शुक्रवार, 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन और नए परिसीमन को लेकर पेश किए गए तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर जोरदार बहस जारी रही। इन बिलों के पारित होने को लेकर शुक्रवार शाम को ही मतदान होने की प्रबल संभावना है।
इस गरमागरम चर्चा और विपक्ष के सवालों का औपचारिक जवाब गृह मंत्री अमित शाह आज सदन में देने वाले हैं।
केंद्रीय कानून मंत्रालय की एक नई अधिसूचना के अनुसार, विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला ‘महिला आरक्षण अधिनियम 2023’ गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है।
हालांकि, यह बात अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई है कि जब संसद में 2029 से इसके कार्यान्वयन के लिए कानून में संशोधन पर बहस चल रही है, तब 2023 के इस अधिनियम को ठीक 16 अप्रैल को ही क्यों अधिसूचित किया गया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस संविधान संशोधन विधेयक को सरकार की ‘घबराहट’ का नतीजा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल का महिला सशक्तिकरण या आरक्षण से कोई सीधा लेना-देना नहीं है।
उनके अनुसार, यह असल में दक्षिण, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व छीनकर देश के चुनावी मानचित्र को बदलने की एक सोची-समझी चाल है। उन्होंने इस कदम को पूरी तरह से एक ‘राष्ट्रविरोधी कृत्य’ बताते हुए दावा किया कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर इस बिल को सदन में ही हरा देगा।
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि सरकार दलितों, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को दरकिनार करते हुए राजनीतिक नक्शे में उसी तरह बदलाव करने की कोशिश कर रही है, जैसा उसने जम्मू-कश्मीर और असम में किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरुवार के भाषण को ‘ऊर्जा विहीन’ बताते हुए उन्होंने दावा किया कि ’16’ का आंकड़ा ही इस पूरी पहेली का असल जवाब है।
अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा का जिक्र करते हुए चुटकी ली कि उन्होंने वह कर दिखाया जो वह पिछले 20 सालों में नहीं कर सके, यानी अमित शाह को हंसाना।
अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए उन्होंने सदन में कहा कि सच्चाई अक्सर अंधेरे में छिपी होती है और इसे समझने तथा इसके लिए लड़ने का साहस होना चाहिए।
विपक्ष की इन आशंकाओं पर सरकार ने सदन में अपना रुख स्पष्ट किया। इससे पहले गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने सदन को आश्वस्त किया था कि परिसीमन के बाद सदन की सदस्य संख्या बढ़ने पर महिला आरक्षण कानून लागू होने से दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं आएगी।
सरकार ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि नए परिसीमन से पांच दक्षिणी राज्यों में लोकसभा सीटों की कुल संख्या मौजूदा 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी, जिससे उनका प्रतिशत हिस्सा भी 23.76% से बढ़कर 23.87% तक पहुंच जाएगा।
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने भी इस परिसीमन बिल का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह कानून 2023 में ही पास हो चुका था और महिलाओं को उनका हक देने के लिए इसे 2024 के चुनावों में ही लागू कर दिया जाना चाहिए था।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बहस में हिस्सा लेते हुए जातिगत जनगणना और महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं को शामिल करने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया।
वहीं, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मियां अल्ताफ अहमद ने परिसीमन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और असम में परिसीमन के नाम पर केवल अराजकता और भ्रम का माहौल पैदा किया गया है।
विपक्ष के इन तमाम हमलों का सत्ता पक्ष ने भी पुरजोर तरीके से जवाब दिया। महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए असंसदीय शब्दों की निंदा करते हुए कहा कि विपक्ष का यह रवैया 33% आरक्षण की आस लगाए बैठीं करोड़ों महिलाओं की उम्मीदें तोड़ने वाला है।
केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने डीएमके के तर्कों को ‘डर फैलाने वाला’ बताया। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद को एम.के. स्टालिन का छोटा भाई बताते थे, लेकिन सीट बंटवारे के विवाद के बाद अब बड़े भाई छोटे भाई से नाराज दिख रहे हैं और कांग्रेस अपनी स्वतंत्र सोच खो चुकी है।
सदन में चर्चा के दौरान कई बार हंगामे और तीखी नोकझोंक की स्थिति भी बनी। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर आज ही 543 सीटों पर महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए, तो दक्षिणी राज्यों का भारी नुकसान होगा और इसके लिए सीधे तौर पर राहुल गांधी जिम्मेदार होंगे।
इस बीच, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के अपना भाषण देकर तुरंत सदन से बाहर चले जाने पर नियम विरुद्ध बताते हुए आपत्ति जताई।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी प्रधानमंत्री पर की गई टिप्पणियों को लेकर नाराजगी जाहिर की, जिसके बाद स्पीकर ओम बिरला और पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल को कई बार सदस्यों से सदन की गरिमा और शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
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