कर्नाटक की राजनीति में लगभग पांच दशकों का शानदार सफर तय करने वाले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 28 मई को बेंगलुरु में अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित नाश्ते के दौरान उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों को इस फैसले की जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने इस बैठक में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री के इस फैसले की पुष्टि की।
इसके बाद अहिंदा (AHINDA) नेता ने राजभवन जाकर अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया। चूंकि राज्यपाल थावरचंद गहलोत एक निजी दौरे पर राज्य से बाहर थे, इसलिए सिद्धारमैया ने उनका प्रभार संभाल रहे विशेष सचिव प्रभुशंकर को अपना त्यागपत्र दिया।
इस्तीफा देने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया अपनी पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने के अपने लंबे सफर को याद किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।
उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उनकी सरकार ने जनता से किए गए सभी वादे और गारंटियां पूरी की हैं। विपक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गलत सूचना फैलाने का अभियान चलाने का आरोप लगाते हुए, उन्होंने राज्य के राजस्व घाटे के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि वह राज्य की सक्रिय राजनीति में आगे भी बने रहेंगे। उन्होंने यह संकल्प लिया कि वह अपनी आखिरी सांस तक सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ मजबूती से लड़ते रहेंगे।
इससे पहले नाश्ते की बैठक में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए निवर्तमान मुख्यमंत्री ने अपनी कैबिनेट को बताया था कि कांग्रेस आलाकमान ने ही उन्हें पद छोड़ने का निर्देश दिया है। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा की और सभी मंत्रियों को उनके निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
कांग्रेस सूत्रों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि सिद्धारमैया के उत्तराधिकारी का चुनाव करने के लिए शुक्रवार, 29 मई 2026 को कांग्रेस विधायक दल की एक अहम बैठक होने की संभावना है। इसी बैठक में राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लग सकती है।
डीके शिवकुमार का सपना सच होने की कगार पर
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार के लिए मुख्यमंत्री बनने का सपना अब पूरा होने की कगार पर है। पार्टी के मुख्य संकटमोचक माने जाने वाले शिवकुमार के आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की प्रबल उम्मीद है।
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के तुरंत बाद 64 वर्षीय इस नेता ने राज्य के शीर्ष पद पर अपनी नजरें गड़ा दी थीं। पिछले तीन वर्षों से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ चले लंबे सत्ता संघर्ष के बाद, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व (विशेषकर सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा) के साथ उनकी निकटता ने उनके दावे को और भी मजबूत कर दिया है।
चार दशकों से अधिक का शानदार राजनीतिक सफर
राजनीतिक करियर शायद ही कभी एक सीधी रेखा में चलता है, और सिद्धारमैया का लगभग पचास साल का सार्वजनिक जीवन भी कई नाटकीय मोड़ों से भरा रहा है। उन्होंने डी. देवराज उर्स को पीछे छोड़ते हुए कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बनने का ऐतिहासिक गौरव हासिल किया है।
1980 के दशक के मध्य से कर्नाटक की राजनीति के केंद्र में रहे सिद्धारमैया ने 28 मई, 2026 को अपने इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा कर दी। इतने दशकों तक उन्होंने सावधानीपूर्वक तैयार किए गए सामाजिक गठबंधनों और कल्याण व समावेशिता पर केंद्रित शासन मॉडल के माध्यम से राज्य के जटिल राजनीतिक परिदृश्य को सफलतापूर्वक संभाला है।
सक्रिय राजनीति में रहेंगे ‘आकस्मिक’ राजनेता
अपनी अंतिम प्रेस वार्ता में सिद्धारमैया ने प्रसिद्ध कन्नड़ अभिनेता डॉ. राजकुमार की उन लोकप्रिय पंक्तियों को याद किया, जिसमें वे अपने प्रशंसकों के प्रति सम्मान जताने के लिए उन्हें ‘अभिमानि देवरू’ (प्रशंसक भगवान) कहा करते थे।
इसी भावना को व्यक्त करते हुए उन्होंने अपनी राजनीतिक विचारधारा को स्पष्ट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह एक राजनेता हैं, भारत का संविधान ही उनका धर्म है और राज्य के मतदाता ही उनके लिए ‘अभिमानि देवरू’ यानी भगवान के समान हैं।
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