सेंट जेवियर्स स्कूल, लोयोला के शिक्षक के खिलाफ छह और छात्राएं आगे आईं

| Updated: September 13, 2022 10:04 am

सेंट जेवियर्स स्कूल, लोयोला के प्रबंधन (management) ने अभी तक पुलिस को अपने उस शारीरिक शिक्षा (Physical Education ) शिक्षक के बारे में सूचित नहीं किया है, जिसने कथित तौर पर कक्षा-9 की तीन छात्राओं को अनुचित और आपत्तिजनक संदेश (objectionable messages) भेजे थे। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 (POCSO) कानून के तहत पुलिस को रिपोर्ट करने में विफलता के लिए जेल हो सकती है।

स्कूल प्रबंधन यह दावा करते हुए अपनी कार्रवाई को सही ठहराता है कि पीड़ितों के माता-पिता विशेष समिति द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने तक पुलिस को शामिल नहीं करना चाहते हैं।

यह भी पता चला है कि छह और छात्राओं ने PE शिक्षक के खिलाफ अनुचित व्यवहार की बात कही है। इस तरह छात्राओं द्वारा शिक्षक के खिलाफ शिकायतों की कुल संख्या अब नौ हो गई है।

क्या कहता है पॉक्सो एक्ट

पॉक्सो की धाराओं के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जिसे नाबालिगों के खिलाफ अधिनियम के तहत निर्धारित अपराधों की जानकारी है, किशोर पुलिस इकाई (juvenile police unit) या स्थानीय पुलिस को अपराध के बारे में सूचित करेगा। कानून का पालन करने में विफलता के लिए छह महीने की जेल की सजा के साथ-साथ जुर्माना भी हो सकता है।

सेंट जेवियर्स स्कूल, लोयोला की नौवीं कक्षा की कम से कम तीन छात्राओं ने अपने PE शिक्षक के खिलाफ शिकायत की है। उनका आरोप है कि 38 वर्षीय शिक्षक ने उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अनुचित और आपत्तिजनक संदेश (inappropriate and objectionable messages) भेजकर अकेले में मिलने के लिए कहा। आरोपों के मुताबिक, उन्होंने आपत्तिजनक रीलें भी भेजीं, जिन्हें बाद में हटा दिया गया। हालांकि, स्कूल प्राधिकरण ने कहा कि उन्होंने पुलिस को घटना की सूचना इसलिए नहीं दी है क्योंकि पीड़ितों के माता-पिता अभी पुलिस में नहीं जाना चाहते।

प्रिंसिपल को कानून की जानकारी नहीं

संपर्क करने पर प्रभारी प्रिंसिपल (in-charge principal) जैस्मीन शाजी ने माना कि उन्होंने अभी तक संबंधित थाने को सूचित नहीं किया है। उन्होंने यह कहकर इसे सही ठहराया कि, “हमें इस कानून के बारे में पता नहीं था। हालांकि इस विषय पर स्कूल, छात्रों और अभिभावकों के साथ बात की है। उस आधार पर बनी सहमति के अनुसार ही अभी तक पुलिस को सूचित नहीं किया गया है। माता-पिता के अलावा कानूनी विशेषज्ञ भी जांच रिपोर्ट जमा करने के बाद ही पुलिस को शामिल करना चाहते हैं।”

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