एक हफ्ते की मूसलाधार बारिश ने गुजरात के मानसून का नक्शा पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। यह राज्य अब भारत के सबसे अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में शुमार हो गया है, जबकि सौराष्ट्र के कुछ हिस्से अभी भी पानी के लिए तरस रहे हैं। यह विषमता बेहद चौंकाने वाली है।
एक तरफ वलसाड 216 प्रतिशत अतिरिक्त बारिश के साथ देश का सबसे अधिक वर्षा वाला जिला बन गया है, तो दूसरी तरफ देवभूमि द्वारका उन चंद जिलों में शामिल है जहां जुलाई में 80 प्रतिशत से अधिक कम बारिश हुई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 1 से 25 जुलाई तक के आंकड़ों पर गौर करें, तो वलसाड में सामान्य 681.9 मिमी के मुकाबले 2,157.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह पूरे भारत के किसी भी जिले में सबसे अधिक अतिरिक्त बारिश का रिकॉर्ड है।
इसके ठीक विपरीत देवभूमि द्वारका में सामान्य 180.6 मिमी के मुकाबले महज 36.3 मिमी ही पानी बरसा है। यह आंकड़ा इसे देशभर के उन गिने-चुने इलाकों की सूची में खड़ा कर देता है, जहां बारिश की कमी 80 फीसदी से ज्यादा है।
देश भर में असाधारण रूप से भारी बारिश वाले ज्यादातर जिले मुख्य रूप से गुजरात, ओडिशा और महाराष्ट्र में केंद्रित हैं। वहीं, सबसे अधिक सूखे या बारिश की कमी वाले इलाके मुख्य रूप से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में हैं। मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई महीने में राज्यों के स्तर पर गुजरात 63 प्रतिशत अतिरिक्त बारिश के साथ दूसरे स्थान पर है।
इस सूची में ओडिशा 67 प्रतिशत के साथ पहले नंबर पर है। ओडिशा के 16 जिलों के मुकाबले गुजरात के 15 जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है।
महज कुछ दिनों की लगातार बारिश ने गुजरात की तस्वीर को पूरी तरह पलट दिया है। पिछले रविवार तक राज्य के 12 जिलों में बारिश की कमी 60 प्रतिशत से ज्यादा थी। अब यह आंकड़ा घटकर सिर्फ दो जिलों तक सिमट गया है, जिनमें देवभूमि द्वारका (-87%) और पोरबंदर (-61%) शामिल हैं। आईएमडी के तहत आने वाले राज्य के कुल 33 जिलों में से 5 में 60 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त बारिश हुई है। इसके अलावा 10 जिलों में 20 से 60 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, 10 जिले सामान्य श्रेणी में हैं, 6 में बारिश की कमी है और 2 जिले भारी कमी वाली श्रेणी में हैं।
पूरे राज्य के मानसून की स्थिति में यह बदलाव बहुत तेजी से आया है। 20 जुलाई तक राज्य में बारिश की 31 प्रतिशत कमी थी, जो एक हफ्ते के भीतर ही 12 प्रतिशत की अधिकता में बदल गई। हालांकि, क्षेत्रों के हिसाब से यह असमानता अभी भी बनी हुई है। सौराष्ट्र और कच्छ में अभी भी 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की जा रही है, जबकि शेष गुजरात में 36 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
मौसम विभाग के अधिकारियों ने इस भारी बारिश की वजह अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों और कई मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने को बताया है। मंगलवार से शुक्रवार के बीच हुई इस व्यापक बारिश में अहमदाबाद की सदी की चौथी सबसे बड़ी एकल बारिश का रिकॉर्ड भी शामिल है।
हालांकि, जलभराव और भारी नुकसान से जूझ रहे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए थोड़ी राहत की खबर है। मौसम कार्यालय ने आने वाले सप्ताह में बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान जताया है।
यह भी पढ़ें-








