जून के महीने में भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर राहत की सांस ली है। सेंसेक्स में लगभग 2,000 अंकों के शानदार उछाल के साथ ही रिटेल निवेशकों का उत्साह भी लौट आया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक्टिव निवेशकों को तेजी से जोड़ने के मामले में गुजरात ने देश के अन्य सभी प्रमुख राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। इस महीने गुजरात में 12.8 प्रतिशत की जबरदस्त मासिक वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही राज्य में सक्रिय निवेशकों की कुल संख्या बढ़कर 14.6 लाख के पार पहुंच गई है।
इस रेस में दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु 11.7 फीसदी की मासिक ग्रोथ के साथ दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़ा है। वहीं, उत्तर प्रदेश 11.2 लाख सक्रिय निवेशकों और 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ तीसरे नंबर पर काबिज है। हालांकि, अगर कुल संख्या की बात करें, तो महाराष्ट्र का दबदबा अब भी कायम है। एनएसई की रिपोर्ट बताती है कि महाराष्ट्र 20.8 लाख सक्रिय निवेशकों के साथ पूरे देश में पहले पायदान पर है, जो राष्ट्रीय हिस्सेदारी का कुल 17.2 प्रतिशत है। इस महीने महाराष्ट्र में भी 6.5 फीसदी का सकारात्मक उछाल देखने को मिला है।
देश के शीर्ष पांच राज्यों का शेयर बाजार में प्रभाव साफ नजर आता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जून महीने में कुल राष्ट्रीय सक्रिय निवेशकों में इन पांचों राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 51 प्रतिशत रही। सबसे खास बात यह है कि देश के शीर्ष 10 प्रमुख राज्यों में से सभी ने इस अवधि के दौरान निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि दर्ज की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार को लेकर पूरे देश में एक बार फिर से भरोसा और सकारात्मक माहौल पैदा हुआ है।
इक्विटी कैश टर्नओवर के मामले में भी महाराष्ट्र और गुजरात ने ही अपना नेतृत्व बरकरार रखा है। व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा उत्पन्न इस टर्नओवर में महाराष्ट्र 3.45 लाख करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर रहा। यह आंकड़ा मई के मुकाबले 3.2 प्रतिशत अधिक है। दूसरी तरफ, गुजरात का टर्नओवर भी 0.5 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 1.9 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया।
बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि अस्थिरता में आई कमी और वैश्विक स्तर पर मिले अनुकूल संकेतों ने छोटे निवेशकों का मनोबल काफी हद तक बढ़ाया है।
अहमदाबाद के जाने-माने स्टॉकब्रोकर और मर्चेंट बैंकर वनेश पंचाल ने बाजार की इस मौजूदा स्थिति पर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि मार्च और अप्रैल के दौरान अमेरिका-ईरान तनाव जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं ने बाजार में भारी अस्थिरता पैदा कर दी थी, जिसके चलते कई निवेशक ट्रेडिंग से दूर हो गए थे। लेकिन अब रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी फिर से लौट रही है।
पंचाल के मुताबिक, पंजीकृत व्यक्तिगत निवेशकों के मामले में गुजरात देश में तीसरे स्थान पर है और यहां के लोगों की इक्विटी ट्रेडिंग में गहरी जड़ें हैं। उनका यह भी मानना है कि जून में कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने बाजार की रिकवरी को बड़ा सहारा दिया और निवेशकों को दोबारा ट्रेडिंग की तरफ लौटने के लिए प्रेरित किया।
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