व्हिसलब्लोअर का दावा, कंपनी कीयोजनाएं जानने के लिए ट्विटर में था भारत सरकार का ‘एजेंट’

| Updated: September 14, 2022 10:46 am

नई दिल्ली: अमेरिकी सीनेट में गवाही के दौरान व्हिसलब्लोअर (whistleblower) पीटर ‘मुडगे’ जटको ने बड़ा खुलासा किया है। मंगलवार को उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति को वह पूरे विश्वास के साथ भारत का ‘विदेशी एजेंट’ मानते थे, उसे यह देखने के लिए ट्विटर पर रखा गया था कि क्या कंपनी सरकारी फरमानों को मानने को तैयार है या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी को एक ऐसे व्यक्ति को काम पर रखने के लिए मजबूर किया, जो “सरकारी एजेंट” था। इसका मकसद यूजर्स के सेंसेटिव डेटा को एक्सेस करना था, ताकि उसे सेंसर भी किया जा सके।

ट्विटर के पूर्व सुरक्षा प्रमुख (former security chief) ने कहा कि ट्विटर की सुरक्षा प्रणालियां पुरानी हैं और यह अपने आधे से अधिक डेटा सेंटर सर्वरों पर असुरक्षित सॉफ़्टवेयर चलाता है। उन्होंने कहा कि विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा कई बार प्लेटफॉर्म का उल्लंघन (breached by foreign intelligence agencies) किया गया।

जटको ने पिछले महीने दर्ज की गई एक सनसनीखेज शिकायत में भी ये आरोप लगाए थे। कहा था कि भारत सरकार ने ट्विटर को एक ऐसे व्यक्ति को काम पर रखने के लिए मजबूर किया, जो “सरकारी एजेंट” था और उसकी शायद सेंसेटिव डेटा तक पहुंच थी।

मंगलवार को उन्होंने सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी के सामने फिर खुलासा किया कि ट्विटर को भारत द्वारा दो सरकारी एजेंटों को काम पर रखने के लिए मजबूर किया गया था। जटको ने सीनेट को बताया कि उनका मानना है कि भारतीय एजेंट ने ट्विटर की कानूनी रणनीति (legal strategy) को प्रभावित करने की कोशिश की, क्योंकि कंपनी ने असंतुष्टों, विपक्षी पार्टी के सदस्यों और प्रदर्शनकारियों सहित कई खातों पर प्रतिबंध लगाने के सरकारी आदेश को नहीं मानने की कोशिश की।

विदेशी सरकारें ‘एजेंटों’ के जरिये जानकारी ले सकती हैं, इस पर सवाल पर जटको ने कहा कि ट्विटर के पास उन लोगों की आंतरिक रूप से पहचान करने की क्षमता नहीं है, जो डेटा तक अनुचित तरीके से पहुंच रहे थे। जटको ने कहा कि ट्विटर को अलर्ट करने वाली केवल एक बाहरी एजेंसी ही कंपनी को बता सकती है कि ‘एजेंट मौजूद है।’ उन्होंने कहा, “उनके पास विदेशी खुफिया एजेंसियों की तलाश करने और उन्हें अपने दम पर खदेड़ने की मौलिक क्षमता का अभाव था।”

मुडगे के नाम से मशहूर जटको ने कहा कि उन्होंने उस संदिग्ध व्यक्ति के बारे में एक कर्मचारी से संपर्क किया। इसलिए कि उनका मानना था कि वह कंपनी में काम कर रहा भारतीय एजेंट था। इस पर कर्मचारी ने उनसे कहा “चूंकि कंपनी में पहले से ही एक संदिग्ध विदेशी एजेंट था, तो इससे क्या फर्क पड़ता है अगर वहां दूसरे भी हैं?” उन्होंने कहा कि भारतीय ‘एजेंट’ इंजीनियर नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने लोकल फुल टाइम कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए ट्विटर को मजबूर करने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपनाए।

जटको ने कहा कि कंपनी की साइबर सुरक्षा संबंधी विफलताएं दरअसल इसे दूसरों के लिए खोल देती हैं, जिससे वास्तविक लोगों को नुकसान होता है।” उन्होंने ट्विटर की दो प्रमुख समस्याओं को रेखांकित किया: कि कंपनी को यह नहीं पता कि उसके पास वास्तव में कौन सा डेटा है; और कर्मचारियों की बहुत अधिक डेटा तक पहुंच है।

जटको ने कहा, “मैं आज यहां इसलिए हूं क्योंकि ट्विटर का नेतृत्व जनता, सांसदों, नियामकों और यहां तक कि अपने स्वयं के निदेशक मंडल को गुमराह कर रहा है (Twitter leadership is misleading the public, lawmakers, regulators and even its own board of directors)।” उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी सरकार को ट्विटर की खराब सुरक्षा इंतजामों के बारे में चेतावनी देने के लिए अपने करियर और प्रतिष्ठा को खतरे में डाल रहे थे।

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, जटको के कई दावे “अपुष्ट हैं और बहुत कम दस्तावेजी समर्थन करते हैं (uncorroborated and appear to have little documentary support)”। इस बीच, ट्विटर ने जटको के दावों का खंडन किया है। कहा,  “हमने जटको के दावे को जितना देखा है, वह ट्विटर और हमारी गोपनीयता के अलावा डेटा सुरक्षा के बारे में एक झूठी कहानी है। यह विसंगतियों और गलतियों से भरा हुआ है।”

जेटको ने ये गंभीर आरोप ऐसे समय में लगाए हैं, जब टेस्ला के मालिक एलन मस्क और ट्विटर के बीच 44 अरब डॉलर की डील को लेकर कोर्ट में अगले महीने सुनवाई होनी है। जानकारों का कहना है कि व्हिसलब्लोअर के इन गंभीर दावों से ये सुनवाई प्रभावित भी हो सकती है। इससे पहले एलन मस्क भी ट्विटर पर मौजूद बॉट्स की संख्या को लेकर खुले तौर पर आरोप लगा चुके हैं।

51 वर्षीय जटको ने पहली बार 1990 के दशक में एथिकल हैकिंग आंदोलन में अगुआ के तौर पर नाम कमाया। बाद में एक रक्षा विभाग अनुसंधान इकाई (Defense Department research unit) और Google में वरिष्ठ पदों पर काम किया। वह 2020 के अंत में ट्विटर से जुड़े, जहां इस साल की शुरुआत में उन्हें निकाल दिया गया।

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