23 जुलाई को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे के बीच अहमदाबाद में औसतन 95.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। इस तेज बारिश ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम और मानसून से पहले किए गए दावों की सच्चाई उजागर कर दी।
प्रशासन का दावा था कि जलभराव वाले इलाकों की सफाई हो चुकी है, लेकिन इनमें से 90 प्रतिशत इलाके दोबारा पानी में डूब गए। इनमें शहर के पश्चिमी हिस्से के 34 ऐसे क्षेत्र भी शामिल हैं जहां से पानी की निकासी पूरी तरह ठप नजर आई।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात तीन खास इलाकों के बुनियादी ढांचे की विफलता है। पिछले एक दशक में इन तीन जगहों को मानसून के अनुकूल बनाने और जलभराव रोकने के लिए 60 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
ये इलाके बोदकदेव वार्ड में महिला तालाब के पास का क्षेत्र, वेजलपुर वार्ड का श्रीनंदनगर और कठवाड़ा स्थित मधुमालती अपार्टमेंट हैं। इतनी भारी-भरकम रकम खर्च होने के बावजूद 23 जुलाई को इन तीनों रिहायशी सोसायटियों के अंदर बारिश का गंदा पानी घुस गया।
श्रीनंदनगर और मधुमालती अपार्टमेंट में हालात इतने बेकाबू हो गए कि अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) को वहां फंसे निवासियों के लिए खाने के पैकेट तक बांटने पड़े। लोगों के लिए यह मुसीबत नई नहीं है।
इससे पहले अगस्त 2024 में भी भारी बारिश के कारण मधुमालती अपार्टमेंट में भयंकर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई थी। उस दौरान एएमसी की फायर ब्रिगेड टीम को वहां मोर्चा संभालना पड़ा था और 70 निवासियों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया था।
कठवाड़ा का यह इलाका साल 2020 तक औडा (Auda) के अधिकार क्षेत्र में आता था, जिसके बाद इसे एएमसी की सीमा में शामिल कर लिया गया। औडा ने भी अपने समय में इस इलाके को बाढ़ मुक्त बनाने की कई कोशिशें की थीं, लेकिन सभी प्रयास विफल साबित हुए।
जलभराव का यह मुद्दा इतना गंभीर रहा है कि साल 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी मधुमालती अपार्टमेंट का दौरा किया था। उस वक्त भी यह पूरी सोसाइटी पानी में डूबी हुई थी और मुख्यमंत्री ने लोगों को इस समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया था।
औडा और एएमसी द्वारा करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाने के बावजूद, ये तीनों इलाके बिना किसी नतीजे के हो रहे सरकारी खर्च का जीता-जागता उदाहरण बने हुए हैं। लोग सालों से इस परेशानी को झेलने को मजबूर हैं और सिस्टम से हार मान चुके हैं।
मधुमालती के निवासियों को पिछले नौ वर्षों से इस समस्या से कोई राहत नहीं मिली है। इसी तरह श्रीनंदनगर के लोग 12 साल से और बोदकदेव स्थित वनश्री विला सोसाइटी के लोग पिछले पांच साल से जलभराव की यही पीड़ा बर्दाश्त कर रहे हैं।
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