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‘को-ओन द चेंज’: RISE PECOWorld समिट 2026 में एक जिम्मेदार और टिकाऊ भविष्य के लिए वैश्विक एकजुटता

| Updated: July 13, 2026 20:02

मुंबई में आयोजित 5-दिवसीय ग्लोबल समिट में 'पेकोवर्ल्ड' प्लेटफॉर्म का ऐतिहासिक लॉन्च; दुनिया भर के दिग्गजों ने एक साथ मिलकर दिया 'को-ओन द चेंज' का संदेश।

पांच दिनों तक चले सार्थक संवाद और सामूहिक प्रयासों के बाद, बहुप्रतीक्षित ‘राइज पेकोवर्ल्ड समिट 2026’ (RISE PECOWorld Summit 2026) का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इस शिखर सम्मेलन ने दुनिया भर के नेताओं, उद्यमियों, शिक्षाविदों, निवेशकों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाते हुए एक जिम्मेदार, समावेशी, टिकाऊ और पारिस्थितिकी-अनुकूल (RISE) भविष्य के निर्माण का स्पष्ट संदेश दिया।

समिट का मुख्य विषय “को-ओन द चेंज” (बदलाव में सह-भागीदार बनें) रहा, जिसने जटिल सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए साझा जिम्मेदारी की वकालत की।

आइडोब्रो (IDOBRO), राइज इन्फिनिटी फाउंडेशन (RIF) और कोरू (KORU) सेंटर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस समिट में ‘पेकोवर्ल्ड’ (PECOWorld) नामक एक वैश्विक मंच का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया। यह मंच पार्टनर्स, उद्यमियों और नागरिकों को आपस में जोड़ता है। इसका मूल विचार यह है कि समाज की सबसे बड़ी चुनौतियों के सटीक समाधान के लिए क्षेत्रों और भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर सामूहिक साझेदारी और समस्या-समाधान की आवश्यकता है।

समिट की शुरुआत ‘राइज वैल्यूज’ (RISE Values) को जारी करने के साथ हुई, जिसने बदलाव के लिए सह-स्वामित्व का एजेंडा तय किया। उद्घाटन सत्र में यूएन-आईओएम (UN-IOM) के नेशनल ऑफिसर अमित चौधरी, एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. राजन वेलुकर, विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता नीनू केवलानी, सेल्को फाउंडेशन के संस्थापक हरीश हांडे, आइडोब्रो की चीफ इम्पैक्ट ऑफिसर कैरोन शैवा और ई-मेजिन इम्पैक्ट के सह-संस्थापक नरेश करमलकर जैसे प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

इन दिग्गजों ने मजबूत समुदायों के निर्माण में नवाचार, सुलभता और सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला।

पूरे आयोजन के दौरान, पीईसीओ (PECO) ढांचे के चारों मुख्य विषयों पर गहन चर्चा हुई। ‘बियॉन्ड सीरीज’ के तहत मानव, सामाजिक, भौतिक और प्राकृतिक पूंजी के आधार पर अंतर-पीढ़ीगत धन सृजन, एमएसएमई नीतियों, और एक ‘सिस्टम ओनरशिप’ मानसिकता जैसे विषयों पर मंथन हुआ।

इसके अलावा सरकार, उद्योग, नागरिक समाज और शिक्षाविदों (GICA) के बीच साझेदारी, नीले-हरे शहर (Blue-Green City) के सह-निर्माण, आदिवासी आजीविका, और प्रकृति-आधारित समाधानों से बढ़ते शहरी तापमान के प्रबंधन जैसे गंभीर मुद्दों पर भी गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए गए।

उद्यमिता और नागरिकता इस शिखर सम्मेलन में बदलाव के एक शक्तिशाली चालक के रूप में उभरे। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर समिट का अंतिम दिन ‘स्वामित्व’ (Ownership) और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित रहा।

महिला उद्यमियों को सशक्त करने के लिए ‘हेरिजन (HERizon) पिच फेस्ट’ का आयोजन हुआ, जिसमें संगतना एंजेल्स की सह-संस्थापकों गायत्री डी. कल्याणरमन, वैशाली जेम्स और मरगथावल्ली इनबामुथैया के समक्ष महिलाओं के नेतृत्व वाले शानदार उद्यमों का प्रदर्शन किया गया।

समावेशिता भी इस चर्चा के केंद्र में रही। गीता कैस्टेलिनो और सौमिता बसु के नेतृत्व में ‘समावेशी फैशन और अनुकूली डिजाइन’ पर हुई चर्चा ने यह उजागर किया कि कैसे सार्वभौमिक डिजाइन विकलांग व्यक्तियों के लिए अधिक अवसर पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही, विनी बाजरिया और आनंदिका सूद जैसे विशेषज्ञों द्वारा ‘ह्यूमन डिजाइन थिंकिंग’ और ‘राइटिंग एज़ अ टूल फॉर क्लैरिटी’ जैसी मास्टरक्लास आयोजित की गईं, जिन्होंने प्रतिभागियों को अपने विचारों को धरातल पर उतारने के लिए व्यावहारिक ढांचा प्रदान किया।

समापन समारोह में सह-स्वामित्व की भावना को प्रदर्शित करने वाले व्यक्तियों और संगठनों को प्रतिष्ठित ‘राइज अवार्ड्स’ (RISE Awards) से सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट सामाजिक बदलाव और साझेदारी के लिए ‘राइज पार्टनरशिप अवार्ड’ इंडियाकेयर को दिया गया, जिसका प्रतिनिधित्व ओडिशा सरकार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (CID-अपराध) व परिवहन आयुक्त अरुण बोथरा और कार्यकारी सलाहकार सबिता चंदा ने किया।

नागरिक-नेतृत्व वाली पहलों, सामुदायिक सशक्तिकरण और टिकाऊ विकास के लिए कल्पवृक्ष के संस्थापक आशीष कोठारी को ‘राइज सिटीजनशिप अवार्ड’ से नवाजा गया। इस समापन सत्र में एक्सेंचर की ग्लोबल लीड ज़ैंडिले नजेमेला और G3 वर्क्स की संस्थापक सुसान लेगर फेरारो ने गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शिरकत कर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।

एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी, यूनिसेफ (UNICEF), डब्ल्यूईकनेक्ट इंटरनेशनल (WECONNECT INTERNATIONAL), स्कोर लाइवलीहुड फाउंडेशन और कई अन्य वैश्विक व स्थानीय भागीदारों के समर्थन से संपन्न हुआ यह शिखर सम्मेलन केवल एक कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाले वैश्विक आंदोलन की शुरुआत है।

जाते-जाते इस मंच ने एक ही शक्तिशाली संदेश गुंजायमान किया: भविष्य का निर्माण अलग-थलग प्रयासों से नहीं होगा, बल्कि यह उन लोगों द्वारा किया जाएगा जो एक साथ मिलकर बदलाव में सहयोग करने, योगदान देने और सह-भागीदार बनने का संकल्प लेते हैं।

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