पांच मौत की जिम्मेदार अनुपम रसायन को बंद करने का निर्देश ,एक करोड़ का  जुर्माना

| Updated: September 23, 2022 3:16 pm

गुजरात में फायर सेफ्टी और औद्योगिक नियमों की अवहेलना करने वाली अनुपम रसायन को बंद करने के लिए गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोटिस जारी किया है ,साथ ही अंतरिम पर्यावरणीय क्षति के लिए एक करोड़ का जुर्माना भी लगाया है।  गुजरात  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह कार्यवाही तब की जब  राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी)  ने 10 दिसंबर को  सूरत के सचिन जीआईडीसी  स्थित अनुपम रसायन में  टैंक में ब्लास्ट होने के कारण लगी आग से पांच मजदूरों की मौत की खबरों के आधार पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की। इस ब्लास्ट में 20 श्रमिक घायल हो गए थे , जिनमे से तीन का अब भी सूरत के  एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

अनुपम रसायन उन दो कॉर्पोरेट संस्थाओं में से एक है, जिन्होंने कोविड  -19 के लिए उन रेमेडिसविर इंजेक्शन के लिए भुगतान किया था, जिन्हें भाजपा के राज्य प्रमुख सीआर पाटिल द्वारा सूरत भाजपा कार्यालय में वितरित किया गया था।

पुलिस ने अभी तक इस मामले में दुर्घटनावश मौत का मामला ही दर्ज किया है  ,साथ ही पुलिस ने अपनी रिपोर्ट  दावा किया है  कि संरचना अब फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए नमूने लेने के लिए “बहुत जोखिम भरी ” है। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद एफआईआर में नयी एफआईआर दर्ज करने का भरोषा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर डीवी बालदाणीया कर रहे हैं।  बालदाणीया के मुताबिक ” हमने कुछ घायलों के बयान लिए हैं.  परिसर को हमने सीज किया है  क्योंकि परिषर जोखिम भरा हो गया है। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के अधिकारियों ने अभी तक साइट से नमूने एकत्र नहीं किए हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस साइट के लिए संरचनात्मक स्थिरता रिपोर्ट पर काम कर रही है।

जीपीसीबी ने 21 सितंबर को एनजीटी प्रिंसिपल बेंच द्वारा स्वत: संज्ञान की कार्यवाही के संबंध में अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीपीसीबी ने वायु अधिनियम, 1981 के प्रावधानों के तहत इकाई को “तत्काल प्रभाव” से “बंद करने का निर्देश” जारी किया है और अंतरिम पर्यावरणीय क्षति मुआवजे (ईडीसी) के रूप में 1 करोड़ रुपये लगाए हैं।

19 सितंबर को दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (DGVCL) द्वारा यूनिट की बिजली काट दी गई थी और 17 सितंबर को GIDC, सचिन द्वारा यूनिट को पानी की आपूर्ति काट दी गई थी। जीपीसीबी के मुताबिक ईडीसी का भुगतान यूनिट ने 17 सितंबर को किया था।

वही सूरत एफएसएल के उप निदेशक बी पटेल ने कहा, “हमारी टीम नमूने लेने के लिए दो बार गई लेकिन परिसर में प्रवेश करना जोखिम भरा था। हमने पुलिस से स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट मांगा है।

सूरत एफएसएल के उप निदेशक बी पटेल ने कहा, “हमारी टीम नमूने लेने के लिए दो बार गई लेकिन परिसर में प्रवेश करना जोखिम भरा था। हमने पुलिस से स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट मांगा है।

जीपीसीबी सूरत इकाई के प्रमुख एमआर मैकवाना ने 16 सितंबर को यूनिट को लिखा, यह देखते हुए कि 11 सितंबर को निरीक्षण के समय यूनिट को तीन दिन का नोटिस दिया गया था और यूनिट “सूचना अनुपालन प्रस्तुत करने में विफल”, रही जिससे जीपीसीबी को बंद करने के लिए मजबूर कर रही थी।

क्लोजर नोटिस में यह भी नोट किया गया है कि यूनिट को एक सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी और डायरेक्टर इंडस्ट्रियल सेफ्टी एंड हेल्थ (DISH) के निर्देश का पालन करना होगा और एक रिपोर्ट जमा करनी होगी। निर्देशों का पालन करने में विफलता के परिणामस्वरूप वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

GPCB की रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट में केमिकल 2, 4-difluoronitrobenzene और सॉल्वेंट सल्फोलेन का डिस्टिलेशन का उत्पादन चल रहा था, जब “अज्ञात कारणों से” विस्फोट हुआ।

10 सितंबर को आग लगने की घटना के बाद, केवल एक शव – सचिन क्षेत्र के निवासी अंकुर पटेल (35) का मिला था। कुछ लापता थे और 20 मजदूर घायल हो गए थे और अस्पताल में भर्ती थे।

अगले दिन, संयंत्र को ठंडा करने के दौरान, दमकल अधिकारियों को पांडेसरा के रहने वाले तीन मजदूरों राकेश चौधरी (31), प्रभात झा (23) और संजय सिंहोरा (28) के शव मिले। पांडेसरा निवासी एक और मजदूर जयराज सिंह ठाकोर (25) की 16 सितंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई।

अनुपम रसायन, जो एग्रोकेमिकल्स, पर्सनल केयर और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष रसायनों के निर्माण में शामिल है, गुजरात में छह विनिर्माण स्थलों के साथ-चार सचिन जीआईडीसी में और दो जीआईडीसी झगड़िया, भरूच में – भारतीय-अमेरिकी हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ किरण  सी पटेल इसके निदेशक मंडल में अध्यक्ष के रूप में हैं ।गुजरात की इस कंपनी के मालिक और निदेशक हेतुल कृष्णकांत मेहता(Hetul Krishnakant Mehta ), आनंद सुरेशभाई देसाई(Anand Sureshbhai Desai,) , विनेश प्रभाकर साडेकर(Vinesh Prabhakar Sadekar) , मिलन रमेश ठक्कर (Milan Ramesh Thakkar) , विजय कुमार बत्रा (Vijay Kumar Batra) , मोना आनंदभाई देसाई(Mona Anandbhai Desai ), किरण छोटूभाई पटेल (Kiran Chhotubhai Patel )और डॉ नम्रता धर्मेंद्र जरीवाला हैं( Dr Namrata Dharmendra Jariwala) । आनंद देसाई कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं (Anand Desai is the Managing Director of the Company.) हैं।  

इस मामले में शुरू से ही कंपनी प्रबंधन का रुख छिपाने वाला रहा।  कंपनी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यदि एनजीटी मामले की खुद जांच करे तो कई खामियों का खुलासा होगा। 

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