”

Minister For State, Higher & Technical Education Kuber Dindor

JMD इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद से संबद्ध है और गुजरात नर्सिंग काउंसिल द्वारा मान्यता प्राप्त है। यह रायसन में नॉलेज कॉरिडोर में स्थित है। छात्रों ने 70,000 रुपये फीस (20,000 रुपये कॉलेज फीस + 50,000 छात्रावास शुल्क) का भुगतान करने के बाद मार्च 2022 में कॉलेज में प्रवेश लिया था।

वास्तव में, सभी कानून लागू करने वालों को प्रमुखता से जनता की शिकायत का तत्काल निवारण करना चाहिए।

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