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पीएम मोदी के संबोधन पर विवाद: 700 से अधिक नागरिकों ने की चुनाव आयोग से शिकायत

| Updated: April 21, 2026 13:54

700 से अधिक पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का चुनाव आयोग को पत्र; पीएम मोदी के 18 अप्रैल के राष्ट्र के नाम संबोधन को बताया आचार संहिता का खुला उल्लंघन और की सख्त कार्रवाई की मांग।

पूर्व सिविल सेवकों, शिक्षाविदों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित 700 से अधिक नागरिकों ने भारत निर्वाचन आयोग को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के दौरान आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन किया है।

शिकायतकर्ताओं ने पत्र में क्या कहा?

मुख्य चुनाव आयुक्त को 20 अप्रैल को भेजी गई इस शिकायत में हस्ताक्षरकर्ताओं ने अपना कड़ा ऐतराज जताया है। उनका दावा है कि दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे आधिकारिक मंचों पर प्रसारित यह भाषण सीधे तौर पर “चुनाव प्रचार और पक्षपातपूर्ण दुष्प्रचार” की श्रेणी में आता है।

शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि सरकारी खजाने से चलने वाले मीडिया का इस तरह से उपयोग सत्ताधारी दल को एक अनुचित लाभ पहुंचाता है। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड) के सिद्धांत को पूरी तरह से कमजोर करता है।

वर्तमान में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में चुनाव आचार संहिता लागू है। इन सभी चुनावी राज्यों में 4 मई को मतों की गिनती होनी है।

नागरिकों का कहना है कि आचार संहिता के तहत किसी भी मंत्री को अपने आधिकारिक कर्तव्यों को राजनीतिक प्रचार के साथ मिलाने की अनुमति नहीं है। वे अपने पक्षपातपूर्ण उद्देश्यों के लिए किसी भी कीमत पर राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

इस पत्र में चुनाव आयोग से प्रधानमंत्री के संबोधन की विषयवस्तु और तरीके दोनों की गहन जांच करने की अपील की गई है। साथ ही इसके खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा है कि यदि इस प्रसारण के लिए पहले से अनुमति ली गई थी, तो विपक्षी दलों को भी सार्वजनिक प्रसारकों पर समान एयरटाइम (प्रसारण का समय) दिया जाना चाहिए।

इसके अलावा, कुछ हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी मांग रखी है कि अगर यह भाषण आचार संहिता का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसे सभी आधिकारिक मंचों से तुरंत हटा दिया जाए।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख लोग

इस शिकायती पत्र पर कई जानी-मानी हस्तियों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयती घोष, संगीतकार-लेखक टीएम कृष्णा और पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस सरमा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

इन सभी ने आयोग से अपने संवैधानिक जनादेश का पालन करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को “चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को बनाए रखने” के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए।

राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम मोदी ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने हालिया संबोधन में मुख्य रूप से लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन के विफल होने का जिक्र किया था। उन्होंने इस घटनाक्रम को देश की महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा झटका करार दिया।

अपने भाषण में पीएम मोदी ने कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इन दलों पर इस महत्वपूर्ण कानून को रोकने का सीधा आरोप लगाया। मोदी ने कहा कि विपक्ष की इन कार्रवाइयों ने महिलाओं के हितों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने इस विधेयक की हार को महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के एक चुके हुए अवसर के रूप में वर्णित किया।

संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने विधेयक पारित न करा पाने में सरकार की असमर्थता के लिए महिलाओं से माफी भी मांगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “महिलाओं के सपने कुचल दिए गए हैं।”

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय हित से ऊपर अपने राजनीतिक हितों को रखा है। प्रधानमंत्री ने संसद में विपक्ष के आचरण को महिलाओं की “गरिमा पर सीधा हमला” बताया।

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