गुरुवार को दक्षिण गुजरात में मानसून ने अब तक की सबसे भयानक तबाही मचाई है। मूसलाधार बारिश ने वलसाड, नवसारी और सूरत जिलों के हालात इतने बिगाड़ दिए हैं कि आम जनजीवन पूरी तरह से बेबस नजर आ रहा है।
महाराष्ट्र की सीमा से सटे उमरगाम में तो आसमान से आफत ही बरस पड़ी। मौसम विभाग के अनुसार, यहां 24 घंटे के भीतर 1,064 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह भारत के इतिहास में एक दिन में हुई तीसरी सबसे ज्यादा बारिश है। इस जलजले ने 26 जुलाई 2005 को मुंबई में हुई 944 मिमी बारिश के उस खौफनाक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
इस जानलेवा बारिश ने दक्षिण गुजरात में कम से कम दो लोगों की जिंदगी छीन ली है। वलसाड के कपराडा तालुका स्थित कोसिमपाड़ा फलिया में भूस्खलन की चपेट में आने से 55 वर्षीय महिला लाडकी थोटगा की मौत हो गई। इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति की जान तापी जिले में गई है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। उन्होंने प्रधानमंत्री को बचाव और राहत कार्यों की जमीनी हकीकत से अवगत कराया। अधिकारियों के मुताबिक दक्षिण गुजरात के बाढ़ प्रभावित जिलों में अतिरिक्त एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें भी तेजी से भेजी जा रही हैं।
राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस मोर्चे पर सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ (SDRF) और फायर ब्रिगेड की टीमों को उतार दिया गया है। सूरत शहर और जिले के जलभराव वाले इलाकों से अब तक 4,800 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
सबसे ज्यादा प्रभावित वलसाड जिले से भी 500 से अधिक लोगों का रेस्क्यू किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि अकेले वलसाड में 70 सैन्यकर्मी, 3 एनडीआरएफ टीमें, 5 एसडीआरएफ टीमें, 25 फायर ब्रिगेड जवान और 5 रेस्क्यू बोट तैनात की गई हैं। इसके साथ ही राहत और पुनर्वास कार्य की सीधी निगरानी के लिए 10 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को भी विशेष रूप से नियुक्त किया गया है।
डायमंड सिटी सूरत के नागरिक एक बार फिर बारिश के आगे असहाय नजर आए। उफनती खाड़ियों का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया और सड़कें पूरी तरह से गायब हो गईं। इस बाढ़ ने शहर के कमजोर बुनियादी ढांचे की पोल खोलकर रख दी है।
उधर नवसारी जिले में लगातार हो रही बारिश से पूर्णा, अंबिका और कावेरी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बिगड़ते हालातों का जायजा लेने के लिए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने नवसारी का दौरा किया और राहत कार्यों की समीक्षा की।
अहमदाबाद और इसके बाहरी इलाकों में भी गुरुवार को जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया। शाम 6 बजे तक शहर में 128 मिमी बारिश हो चुकी थी, जो शहर के 826 मिमी के मौसमी औसत का लगभग 15 प्रतिशत है। भारी जलभराव के कारण ट्रैफिक रेंगता रहा और हजारों यात्री जहां-तहां फंसे रहे।
शहर के पश्चिमी हिस्सों का हाल सबसे बुरा रहा। यहां लोग घुटनों और कमर तक पानी से गुजरते दिखे और जलमग्न सड़कों पर कई वाहन खराब हो गए। लावारिस छोड़ी गई गाड़ियां और पानी से भरी सड़कों पर लगा लंबा जाम लोगों की मुसीबतें बढ़ाता रहा।
आम लोगों के लिए रोजमर्रा का सफर भी किसी बुरे सपने में तब्दील हो गया। आईटी प्रोफेशनल नेहा शाह ने बताया कि इस्कॉन चौराहे से नारणपुरा तक का 9 किलोमीटर का सफर वह आमतौर पर 30 मिनट में तय करती हैं। गुरुवार को वह सुबह 11 बजे निकली थीं और भारी जाम के बीच दोपहर 3 बजे ही ऑफिस पहुंच सकीं। सफर के दौरान वह बस यही प्रार्थना कर रही थीं कि उनकी कार पानी में बंद न हो जाए।
सड़कों का हाल देखकर कई कैब ड्राइवरों ने जलभराव वाले इलाकों में जाने से मना कर दिया और सवारियों को बीच रास्ते में ही उतार दिया। खराब मौसम के कारण स्कूल बसें भी रोक दी गईं, जिसके बाद बदहवास माता-पिता अपने बच्चों को लेने के लिए तुरंत स्कूलों की तरफ भागते नजर आए। एहतियात के तौर पर निचले इलाकों में स्थित ज्यादातर अंडरपास बंद कर दिए गए हैं और वहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
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