रविवार को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हो रहे एक वाणिज्यिक जहाज ‘एमवी गोल्डन लियो’ पर हुए रूसी हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। इस जहाज पर कुल 17 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें से पांच भारतीय थे। भारत सरकार ने इस भीषण हमले की कड़ी निंदा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, नागरिक चालक दल के जीवन को खतरे में डालना और नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करना बेहद निंदनीय है और इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
इधर, मध्य पूर्व में भी तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लगाने का ऐलान कर दिया। यह कदम अमेरिका के खिलाफ एक नया मोर्चा खोलने के साथ ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। हालांकि, हूतियों ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वे इस नाकेबंदी को जमीनी स्तर पर कैसे लागू करेंगे।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान ने हूतियों पर दबाव डाला था कि यदि अमेरिका उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रखता है, तो वे लाल सागर के बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर दें। हूती सशस्त्र बलों ने एक बयान जारी कर कहा कि वे ‘जैसे को तैसा’ की तर्ज पर सऊदी अरब के खिलाफ यह समुद्री प्रतिबंध लगा रहे हैं। उन्होंने इसे यमन पर सऊदी द्वारा लगाए गए अन्यायपूर्ण घेराबंदी का सीधा जवाब बताया है। फिलहाल सऊदी अरब की ओर से इस फैसले पर कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अगर बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद हो जाता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में 7 प्रतिशत की भारी गिरावट आ सकती है। इससे सऊदी अरब का अधिकांश तेल निर्यात क्षेत्र में ही फंस जाएगा। खाड़ी युद्ध के कारण वैश्विक तेल प्रवाह पहले ही 10 प्रतिशत तक गिर चुका है, और यह नई रुकावट दुनिया भर में ऊर्जा संकट को और अधिक गहरा कर देगी।
वाशिंगटन स्थित जोखिम सलाहकार फर्म ‘बाशा रिपोर्ट’ के संस्थापक और यमनी विश्लेषक मोहम्मद अलबाशा के अनुसार, मुख्य सवाल यह है कि क्या विद्रोही सच में सऊदी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों पर हमला करेंगे। अलबाशा का मानना है कि अगर कोई सीधा हमला नहीं भी होता है, तो भी केवल इस घोषणा से शिपिंग उद्योग में खलबली मचेगी और सऊदी बंदरगाहों के लिए अनिश्चितता पैदा होगी। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा यह है कि हूती सिर्फ धमकियां देते हैं या कोई प्रत्यक्ष कार्रवाई करते हैं।
इस नए संकट की पृष्ठभूमि में पिछले सप्ताह की एक बड़ी सैन्य घटना भी शामिल है। वर्षों की शांति के बाद, सऊदी अरब और हूतियों के बीच हाल ही में भारी गोलीबारी हुई थी। इसने 2022 के उस युद्धविराम को गंभीर खतरे में डाल दिया है जो अपनी समय सीमा समाप्त होने के बावजूद अब तक कायम था। यह विवाद तब भड़का जब तेहरान से आ रहा एक ईरानी विमान सना में उतरने की कोशिश कर रहा था, जो यमन के हवाई क्षेत्र पर सऊदी अरब के प्रभुत्व को एक सीधी चुनौती थी।
इससे पहले भी हूतियों ने लाल सागर के जरिए होने वाले नौवहन को बाधित करने की कोशिश की है। नवंबर 2023 में गाजा युद्ध के दौरान उन्होंने इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू किए थे। इसके चलते कई जहाजों को यूरोप से सीधे आने के बजाय अफ्रीका का लंबा चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। यमन की सीमा और तटरेखा सऊदी अरब के साथ लगती है। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने के बाद से सऊदी अरब का लाल सागर स्थित यनबू बंदरगाह तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
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