अहमदाबाद: अगर आप पेंशनभोगी हैं या फिर आपकी कमाई मुख्य रूप से बैंक के ब्याज और पोस्ट ऑफिस की जमा राशि से होती है, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आयकर अधिनियम 2025 के तहत 1 अप्रैल से टैक्स से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
अब तक टीडीएस (TDS) से बचने के लिए जिन फॉर्म 15G और 15H का इस्तेमाल किया जाता था, उनकी जगह अब सिर्फ एक नया फॉर्म 121 (Form 121) ले रहा है।
इस नए फॉर्म में पात्रता के नियमों को पूरी तरह से अपडेट किया गया है। इसके साथ ही अब इसमें पिछले दो सालों की आईटीआर (ITR) का खुलासा करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। कर विशेषज्ञों की सलाह है कि बिना वजह टीडीएस कटने से बचने के लिए अप्रैल के शुरुआती दिनों में ही इस फॉर्म को भर देना सबसे सही कदम रहेगा।
यह नया बदलाव वैसे तो कई तरह के करदाताओं को प्रभावित करेगा, लेकिन बुजुर्गों और रिटायर हो चुके लोगों के लिए यह सबसे ज्यादा अहम है। विशेषज्ञों के अनुसार, फॉर्म 121 खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जिनकी पूरे वित्त वर्ष की अनुमानित कर देनदारी शून्य (Nil) है। इसे भरकर वे खुद यह घोषणा कर सकते हैं कि बैंक या पोस्ट ऑफिस उनकी निर्दिष्ट आय पर टीडीएस न काटें।
इस नए नियम में उन लोगों को एक विशेष राहत दी गई है जो इस साल 60 वर्ष के होने वाले हैं। अंतरराष्ट्रीय कर विशेषज्ञ मुकेश पटेल के मुताबिक, अगर कोई निवासी व्यक्ति चालू वित्त वर्ष के दौरान किसी भी दिन 60 साल का हो जाता है, तो इस घोषणा पत्र को दाखिल करने के उद्देश्य से उसे पूरे साल के लिए वरिष्ठ नागरिक ही माना जाएगा।
आसान भाषा में कहें तो जो लोग इस साल अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं, वे भी फॉर्म 121 का इस्तेमाल कर सकते हैं, बशर्ते उनका कुल देय टैक्स शून्य हो।
मुकेश पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि नई कर व्यवस्था के तहत छूट का लाभ उठाकर वरिष्ठ नागरिक 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर देनदारी का फायदा ले सकते हैं। वेतन या पेंशन से होने वाली आय पर स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू होने के बाद यह सीमा 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इसलिए यह फॉर्म उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है जो बैंक ब्याज या पेंशन के सहारे अपना जीवन यापन करते हैं।
वहीं, गैर-वरिष्ठ नागरिकों, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स और बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स के लिए नियम थोड़े सख्त रखे गए हैं। इस फॉर्म का लाभ उठाने के लिए उनकी कुल आय मूल छूट सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह सीमा नई कर व्यवस्था में 4 लाख रुपये और पुरानी व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये तय की गई है।
आप विभिन्न प्रकार की आय पर टीडीएस बचाने के लिए फॉर्म 121 जमा कर सकते हैं। इनमें प्रतिभूतियों पर मिलने वाला ब्याज, बैंक और डाकघर की जमा राशि, लाभांश, किराए की आय, बीमा कमीशन, बोनस सहित बीमा संबंधी भुगतान और मान्यता प्राप्त भविष्य निधि से निकासी शामिल हैं।
हालांकि, इसका इस्तेमाल पेशेवर फीस, तकनीकी सेवाओं या अनुबंध भुगतानों पर टीडीएस से बचने के लिए बिल्कुल नहीं किया जा सकता है।
नए फॉर्म के साथ जानकारी देने की शर्तें भी बढ़ा दी गई हैं। फॉर्म 121 दाखिल करने वाले करदाताओं को अब अपने पिछले दो वर्षों के इनकम टैक्स रिटर्न का पूरा ब्योरा देना होगा। इसमें एकनॉलेजमेंट नंबर और घोषित आय की सटीक जानकारी देनी होगी। कर पेशेवरों ने चेतावनी दी है कि गलत घोषणा पत्र दाखिल करना अब करदाताओं को भारी पड़ सकता है।
मुकेश पटेल ने आगाह किया है कि कागजों पर भले ही यह नया फॉर्म पूरी प्रक्रिया को आसान बनाता हो, लेकिन करदाताओं को इसे भरते समय बेहद सतर्क रहना होगा।
ऐसा इसलिए है क्योंकि फॉर्म भरने की पात्रता अभी भी अनुमानित आय और सही कर व्यवस्था के चुनाव पर निर्भर करती है। इसके अलावा कैपिटल गेन जैसी कमाई, जिस पर विशेष दरों से टैक्स लगता है, वह कर छूट के लाभ के दायरे में नहीं आती है।
टैक्स जानकारों की स्पष्ट सलाह है कि करदाताओं को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि उनकी आय पर टीडीएस लागू होता भी है या नहीं। यदि बैंक से मिलने वाला ब्याज तय सीमा से कम है, तो यह फॉर्म भरने की कोई आवश्यकता ही नहीं है।
लेकिन जिन लोगों को फॉर्म 121 भरने की जरूरत है, उन्हें वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही अप्रैल महीने के अंदर इसे जमा कर देना चाहिए ताकि साल की शुरुआत से ही उनका पैसा टीडीएस के रूप में कटने से बच सके।
यह भी पढ़ें-
वनतारा ने वन्यजीव और पशु चिकित्सा विज्ञान के लिए दुनिया की पहली ग्लोबल यूनिवर्सिटी किया लॉन्च
गुजरात में भगवा यानी फास्ट ट्रैक, विपक्ष का मतलब डेड एंड: गुजरात की IPS-राजनीति पाइपलाइन








