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साइबर ठगों पर गुजरात पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 2289 करोड़ के खुलासे के बाद ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ लॉन्च

| Updated: June 2, 2026 13:13

2289 करोड़ रुपये के घोटाले के खुलासे के बाद गुजरात पुलिस एक्शन में है। साइबर अपराधियों और म्यूल खातों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस ने एक नई 'सर्जिकल स्ट्राइक' शुरू कर दी है।

डिजिटल धोखाधड़ी और बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए गुजरात सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य भर में 2 जून, 2026 से ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ का शंखनाद कर दिया गया है। यह अहम फैसला गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी की अध्यक्षता में हुई एक देर रात की आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद लिया गया।

इस उच्च स्तरीय बैठक में गुजरात के तमाम शीर्ष पुलिस अधिकारी, पुलिस आयुक्त और जिला पुलिस प्रमुख शामिल हुए। समीक्षा के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे साइबर अपराध के पीछे काम करने वाले नेटवर्क और ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) के खिलाफ एक कड़े अभियान को अंजाम दें। पुलिस महकमे ने इस कार्रवाई को साइबर अपराधियों पर एक “सर्जिकल स्ट्राइक” का नाम दिया है।

राज्यव्यापी स्तर पर शुरू की गई यह नई कार्रवाई ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0’ की अपार सफलता के ठीक एक दिन बाद अमल में लाई गई है। पहले चरण के नतीजों ने सभी को चौंका दिया था, क्योंकि इसमें 2,289 करोड़ रुपये के भारी-भरकम साइबर फ्रॉड लेनदेन का पर्दाफाश हुआ था।

आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो पहले चरण के अभियान में पुलिस ने 565 एफआईआर दर्ज कीं और साइबर धोखाधड़ी में लिप्त 638 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। इस दौरान 913 म्यूल खातों पर सख्त एक्शन लिया गया। जांच में पता चला कि ये खाते पूरे भारत में फैले 4,000 से अधिक साइबर अपराध के मामलों से सीधे जुड़े हुए थे।

इस व्यापक अभियान का नेतृत्व गुजरात पुलिस के ‘साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CCOE) ने किया था। इस मिशन में राज्य के सभी पुलिस आयुक्तालयों, रेंज कार्यालयों, स्थानीय अपराध शाखा (LCB) इकाइयों और साइबर पुलिस स्टेशनों ने अपना पूरा सहयोग दिया।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर ये म्यूल अकाउंट होते क्या हैं? दरअसल, यह एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ऑनलाइन ठगी से मिले पैसे को मंगाने, ट्रांसफर करने और छिपाने के लिए करते हैं। जिस व्यक्ति के नाम पर यह खाता होता है, उसे “मनी म्यूल” कहा जाता है।

कई मामलों में लोग चंद रुपयों के लालच में जानबूझकर अपने बैंक खातों का एक्सेस ठगों को किराए पर दे देते हैं या बेच देते हैं। वहीं, कुछ अन्य मामलों में मासूम खाताधारकों को फर्जी नौकरी, कमीशन या निवेश योजनाओं का झांसा देकर फंसाया जाता है। ये खाते ही साइबर धोखाधड़ी की वित्तीय रीढ़ होते हैं।

जालसाज चोरी किए गए पैसे को अलग-अलग बैंक खातों और कई लेनदेन के जरिए घुमाते हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए पैसे के मूल स्रोत और अंतिम गंतव्य का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। पकड़ में आने से बचने और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को तोड़ने के लिए साइबर गैंग अक्सर ऐसे खातों की एक लंबी चेन बनाते हैं।

जांचकर्ताओं का कहना है कि संगठित साइबर धोखाधड़ी में म्यूल खातों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण गुजरात इस वक्त विशेष निगरानी वाले राज्यों में शामिल है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि गुजरात पुलिस इन नेटवर्कों पर नकेल कसने वाली सबसे आक्रामक राज्य पुलिस बलों में से एक बनकर भी उभरी है।

पहले चरण के अभियान के दौरान, जांच टीमों ने ‘इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर’ (I4C), ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ (NCRP), समन्वय प्लेटफार्मों और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 से मिली खुफिया जानकारी का गहराई से विश्लेषण किया। इस दौरान जिला स्तर के नोडल अधिकारी और विशेष टीमें तैनात की गईं। इसके साथ ही, बैंकों को रियल-टाइम सूचनाएं साझा करने का निर्देश दिया गया ताकि संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान हो सके।

इस सख्ती के नतीजे साफ दिखाई दिए। संदिग्ध लेनदेन से जुड़े चेक विड्रॉल (पैसे निकालने) में भारी गिरावट दर्ज की गई। यह आंकड़ा लगभग 126 करोड़ रुपये प्रति माह से गिरकर करीब 25 करोड़ रुपये पर आ गया, जो लगभग 80 प्रतिशत की कमी है।

इसके अलावा, प्रथम स्तर के म्यूल खातों (जहां चोरी का पैसा सबसे पहले जमा होता है) में लगभग 30 प्रतिशत और संदिग्ध एटीएम निकासी में 66 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई।

अधिकारियों का मानना है कि म्यूल खातों पर सीधा प्रहार करने से साइबर क्राइम सिंडिकेट की ताकत काफी हद तक कमजोर हो जाती है। अब राज्य सरकार एक और आक्रामक दूसरे चरण की ओर बढ़ रही है।

‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ के तहत पुलिस का पूरा जोर पूरे गुजरात में म्यूल-खाता नेटवर्क को पहचानने, उन्हें फ्रीज करने और पूरी तरह से नष्ट करने पर होगा। इस बात की पूरी संभावना है कि जांचकर्ता कई और खातों का पर्दाफाश करेंगे और राज्य के भीतर व बाहर काम कर रहे संगठित समूहों पर अपना शिकंजा कसेंगे।

सिर्फ छापामारी ही नहीं, बल्कि अधिकारी तकनीक आधारित रोकथाम की भी तैयारी कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जुड़ी पहलों के तहत, ‘इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म कॉर्पोरेशन’ (IDPIC) के माध्यम से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित रिस्क-स्कोरिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। यह प्रणाली लेनदेन को कम, मध्यम या उच्च जोखिम के रूप में बांटेगी, ताकि धोखाधड़ी के बड़े पैमाने पर फैलने से पहले ही बैंक संदिग्ध गतिविधियों को भांप सकें।

इसके अतिरिक्त, ‘mulehunter.ai’ नाम से एक समर्पित सूचना-साझाकरण रजिस्ट्री भी तैयार की जा रही है। इसकी मदद से बैंक और जांच एजेंसियां संदिग्ध खातों और सामने आ रहे धोखाधड़ी के नए पैटर्न्स पर खुफिया जानकारी का आसानी से आदान-प्रदान कर सकेंगी।

आज से शुरू हुए ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ के साथ गुजरात पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक नया और राज्यव्यापी मोर्चा खोल दिया है। अधिकारियों का संदेश बिल्कुल साफ है, साइबर जालसाज और उन्हें मदद देने वाले वित्तीय नेटवर्क अब पूरी तरह से रडार पर हैं। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और भी अधिक तेज होने वाली है।

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