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ईरान संकट का असर: अहमदाबाद के 100 साल पुराने मशहूर ‘चंद्रविलास’ में बंद हुई चाय, गैस किल्लत से जूझ रहे स्ट्रीट फूड वेंडर्स

| Updated: March 25, 2026 13:18

गैस किल्लत का भारी असर: 100 साल पुराने 'चंद्रविलास' ने मेन्यू से हटाई चाय, कोयले के चूल्हे पर लौटने को मजबूर हुए मानेकचौक के स्ट्रीट फूड वेंडर्स

अपने ग्राहकों को एक सदी से भी अधिक समय तक चाय परोसने के बाद, पुराने अहमदाबाद के मशहूर रेस्तरां ‘चंद्रविलास’ ने फिलहाल अपनी आखिरी प्याली चाय बना ली है। अब आने वाले कई हफ्तों तक यहां लोगों को चाय की चुस्कियां लेने का मौका नहीं मिलेगा।

साल 1900 में एक चाय की दुकान के रूप में शुरू हुए इस रेस्तरां ने अपने सुनहरे दौर में एक दिन में 18,000 कप तक चाय बेची है। लेकिन आज पूरा शहर एलपीजी (LPG) संकट की भारी मार झेल रहा है। अपने बचे हुए कुछ गैस सिलेंडरों को बचाने के लिए चंद्रविलास ने अपने मेन्यू से चाय के साथ-साथ कई तले हुए स्नैक्स को भी हटा दिया है।

दरअसल, ईरान में चल रहा संकट अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी की इस कमी का सीधा और गहरा असर गांधी रोड और मानेकचौक जैसे इलाकों के भोजनालयों पर साफ देखा जा सकता है। ये वे जगहें हैं जो हर रात स्ट्रीट फूड के प्रमुख केंद्र में तब्दील हो जाती हैं।

चंद्रविलास के मालिक मालव जोशी ने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि परिस्थितियों ने उन्हें ये बड़े बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने बताया कि एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के कारण वे अब पारंपरिक कोयले के चूल्हे और इलेक्ट्रिक कॉइल का इस्तेमाल करने लगे हैं।

गैस की खपत कम करने के लिए उन्होंने चाय के अलावा सेव-उसल, पापड़ी और फुलवाड़ी जैसी तली हुई चीजों को भी फिलहाल अपने मेन्यू से हटा दिया है। मालव जोशी के मुताबिक, खाद्य व्यवसाय से जुड़ा हर व्यक्ति इस गंभीर समस्या का सामना कर रहा है और वे सिर्फ इस उम्मीद में काम चला रहे हैं कि हालात जल्द सुधरेंगे।

मानेकचौक स्थित ‘न्यू कर्णावती दाबेली वड़ापाव एंड सैंडविच पिज्जा सेंटर’ के मालिक योगेश शर्मा ने भी यही दर्द बयां किया। उनका कहना है कि उनकी दुकान अब आखिरी बचे हुए कुछ सिलेंडरों के भरोसे ही चल रही है।

शर्मा ने बताया कि यह गैस संकट कब खत्म होगा, इसकी कोई स्पष्ट समय सीमा नजर नहीं आ रही है। अगर गैस की आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे पूरी तरह से कोयले के चूल्हों पर शिफ्ट होने की योजना बना चुके हैं।

यह स्थिति सैंडविच बेचने वालों के लिए विशेष रूप से ज्यादा गंभीर है। इनमें से कई वेंडर ग्रिलिंग और टोस्टिंग के लिए पूरी तरह से एलपीजी गैस पर ही निर्भर होते हैं। ‘खोडियार सैंडविच’ के अरविंद मोदी, जो ‘मानेक चौक फूड एसोसिएशन’ के संयोजक भी हैं, ने इस व्यवसाय पर पड़ने वाले भारी असर को रेखांकित किया।

मोदी ने बताया कि सैंडविच का कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है क्योंकि उनका पूरा काम एलपीजी सिलेंडर पर टिका होता है। उनका कहना है कि अगर यह कमी ऐसे ही जारी रही, तो मजबूरी में उन्हें टोस्टेड सैंडविच के विकल्प कम करने पड़ेंगे।

अरविंद मोदी के अनुसार, कई वेंडर्स पहले से ही अपने मेन्यू और काम करने की रणनीतियों की दोबारा समीक्षा कर रहे हैं। कोयले की आंच पर खाना बनाना हर व्यंजन के लिए सही नहीं होता, क्योंकि इससे स्वाद और बनाने के समय, दोनों पर काफी असर पड़ता है। फिलहाल, मानेक चौक के विक्रेता अपने सीमित संसाधनों के बीच ग्राहकों को बेहतर सेवा देने का संतुलन बनाने की पूरी जद्दोजहद कर रहे हैं।

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