ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला खमेनेई को लेकर किए गए एक फेसबुक पोस्ट के कारण जम्मू-कश्मीर के बारामूला निवासी 29 वर्षीय अमजद अली भट को सऊदी अरब में तीन महीने तक हिरासत में रहना पड़ा। सऊदी के एक अज्ञात हिरासत केंद्र में बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे रहने के बाद अब अमजद सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। उनके लापता होने और परिवार द्वारा दोनों देशों के अधिकारियों से लगाई गई गुहार ने मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
शुक्रवार को घर वापसी के बाद अमजद ने अपने साथ बीती खौफनाक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 25 मार्च को वह दम्मम स्थित अपने कार्यस्थल पर मौजूद थे। तभी वहां कम से कम छह सुरक्षा अधिकारी पहुंचे, जिनमें से एक वर्दी में था। अधिकारियों ने पूछताछ के लिए उन्हें अपने साथ चलने को कहा और दावा किया कि इसमें केवल दो घंटे का समय लगेगा।
अधिकारियों की बात मानकर अमजद उनके साथ पुलिस स्टेशन चले गए। वहां पहुंचते ही उनका पासपोर्ट और अन्य पहचान पत्र जब्त कर लिए गए और उनसे एक पावती पर हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद उनसे 5 मार्च को किए गए उनके एक फेसबुक पोस्ट के बारे में पूछताछ की गई। अमजद ने हामी भरते हुए उन्हें बताया कि वह केवल एक शोक संदेश था, इससे ज्यादा कुछ नहीं।
इसके बाद अधिकारी अमजद को एक हिरासत केंद्र ले गए, जहां उन्हें छह अन्य लोगों के साथ एक छोटे से कमरे में बंद कर दिया गया। अमजद के अनुसार, जब उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में पूछा, तो अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें इस बारे में बाद में पता चल जाएगा। उस हिरासत केंद्र में बांग्लादेश, पाकिस्तान, यमन, मिस्र और सीरिया के लोग भी कैद थे।
हिरासत के दौरान लगभग हर दूसरे दिन अमजद से लंबी पूछताछ की जाती थी। एक समय तो उन्हें यह भी लगने लगा था कि शायद वह कभी रिहा नहीं हो पाएंगे। इस पूरी अवधि के दौरान उन्हें अपने परिवार से बात करने की भी अनुमति नहीं दी गई थी, जिससे उनका तनाव और बढ़ गया था।
आखिरकार वह पल आ ही गया जिसके लिए अमजद दिन-रात प्रार्थना कर रहे थे। 25 जून को उन्हें बताया गया कि उन्हें रिहा किया जा रहा है और वापस भारत भेजा जा रहा है। यह खबर सुनकर अमजद राहत से रो पड़े। सऊदी अधिकारियों ने रियाद से दिल्ली के लिए उनकी फ्लाइट की व्यवस्था की और इसके बाद वह सुरक्षित अपने घर बारामूला पहुंच गए।
अमजद के पिता और जम्मू-कश्मीर हस्तशिल्प विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी गुलाम अली भट ने कहा कि पिछले तीन महीने उनके परिवार के लिए बेहद दर्दनाक रहे। उन्होंने बताया कि अब उनका बेटा वापस आ गया है और उसने फैसला किया है कि वह भारत में ही अपने लिए काम तलाशेगा और भविष्य में कभी विदेश नहीं जाएगा।
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