गुजरात में पिछले पांच दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी जलभराव के कारण राज्य के कई हिस्सों में यातायात लगभग ठप है। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालातों में 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारी गर्भवती महिलाओं के लिए किसी संकटमोचक से कम साबित नहीं हुए।
ईएमआरआई 108 के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस जलभराव के बीच टीमों ने करीब 75 महिलाओं को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने और विषम परिस्थितियों में उनकी डिलीवरी कराने में अहम भूमिका निभाई है।
बाढ़ जैसी इस स्थिति के बीच 25 जुलाई को ढोलका के त्रांसड गांव से एक ऐसी ही आपातकालीन कॉल आई। यहां एक 20 वर्षीय महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। सड़कों पर पानी लबालब भरा होने के कारण एंबुलेंस का महिला के घर तक पहुंचना बिल्कुल नामुमकिन था। ऐसे में एंबुलेंस के ड्राइवर, एक इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन और दो अन्य लोगों ने भरे हुए पानी को पैदल ही पार किया और महिला के घर तक पहुंचे।
महिला को सुरक्षित एंबुलेंस तक लाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने ‘स्पाइन बोर्ड’ का सहारा लिया। आमतौर पर इस मेडिकल बोर्ड का इस्तेमाल रीढ़ की हड्डी की चोट वाले मरीजों को ले जाने के लिए किया जाता है। कड़ी मशक्कत के बाद महिला को ढोलका के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उसने सामान्य रूप से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
ऐसी ही एक अन्य घटना गांगड गांव के पास देखने को मिली, जहां सड़क किनारे ही एक नई जिंदगी ने दुनिया में कदम रखा। करीब 28-29 वर्ष की एक गर्भवती महिला को गांगड से बगोदरा के पास कोठ ले जाया जा रहा था। रास्ते में भारी जलभराव के कारण उनका वाहन आगे नहीं बढ़ सका और इसी दौरान महिला की प्रसव पीड़ा बेहद तेज हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर मौजूद टेक्नीशियन की सूझबूझ और मदद से महिला ने सड़क किनारे ही एक बच्ची को जन्म दिया।
ढोलका इलाके में ही एक और अनोखा मामला सामने आया, जहां बाढ़ के बीच 25 वर्षीय एक गर्भवती महिला के लिए ट्रैक्टर ही एंबुलेंस बन गया। जलभराव के कारण जब 108 एंबुलेंस का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया, तो स्थानीय लोगों और ईएमआरआई कर्मियों ने तुरंत एक विकल्प तलाशा। करीब चार से पांच लोगों की मदद से महिला को सावधानीपूर्वक एक ट्रैक्टर में शिफ्ट किया गया। इसी ट्रैक्टर के जरिए उसे पास के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी सुरक्षित डिलीवरी संपन्न हुई।
इन तमाम घटनाओं पर ईएमआरआई 108 के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं कई बार जानलेवा साबित हो सकती हैं। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सही समय पर उचित चिकित्सा देखभाल मिलना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। मुश्किल हालातों में स्वास्थ्य कर्मियों की इस तत्परता ने यह साबित कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिंदगियां बचाने का जज्बा किसी भी बाधा से बड़ा होता है।
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